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शराब के मुकाबले गांजे का नशा कितनी देर में उतरता है? दिमाग पर होता है ये असर

एयर इंडिया फ्लाइट के हवा में 300 फीट गिरने के मामले में पायलट का गांजे का टेस्ट पॉजिटिव आया है. शराब के मुकाबले गांजे का नशा कितनी देर रहता है. जानें THC और अल्कोहल दिमाग पर कैसे असर डालते हैं, नशे के असर और शरीर में इनके बने रहने में क्या फर्क है.

शराब के मुकाबले गांजे का नशा कितनी देर में उतरता है? दिमाग पर होता है ये असर
गांजा पीने के बाद कितनी देर तक रहता है इसका असर

Ganja vs Alcohol Reaction Time: 4 अगस्त को फुकेट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया (Air India) की फ्लाइट में अचानक भयानक झटके लगे और विमान हवा में ही 300 फीट नीचे गोता खा गया. इस खौफनाक घटना के बाद जब जांच हुई, तो एक बेहद चौंकाने वाला सच सामने आया. फ्लाइट उड़ा रहे पायलट के खून में गांजा (Marijuana) पाया गया है. हवा में सैकड़ों लोगों की जान दांव पर थी और पायलट गांजे के नशे में था. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि गांजे का नशा शराब से कैसे अलग है, यह शरीर में कितनी देर तक रहता है और कितनी देर में उतरता है, इसका दिमाग पर क्या असर होता है. आइए जानते हैं हर सवाल का जवाब.

गांजे का नशा कितनी देर रहता है

इसका कोई एक तय जवाब नहीं है. असर इस बात पर निर्भर करता है कि गांजा किस तरीके से लिया गया, उसमें THC (Tetrahydrocannabinol) कितना था, कितनी मात्रा ली गई और व्यक्ति का शरीर उस पर कैसे रिएक्ट करता है. NIDA (National Institute on Drug Abuse) के मुताबिक, गांजा धुएं के जरिए लिया जाए तो उसका असर तुरंत शुरू हो सकता है और आमतौर पर महसूस होने वाला असर करीब 1 से 3 घंटे रह सकता है. लेकिन खाने या पीने वाले गांजे या भांग के प्रोडक्ट्स (Cannabis Products) का असर देर से शुरू होता है और कई घंटों तक चल सकता है. 

क्या हफ्तों तक भी नशा रह सकता है?

गांजे में पाया जाने वाला THC एक केमिकल होता है. गांजा पीने वाले को भले ही लगे कि कुछ घंटों में उसका नशा उतर गया है, लेकिन ऐसा होता नहीं है. ये केमिकल इंसान के खून, बालों और शरीर के फैट में गहराई तक जमा हो जाता है. इसका असर शरीर में कई दिनों से लेकर हफ्तों तक बना रहता है. यही वजह है कि फ्लाइट के बाद हुए टेस्ट में पायलट के खून में गांजा साफतौर पर पकड़ में आ गया. लेकिन ये भी सच है कि इसी वजह से किसी व्यक्ति के टेस्ट में गांजे का पता चलना जरूरी नहीं कि उसने उसी दिन या कुछ घंटे पहले ही इसका सेवन किया हो.

शराब का नशा कितनी देर में उतरता है?

शराब के मामले में भी कोई ऐसा फिक्स्ड टाइम नहीं है, जो हर व्यक्ति पर लागू हो. कितना और कितनी तेजी से पिया गया, शरीर का साइज, मेटाबॉलिज्म और कई दूसरे फैक्टर्स असर डालते हैं. NIAAA (National Institute on Alcohol Abuse and Alcoholism) के अनुसार, शरीर शराब को एक स्टेबल रेट (Steady Rate) पर प्रोसेस करता है, लेकिन ये रेट हर किसी में अलग-अलग हो सकता है. शराब बंद करने के बाद भी उसका असर कुछ समय तक जारी रह सकता है और BAC (Blood Alcohol Concentration) कुछ समय के लिए बढ़ भी सकता है. इसलिए कॉफी पीना, ठंडे पानी से नहाना या थोड़ा सो लेना शराब को तुरंत शरीर से बाहर नहीं निकालता है. शराब को प्रोसेस करने का काम शरीर को ही करना पड़ता है.

शराब या गांजा, किसका नशा जल्दी उतरता है

इसकी कोई टाइम लिमिट नहीं है.कम मात्रा में फूंका गया गांजा कई लोगों में कुछ घंटों में कम हो सकता है, जबकि खाने वाले गांजे का असर ज्यादा देर चल सकता है. दूसरी तरफ शराब का असर भी कितनी मात्रा में पी गई है और शरीर उसे कितनी तेजी से प्रोसेस करता है, इस पर निर्भर करता है. इसलिए यह कहना कि किसका नशा जल्दी और किसका देर से उतरता है, वैज्ञानिक तौर पर सही नहीं है. सबसे जरूरी बात कि नशे का महसूस होना बंद हो जाना यह साबित नहीं करता कि रिएक्शन टाइम, अटेंशन या डिसिजन मेकिंग पूरी तरह नॉर्मल हो चुके हैं. गांजे के मामले में शरीर की क्षमता में कमी का साफ असर खत्म होने के बाद भी रह सकता है. हेल्थ कनाडा (Health Canada) के अनुसार, कुछ लोगों में गांजे के सेवन से होने वाले असर (Cannabis Related Impairment) 24 घंटे से ज्यादा भी रह सकता है.

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