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This Article is From Nov 16, 2022

एकलौते बच्चे की परवरिश में भूलकर भी नहीं करनी चाहिए ये 5 गलतियां, बच्चे पर पड़ता है बुरा असर 

Parenting Mistakes: कई बार लाड़-प्यार में तो कभी सख्त बनने के चलते माता-पिता एकलौते बच्चे की परवरिश में कुछ गलतियां कर देते हैं. इन मिस्टेक्स को वक्त रहते सुधारने में ही समझदारी है. 

एकलौते बच्चे की परवरिश में भूलकर भी नहीं करनी चाहिए ये 5 गलतियां, बच्चे पर पड़ता है बुरा असर 
Raising An Only Child: एकलौते बच्चे की परवरिश में नहीं करनी चाहिए ये गलतियां.

Parenting Tips: बच्चे की परवरिश किसी सीधी रेखा की तरह नहीं होती जिसपर हर माता-पिता को चलना ही है. सबका अपना अलग तरीका हो सकता है जिसमें कुछ गलत नहीं है. लेकिन, कई बार पैरेंट्स (Parents) जाने या अनजाने में ऐसी कई गलतियां कर देते हैं जो बच्चे को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकती हैं. एकलौता बच्चा (Only Child) अगर माता-पिता के लाड़ का अकेला हिस्सेदार होता है तो उनकी डांट भी उसी को सबसे ज्यादा मिलती है. वहीं, पैरेंट्स परवरिश के एक्सपर्ट्स ही हों ऐसा जरूरी नहीं है. बच्चे को सही राह पर ले जाने की प्रक्रिया में वे परवरिश की गलत राह पकड़ लेते हैं. यहां ऐसी ही कुछ गलतियों (Parenting Mistakes) का जिक्र है जो एकलौते बच्चे के माता-पिता अक्सर करते हैं. 

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एकलौते बच्चे की परवरिश की गलतियां | Parenting Mistakes While Raising An Only Child 

हार से दूर रखना

छोटे बच्चों को हारना अच्छा नहीं लगता और हार जाने पर वे पैर पीटना, रोना-चिल्लाना या फिर मुंह फुलाने जैसी हरकतें करने लगते हैं. साथ में भाई-बहन हों तो बच्चे हार का मुंह हर दूसरे पल देख लेते हैं लेकिन माता-पिता बच्चे को दुख ना पंहुचाने के लिए उससे हारने का नाटक करते रहते हैं. ऐसा करने पर बच्चा यह कभी नहीं समझ पाएगा कि हारना भी आगे बढ़ने और जीत तक पहुंचने का जरूरी हिस्सा है. 

हर जिद पूरी करना 

बच्चे की हर जिद पूरी करना उसे जिद्दी बना देता है, इसमें कोई दोराय नहीं है. यही जिद आगे चलकर उसके लिए मुसीबत भी बन सकती है. आप उसकी हर जिद पूरी करके उसकी आदतें इतनी बिगाड़ देते हैं कि बच्चा (Child) बाकि लोगों से भी यही अपेक्षा रखने रखता है. ऐसे में कभी उसके हाथ तिरस्कार लगता है तो कभी दूसरों से धुत्कार. 

अपनी आकांक्षाओं का बोझ 


बच्चा एक है तो जाहिर सी बात है कि माता-पिता उसके लिए हर चीज परफेक्ट करना चाहते हैं और उसे जीवन में आगे बढ़ते हुए देखना चाहते हैं. ऐसे में कई बार बच्चा अपने सपनों को पूरा नहीं कर पाता और अंदर ही अंदर घुटने लगता है. बच्चे का बचपन और अपने खुद के शौक आकांक्षाओं के बोझ तले दबने लगते हैं. 

हमेशा कंफर्ट देना 


कहते हैं बच्चा जबतक लड़खड़ाता या गिरता नहीं है तबतक चलना नहीं सीखता. एकलौते बच्चे के माता-पिता उसे लेकर आमतौर पर जरूरत से ज्यादा संवेदनशील होते हैं जिससे बच्चे की अपनी पर्सनल ग्रोथ (Growth) रुकने लगती है और हर समय कंफर्ट या कहें आराम में रहने के कारण वह अपने कंफर्ट जोन से नहीं निकल पाता. 

बाउंडरीज ना बनाना 


बच्चे की खुशी के लिए उसकी हर बात मानते रहने पर माता-पिता और बच्चे के बीच की बाउंडरी हटने लगती है. बच्चे का दोस्त बनकर रहना अच्छा है लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल भी नहीं है कि वह जब कहे तब आप उसे सोने दें और वह ना उठना चाहे तो उसे स्कूल ना भेजें. इस तरह की चीजें ना हों और कुछ बेसिक रूल्स घर में बने रहें तो बच्चा नियमों का पालन करना भी सीख जाता है. 

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