Twin Town in India: क्या आपने कभी कोई ऐसी जगह देखी है जहां आप जाएं और आपको करीब-करीब हर दूसरा इंसान किसी न किसी का हमशक्ल लगे. नहीं ना... फिल्मों में तो आपने 'जुड़वा' और 'सीता-गीता' बहुत देखी होगी, लेकिन भारत में एक ऐसा गांव है, जो किसी चमत्कार से कम नहीं है. इस गांव में एक-दो नहीं, बल्कि 550 से भी ज्यादा जुड़वा (Twins) लोग रहते हैं. यही कारण है कि इस गांव को 'ट्विन टाउन' नाम से जाना जाता है. आइए जानते हैं ये अनोखा गांव कहां है और यहां की दिलचस्प कहानी क्या है.
जुड़वा बच्चों वाला गांव कहां है
ये अनोखा गांव केरल के मलप्पुरम जिले में बसा कोडिन्ही (Kodinhi) है. यह गांव अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के साथ-साथ जुड़वा बच्चों की वजह से पूरी दुनिया में मशहूर है. जैसे ही आप इस गांव के अंदर कदम रखेंगे, गांव के प्रवेश द्वार पर ही बड़ा सा बोर्ड लगा दिख जाएगा. जिस पर लिखा है- 'Welcome to God's Own Twin Village- Kodinhi' यानी भगवान के जुड़वा गांव में आपका स्वागत है. दुनियाभर से लोग इस गांव को देखने आते हैं. यहां की गलियों में, खेलते हुए, स्कूल जाते हुए हर जगह आपको जुड़वा भाई-बहन नजर आ ही जाएंगे.
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हर हजार बच्चों में 45 जुड़वा जन्म लेते हैं
आमतौर पर दुनिया में हर 1,000 जन्म पर करीब 9 जुड़वा बच्चे पैदा होते हैं, लेकिन कोडिन्ही में यह संख्या करीब 45 बताई जाती है. यानी यहां जुड़वा बच्चों के जन्म की संभावना सामान्य जगहों की तुलना में कई गुना ज्यादा है. गांव में करीब 2000 परिवार रहते हैं. यहां जुड़वा बच्चों की संख्या साल 2008 में 280 थी, जो अब बढ़कर 550 से ज्यादा हो गई है.
गांव का राज कैसे खुला
सबसे मजेदार बात तो ये है कि खुद गांव वालों को भी लंबे समय तक पता ही नहीं था कि उनके यहां कुछ अलग हो रहा है. ये तो गांव की ही दो जुड़वा बहनों समीरा और फेमिना की वजह से दुनिया के सामने आया. दोनों बहनों ने एक दिन अपनी क्लास में ध्यान दिया कि उनकी तरह ही क्लास में 8 और जुड़वा बच्चे हैं. फिर उन्होंने स्कूल का एक प्रोजेक्ट इसी टॉपिक पर बनाया. जब गिनती हुई, तो पता चला कि अकेले उनके स्कूल में ही 24 जुड़वा जोड़े (48 बच्चे) पढ़ाई कर रहे हैं. इसी खोज के बाद गांव वालों का ध्यान इस बात पर गया और धीरे-धीरे ये खबर पूरी दुनिया में फैल गई.
बड़े-बड़े साइंटिस्ट भी हो गए फेल
जब इस बात की भनक दुनिया को लगी, तो साल 2016 में लंदन, जर्मनी और भारत की एक बड़ी साइंटिस्ट्स की टीम यहां रिसर्च करने पहुंच गई. टीम ने गांव वालों के बालों, थूक (Saliva) और डीएनए (DNA) के सैंपल लिए. खूब रिसर्च हुई, लेकिन रिजल्ट जीरो ही रहा. बड़े-बड़े साइंटिस्ट भी आज तक ये नहीं समझ पाए कि आखिर इस गांव में ही इतने जुड़वा बच्चे क्यों पैदा हो रहे हैं. कई सालों से इस पर रिसर्च कर रहे केरल के डॉ. कृष्णन श्रीबीजू बताते हैं कि यह सिलसिला करीब तीन पीढ़ियों यानी 60 से 70 साल पहले शुरू हुआ था. मजे की बात ये है कि इसका गांव वालों के खान-पान या लाइफस्टाइल से कोई लेना-देना नहीं है.
जुड़वा बच्चों के लिए बना खास ग्रुप (TAKA)
जुड़वा बच्चों को पालने में मां-बाप को किसी तरह की समस्या न हो, इसी को सुलझाने के लिए गांव वालों ने मिलकर 'ट्विन्स एंड किन एसोसिएशन' (TAKA) नाम का एक ग्रुप बनाया है. यह ग्रुप जुड़वा बच्चों वाले परिवारों की मदद करता है, उन्हें सही जानकारी देता है और आर्थिक रूप से भी सपोर्ट करता है.
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