Greenland Fact: ग्रीनलैंड की अहमियत उसकी रणनीतिक लोकेशन, दुर्लभ खनिजों, मछली पालन, और पिघलती आर्कटिक बर्फ की वजह से तेजी से बढ़ी है. यही कारण है कि अमेरिका, चीन और रूस जैसी ताकतें यहां दिलचस्पी ले रही हैं. दिखने में बर्फीला और दूरस्थ ग्रीनलैंड आज वैश्विक राजनीति और भविष्य की अर्थव्यवस्था का अहम केंद्र बन चुका है.
दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप ग्रीनलैंड (Greenland) बाहर से देखने में भले ही बर्फ और सन्नाटे से भरा लगे, लेकिन हकीकत में यह आज की ग्लोबल पॉलिटिक्स, सिक्योरिटी और फ्यूचर इकोनॉमी का सबसे अहम मोहरा बन चुका है. कम आबादी, कठोर मौसम और जमी हुई बर्फ के बावजूद आज अमेरिका, चीन और रूस जैसी ताकतें ग्रीनलैंड पर खास नजर बनाए हुए हैं. सवाल है कि आखिरी ग्रीनलैंड में रहता कौन है और ये जगह दुनिया के लिए इतनी जरूरी क्यों बन गई है. आइए जानते हैं जवाब..
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ग्रीनलैंड कहां है और यहां कितने लोग रहते हैं
ग्रीनलैंड आर्कटिक महासागर और नॉर्थ अटलांटिक महासागर के बीच है. यह कनाडा के उत्तर-पूर्व में पड़ता है. भौगोलिक रूप से यह नॉर्थ अमेरिका का हिस्सा है, लेकिन राजनीतिक तौर पर यह डेनमार्क (Denmark) के अधीन एक स्वायत्त क्षेत्र (Autonomous Territory) है. मतलब यह अपने आंतरिक फैसले खुद लेता है, लेकिन डिफेंस और फॉरेन पॉलिसी डेनमार्क संभालता है. ग्रीनलैंड की कुल आबादी सिर्फ 56-57 हजार के आसपास है. यह पूरी दुनिया के सबसे कम जनसंख्या घनत्व वाले इलाकों में से एक है. यहां ज्यादातर लोग तटीय इलाकों (Coastal Areas) में रहते हैं, क्योंकि द्वीप का अंदरूनी हिस्सा लगभग पूरी तरह बर्फ से ढका है.
ग्रीनलैंड में कौन लोग रहते हैं
ग्रीनलैंड की करीब 89% आबादी इनुइट समुदाय से आती है. ये लोग हजारों सालों से आर्कटिक इलाके में रह रहे हैं. मुख्य इनुइट समूह में कलालित (Kalaallit) पश्चिमी ग्रीनलैंड, टुनुमीट (Tunumiit) पूर्वी ग्रीनलैंड और इनुगुइट (Inughuit) उत्तरी ग्रीनलैंड में रहते हैं. आज भी ये समुदाय अपनी भाषा, परंपराएं, शिकार और मछली पकड़ने की संस्कृति को मॉर्डन लाइफ के साथ जोड़कर जी रहे हैं.ग्रीनलैंड में कुछ लोग डेनमार्क और अन्य देशों से भी हैं. इनमें से ज्यादातर सरकारी प्रशासन, एजुकेशन और हेल्थ सेक्टर, वैज्ञानिक रिसर्च और टूरिज्म से जुड़े हैं.ग्रीनलैंडिक (Kalaallisut) यहां की ऑफिशियल लैंग्वेज है. प्रशासन और पढ़ाई में डेनिश का इस्तेमाल सबसे ज्यादा होता है. टूजिज्म और रिसर्च में इंग्लिश तेजी से पॉपुलर हो रही है.
ग्रीनलैंड इतना कीमती क्यों है
1. ग्रीनलैंड अमेरिका और यूरोप के बीच है. यही वजह है कि यह मिलिट्री और निगरानी के लिहाज से बेहद अहम है. यहां मौजूद थुले एयर बेस (Thule Air Base) अमेरिका की मिसाइल डिफेंस और आर्कटिक मॉनिटरिंग में बड़ी भूमिका निभाता है. NATO के लिए भी यह इलाका बेहद जरूरी है.
2. ग्रीनलैंड के नीचे भविष्य का बेशकीमती खजाना रेयर अर्थ मिनरल्स (Rare Earth Minerals) छिपा है, जो मोबाइल, EV, मिसाइल सिस्टम में जरूरी है. इसके अलावा यूरेनियम, आयरन ओर, जिंक और गोल्ड, तेल और प्राकृतिक गैस का भंडार है. यही वजह है कि चीन और पश्चिमी देश यहां दिलचस्पी दिखा रहे हैं.
3. जलवायु परिवर्तन ने ग्रीनलैंड की बर्फ को तेजी से पिघलाया है. इससे नए शिपिंग रूट्स खुल रहे हैं, माइनिंग आसान हो रही है, रिसर्च और एक्सप्लोरेशन बढ़ा है.
4. ग्रीनलैंड की ठंडी समुद्री जलधाराएं मछलियों से भरपूर हैं यहां श्रिम्प, हैलिबट मछली सबसे बड़े एक्सपोर्ट प्रोडक्ट हैं. फिशिंग आज भी यहां की इकोनॉमी की जान है.
5. ग्रीनलैंड की अपनी संसद और सरकार है. डेनमार्क सिर्फ रक्षा, विदेश नीति देखता है. यहां पूर्ण स्वतंत्रता (Independence) को लेकर बहस चलती रहती है.
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