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ऑरेंज से लेकर ब्लू और व्हाइट तक, अलग-अलग रंग पर क्यों रखे जाते हैं इकोनॉमी के नाम

Orange Economy: इस बार के बजट में कई तरह के ऐलान हुए, इस दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऑरेंज इकोनॉमी का भी जिक्र किया. इससे पहले भी अलग-अलग रंगों के नाम से इकोनॉमी को दर्शाया गया है.

ऑरेंज से लेकर ब्लू और व्हाइट तक, अलग-अलग रंग पर क्यों रखे जाते हैं इकोनॉमी के नाम
अर्थव्यवस्था के अलग-अलग रंग

Orange Economy: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करते हुए कई चीजों का जिक्र किया, जिसमें ऑरेंज इकोनॉमी भी शामिल था. वित्त मंत्री ने बताया कि भारत ऑरेंज इकोनॉमी की तरफ तेजी से बढ़ रहा है और इसके लिए अलग से कई तरह के ऐलान भी किए गए. इस नाम को लेकर कई लोग कंफ्यूज हो गए कि आखिर रंग के नाम पर कौन सी अर्थव्यवस्था की बात हो रही है. आज हम आपको ऑरेंज के अलावा ब्लू, ग्रीन और व्हाइट इकोनॉमी के बारे में भी बताएंगे. साथ ही ये भी बताएंगे कि आखिर क्यों इन्हें रंगों के नाम से जाना जाता है. 

क्या होती है ऑरेंज इकोनॉमी?

ऑरेंज इकोनॉमी को आप क्रिएटिव या फिर माइंड फार्मिंग भी कह सकते हैं. इसमें वो तमाम चीजें आती हैं, जिनमें किसी चीज का इस्तेमाल करके नहीं, बल्कि अपने विचारों, आर्ट और दिमाग का इस्तेमाल कर कमाई की जाती है. आसान भाषा में कहें तो किसी की इमेजिनेशन या आइडिया से जब इनकम होने लगती है तो ये ऑरेंज इकोनॉमी का हिस्सा बन जाते हैं. इसमें कंटेंट क्रिएटर्स से लेकर म्यूजिक और गेमिंग, फैशन जैसी चीजें शामिल होती हैं. यही वजह है कि सरकार ने ऐलान किया है कि 1500 सीनियर सेकेंडरी स्कूलों और 500 कॉलेजों में कंटेट क्रिएटर लैब खोली जाएंगीं. 

ग्रीन इकोनॉमी

पर्यावरण के क्षेत्र में होने वाले विकास कार्यों को ग्रीन इकोनॉमी में गिना जाता है. कार्बन उत्सर्जन, रिन्यूवेबल एनर्जी और रिसोर्स एफिशिएंसी में आर्थिक समृद्धि के लिए ग्रीन इकोनॉमी के तहत बजट आवंटित किया जाता है. 

ब्लू इकोनॉमी

ब्लू इकोनॉमी शब्द का इस्तेमाल समुद्र और महासागरों से जुड़े विकास कार्यों के लिए होता है. इसमें समुद्री संसाधनों का इस्तेमाल कर इकोनॉमी को बूस्ट करना और बिना पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाना शामिल है. इसमें खनिज, विंड एनर्जी, समुद्री पर्यटन, मछली उत्पादन, तेल और गैस जैसी चीजें शामिल होती हैं. 

व्हाइट, और सिल्वर इकोनॉमी

ग्रीन और ब्लू की तरह व्हाइट इकोनॉमी का जिक्र भी आपने कई बार सुना होगा. हेल्थ और सोशल केयर क्षेत्र से जुड़े कामकाज और नौकरियों को व्हाइट इकोनॉमी में शामिल किया जाता है. वहीं सिल्वर इकोनॉमी बुजुर्गों से संबंधित क्षेत्रों को दर्शाती है. बुजुर्गों की जरूरतों को पूरा करने और उनकी देखभाल को लेकर होने वाले काम इसके तहत आते हैं. हर रंग उसके क्षेत्र को दर्शाता है, जैसे- सिल्वर या ग्रे कलर बुजुर्गों को, ग्रीन पर्यावरण को, ब्लू समुद्र को और ऑरेंज क्रिएटिव फील्ड को दर्शाता है. 

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