- दिव्या मित्तल के ऐलान के बाद इन दिनों अफसरों के नेता बनने की खबरें चर्चा में हैं.
- CBI के पूर्व डायरेक्टर नागेश्वर राव सर्वजन सनातन पार्टी के अध्यक्ष बनकर काशी से शुरुआत कर चुके हैं.
- जानकार मानते हैं कि नेताओं से अच्छे प्रशासक होने की अपेक्षा होती है.
अफसरों के नेता बनने की खबरें इन दिनों काफी चर्चा में हैं. अलंकार अग्निहोत्री पीसीएस की नौकरी छोड़ कर नेता बन गए तो दिव्या मित्तल भी IAS से इस्तीफा देकर राजनीतिक राह की तलाश में हैं. सीबीआई के पूर्व डायरेक्टर नागेश्वर राव तो सर्वजन सनातन पार्टी के अध्यक्ष बन गए हैं. उन्होंने काशी से राजनीति की शुरुआत की है. इस तरह यूपी चुनाव से ठीक पहले तीन चर्चित अफसर राजनीति में कूद पड़े हैं. लेकिन यह पहला मौका नहीं है, जब किसी अफसर ने राजनीति का रास्ता पकड़ा है. इससे पहले पीएल पूनिया, यशवंत सिन्हा, जनरल वीके सिंह, किरण बेदी, अश्विनी वैष्णव और एस. जयशंकर जैसे उदाहरण भरे पड़े हैं, जो राजनीति में आए और सफल रहे.
हाल ही में आए लोगों में असीम अरुण और राजेश्वर सिंह जैसे नाम भी हैं, जो यूपी में विधायक हैं और काफी असर रखते हैं. किसी अफसर का नया दल बनाकर कामयाब होने की कहानी भले ही अरविंद केजरीवाल जैसे एकाध उदाहरण तक सीमित हो, लेकिन बड़े दलों में एंट्री लेकर ऊंचे पदों तक पहुंचने वाले कई नेता हैं, जो पहले अफसर हुआ करते थे. जानकार मानते हैं कि इनकी कामयाबी की एक वजह यह भी है कि नेताओं से अपेक्षा की जाती है कि वे अच्छे प्रशासक भी हों.
डॉ. एस. जयशंकर: 1977 बैच के भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी डॉ. एस. जयशंकर ने भारत के विदेश सचिव (2015-2018) के रूप में सेवा दी और ऐतिहासिक भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते की वार्ता में अहम भूमिका निभाई. नौकरी से रिटायर होने के बाद उन्होंने मई 2019 में औपचारिक रूप से बीजेपी की मेंबरशिप ली और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल में भारत के विदेश मंत्री बने.
अश्विनी वैष्णव: 1994 बैच के ओडिशा कैडर के IAS अधिकारी अश्विनी वैष्णव राजनीति में आने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यालय (PMO) में उप सचिव भी रहे. साल 2019 में बीजेपी में शामिल हुए और ओडिशा से राज्यसभा पहुंचे. वे रेल मंत्री, सूचना एवं प्रसारण मंत्री और इलेक्ट्रॉनिक्स व आईटी मंत्री जैसी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभा रहे हैं.
जनरल वी.के. सिंह: भारतीय थल सेना के 24वें प्रमुख जनरल वी.के. सिंह ने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भी हिस्सा लिया था. मई 2012 में सेना से रिटायर होने के बाद वे मार्च 2014 में बीजेपी में शामिल हुए. उन्होंने उत्तर प्रदेश की गाजियाबाद सीट से दो बार (2014 और 2019) बड़े अंतर से लोकसभा चुनाव जीता. वे केंद्र सरकार में विदेश राज्य मंत्री, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री और नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री जैसे पदों पर रहे.
अरविंद केजरीवाल (पूर्व IRS): भारतीय राजस्व सेवा के पूर्व अधिकारी केजरीवाल ने भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) का गठन किया और दिल्ली के मुख्यमंत्री बने.
यशवंत सिन्हा (पूर्व IAS): 1960 बैच के आईएएस अधिकारी रहे सिन्हा ने प्रशासनिक सेवा छोड़ राजनीति चुनी और देश के वित्त मंत्री और विदेश मंत्री जैसे बड़े पदों पर रहे.
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अजीत जोगी (पूर्व IAS): मध्य प्रदेश कैडर के आईएएस अफसर रहे जोगी ने नौकरी छोड़ कांग्रेस का हाथ थामा और छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री बने.
हरदीप सिंह पुरी (पूर्व IFS): पूर्व सीनियर राजनयिक पुरी ने विदेश सेवा के बाद बीजेपी जॉइन की और वर्तमान में केंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं.
आर.के. सिंह (पूर्व IAS): पूर्व केंद्रीय गृह सचिव (बिहार कैडर) रहे सिंह ने रिटायरमेंट के बाद बीजेपी की सदस्यता ली और केंद्रीय ऊर्जा मंत्री के रूप में कार्य किया.
किरण बेदी (पूर्व IPS): भारत की पहली महिला आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने भी रिटायरमेंट के बाद राजनीति में कदम रखा, बीजेपी की ओर से दिल्ली सीएम पद की उम्मीदवार बनीं और पुडुचेरी की उपराज्यपाल भी रहीं.
मीरा कुमार (पूर्व IFS): विदेश सेवा की अधिकारी रहीं मीरा कुमार ने राजनीति में आकर लोकसभा की पहली महिला अध्यक्ष बनने का गौरव हासिल किया.
ओपी चौधरी: छत्तीसगढ़ कैडर के आईएएस अधिकारी ओपी चौधरी ने भी सरकारी सेवा से इस्तीफा देकर अपनी सियासी पारी शुरू की. वे 2005 बैच के आईएएस अधिकारी हैं. रायपुर के कलेक्टर भी रह चुके हैं. उन्होंने अगस्त 2018 में आईएएस पद से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद बीजेपी में शामिल हो गए. ओपी चौधरी अब छत्तीसगढ़ सरकार में वित्त मंत्री हैं.
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के. अन्नामलाई (पूर्व IPS): कर्नाटक कैडर के इस आईपीएस अधिकारी के. अन्नामलाई ने साल 2019 में इस्तीफा दिया और बीजेपी (BJP) में शामिल हो गए. वे वह तमिलनाडु बीजेपी के अध्यक्ष रह चुके हैं.
अपरजिता सारंगी (पूर्व IAS): ओडिशा कैडर की आईएएस अधिकारी रहीं सारंगी ने वीआरएस यानी वॉलंट्री रिटायरमेंट स्कीम के तहत रिटायरमेंट लेकर बीजेपी जॉइन की और वह लोकसभा सांसद बनीं.
आर.सी.पी. सिंह (पूर्व IAS): उत्तर प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी रहे सिंह ने नौकरी छोड़कर जेडीयू (JD-U) जॉइन की थी और केंद्रीय मंत्री भी रहे.
सत्यपाल सिंह: मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर (IPS), जिन्होंने बीजेपी में शामिल होकर बागपत से चुनाव जीता और केंद्रीय मंत्री बने.
शाह फैसल: 2009 के UPSC टॉपर (IAS) शाह फैसल ने इस्तीफा देकर जम्मू-कश्मीर में 'जम्मू एंड कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट' पार्टी का गठन किया था. हालांकि, वे बाद में सेवा में वापस लौट आए.
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