- फ्लाईदुबई में शामिल होने से पहले अल-हम्ममी यूएई, ओमान, सीरिया और मोरक्को के बीच आता-जाता रहा था.
- अल-हम्ममी ने फरवरी 2018 में ओमानी एविएशन के लिए काम करना शुरू किया, जब वह लगभग 21 या 22 साल का था.
- फरवरी 2026 के आसपास उसने फ्लाईदुबई एयरलाइंस ज्वाइन किया था, उसकी उम्र अभी 29 साल है
फ्लाईदुबई प्लेन में कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला करने वाला को-पायलट के बारे में दुनिया भर की खुफिया एजेंसियां पता लगा रही हैं. अपने कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला करने के शक में जिस को-पायलट को पकड़ा गया, पता चला है कि उसे पिछले साल ओमान की नेशनल एयरलाइन ने नौकरी से हटा दिया था. ऐसा उसके चरमपंथी विचारों को लेकर चिंता के कारण किया गया था. दो सूत्रों और एक इजरायली अधिकारी के अनुसार, इस पायलट का नाम हमम अल-हम्ममी है और वह ओमान का नागरिक है. सऊदी सरकारी मीडिया ने भी हमम-अल-हम्ममी की पहचान की है. एक सूत्र ने बताया कि उसका जन्म संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में हुआ था; उसके पिता ओमानी और मां सीरियाई हैं और उसने अपनी जिंदगी के कई साल UAE में बिताए हैं.
हमम अल-हम्ममी का सीरिया वाला चैप्टर
हमम अल-हम्ममी की उम्र 29 साल है. पता चला है कि फ्लाईदुबई में शामिल होने से पहले अल-हम्ममी यूएई, ओमान, सीरिया और मोरक्को के बीच आता-जाता रहा था. हालांकि, उसकी जीवनी में अभी भी कुछ अहम जानकारियां गायब हैं, खासकर वह समय जो उसने सीरिया में बिताया. दावा किया जा रहा है कि वो 2011-2017 के बीच सीरिया में रहा था. यह समय उसके जीवन का सबसे रहस्यमयी दौर है.

इस दौरान उसकी उम्र लगभग 14 से 21 साल के बीच थी. सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि उसने सीरिया में समय बिताया था, और बाद में ओमान के अधिकारियों का मानना था कि वहां रहने के दौरान वह चरमपंथी विचारों से प्रभावित हुआ. हालांकि, अभी तक ऐसी कोई लिखित जानकारी उपलब्ध नहीं है, जिससे पता चले कि वह सीरिया कब पहुंचा, वहां कहां रहा, या कितने समय तक रहा. 2011 से 2017 के बीच का समय सीरिया में उसकी मौजूदगी का सबसे संभावित दौर लगता है, क्योंकि यह ओमान के एविएशन सेक्टर में उसके ज्ञात प्रोफेशनल करियर की शुरुआत से पहले का समय है. हालांकि, यह टाइमलाइन के आधार पर लगाया गया एक अनुमान है, न कि पक्की जानकारी.
ओमान से शुरू किया काम, मगर फिर...
अल-हम्ममी ने फरवरी 2018 में ओमानी एविएशन के लिए काम करना शुरू किया, जब वह लगभग 21 या 22 साल का था. वह फरवरी 2025 तक, लगभग सात साल तक कंपनी के साथ जुड़ा रहा. 2020-2023 में उसने यूनिवर्सिटी की पढ़ाई की. ओमानी एविएशन में अपने काम के साथ-साथ, उसने यूके की बकिंघमशायर न्यू यूनिवर्सिटी में एविएशन मैनेजमेंट की पढ़ाई की. यह पढ़ाई रिमोट (दूर से) थी और तीन साल तक चली, जिसमें 2023 में ग्रेजुएशन पूरा हुआ. इसलिए, ब्रिटिश यूनिवर्सिटी में उनकी पढ़ाई का मतलब यह नहीं है कि वह उस दौरान ब्रिटेन में रह रहा था. उसके प्रोफेशनल रिज्यूमे के अनुसार, उसने जनवरी 2022 से ओमानी एविएशन में "बोइंग 737" एयरक्राफ्ट पर फर्स्ट ऑफिसर के तौर पर काम करना शुरू किया. मगर, 2024 का साल उसके करियर का सबसे अहम मोड़ था. सुरक्षा और खुफिया सूत्रों के अनुसार, अल-हम्ममी के विचारों को लेकर चिंताएं पैदा हुईं और उसके पास चरमपंथी सामग्री मिली. तब उसे फ्लाइट ड्यूटी से हटा दिया गया और कंपनी के भीतर ही एडमिनिस्ट्रेटिव (प्रशासनिक) काम में ट्रांसफर कर दिया गया. सूत्रों का कहना है कि ओमानी अधिकारियों ने उसके बारे में अपनी चिंताओं को सीरिया में बिताए गए उनके पिछले समय से जोड़ा, जहां माना जाता है कि वह चरमपंथी विचारधारा के संपर्क में आया था.
फिर कर दिया ये कांड
हालांकि, अभी तक यह पता नहीं चला है कि वह किस खास ग्रुप से जुड़ा थे, और ऐसी कोई सार्वजनिक जानकारी नहीं है, जिससे किसी खास संगठन के साथ उसके जुड़ाव की पुष्टि हो सके. अल-हम्ममी ने कंपनी के साथ लगभग सात साल बिताने के बाद फरवरी 2025 में ओमान एविएशन छोड़ दिया. जून 2025, लगभग चार महीने बाद, वह रॉयल एयर मारोक चला गया और वहां लगभग सात महीने तक रहा. इसके बाद अल-हम्ममी ने जनवरी 2026 में मोरक्को की कंपनी छोड़ दी. इसके बाद फरवरी 2026 के आसपास वह "फ्लाईदुबई" चला गया और घटना से पहले वहां लगभग आठ महीने तक फर्स्ट ऑफिसर के तौर पर काम किया. 30 सितंबर, 2026 को तेल अवीव वाली घटना हुई. अल-हम्ममी दुबई से तेल अवीव जाने वाली "फ्लाईदुबई" की उड़ान में फर्स्ट ऑफिसर था.

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कुल्हाड़ी कहां से आई
एपी के अनुसार, जांच की अगुवाई कर रहे संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने कहा कि बुधवार को एक "आतंकवादी हमले" के दौरान को-पायलट ने कॉकपिट की क्रैश कुल्हाड़ी से हमला किया और तेजी से नीचे गिर रहे विमान का कंट्रोल अपने हाथ में लेने की कोशिश की. उसकी हरकतों से विमान के क्रैश होने का खतरा पैदा हो गया था, जिसमें 182 लोग सवार थे, लेकिन यात्रियों और अन्य लोगों ने तुरंत हरकत में आकर उसे काबू कर लिया. इन नई जानकारियों से सवाल उठने लगे हैं कि फ्लाईदुबई संभावित कर्मचारियों की कितनी बारीकी से जांच-पड़ताल करती है, और इजरायली यात्रियों से भरे विमान में को-पायलट की मौजूदगी इजरायल के कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल से कैसे बच गई.
इजरायल सरकार का कहना है कि विदेशी एयरलाइंस के साथ उसके ऐसे समझौते हैं, जिनके तहत जिन देशों के साथ उसके राजनयिक संबंध नहीं हैं, वहां के पायलट इजरायल के लिए उड़ान नहीं भर सकते. इजरायल और ओमान के बीच कोई औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं. UAE सरकार ने चरमपंथी गतिविधियों के खिलाफ प्रभावी कदम उठाने के लिए पहचान बनाई है, लेकिन सुरक्षा में चूक की आलोचना होने पर वह पहले भी नाराजगी जता चुकी है.
आमतौर पर एयरलाइंस के लिए कॉकपिट में क्रैश एक्स (कुल्हाड़ी) रखना जरूरी होता है, जिसका इस्तेमाल इमरजेंसी में खिड़की तोड़कर बाहर निकलने या आग तक पहुंचने के लिए पैनल तोड़ने में किया जा सकता है. कुल्हाड़ी के हमले में बुरी तरह घायल हुए कैप्टन ने बताया कि हमले के दौरान उन्होंने अपनी बची हुई ताकत का इस्तेमाल करके कॉकपिट का दरवाजा खोला, जिससे अजीब आवाजे सुनने वाले लोग अंदर आ सके, को-पायलट को काबू कर सके और यात्रियों के चिल्लाने के बीच उड़ान को संभाल सके. हालांकि, सोशल मीडिया पर अब कई कट्टरपंथी इस पूरी घटना को स्क्रिप्टेड भी बता रहे हैं.
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