- आदिवासी कार्यकर्ता की मौत पर झारखंड में राजनीतिक बहस
- निशा कुमारी भगत ने मौत से पहले किस पर लगाए थे आरोप? CBI जांच की मांग तेज
- 11 मिनट के लाइव वीडियो ने खड़े किए बड़े सवाल, निशा भगत केस में जांच की मांग
झारखंड की आदिवासी कार्यकर्ता निशा कुमारी भगत की कथित आत्महत्या के बाद राज्य में राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है. निशा ने शुक्रवार को फेसबुक लाइव के दौरान जमीन माफिया, सरकारी अधिकारियों और पुलिस की कथित निष्क्रियता पर गंभीर आरोप लगाए थे. इसके कुछ समय बाद वह अपने रांची स्थित आवास पर मृत पाई गईं. पुलिस ने अप्राकृतिक मौत (यूडी) का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. वहीं विश्व हिंदू परिषद और बीजेपी सहित विभिन्न संगठनों व नेताओं ने मामले की स्वतंत्र जांच तथा CBI जांच की मांग उठाई है.
अंतिम संस्कार आज पैतृक गांव में, फेसबुक लाइव में लगाए थे गंभीर आरोप
निशा कुमारी का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव गुमला में किया जाएगा.

Photo : NDTV ( निशा कुमारी के वीडियो का स्क्रीनशॉट)
निशा ने अपनी मौत से पहले करीब 11 मिनट तक फेसबुक लाइव किया था. इस दौरान उन्होंने अपने माता-पिता से माफी मांगी और आरोप लगाया कि जमीन माफिया, कुछ सरकारी अधिकारी और पुलिस की अनदेखी ने उन्हें गहरे मानसिक तनाव में पहुंचा दिया. लाइव के दौरान उन्होंने कहा कि सरकार और स्थानीय भूमि दलालों का विरोध करना 'मौत को दावत देने' जैसा हो गया है. बताया गया कि उन्होंने पिठौरिया थाना प्रभारी को फोन कर आत्मघाती कदम उठाने की बात भी कही थी. बाद में उनका शव घर में फंदे से लटका मिला.
पुलिस ने शुरू की जांच
रांची ग्रामीण के एसपी गौरव गोस्वामी ने बताया कि दोपहर लगभग 12:15 बजे फेसबुक लाइव के माध्यम से आत्महत्या के प्रयास की सूचना मिली थी. सूचना मिलने के बाद पिठौरिया थाना पुलिस मौके पर पहुंची और उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया.
एसपी ने यह भी कहा कि पिठौरिया थाना प्रभारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों सहित सभी बिंदुओं की जांच की जा रही है और जांच पूरी होने के बाद तथ्य सार्वजनिक किए जाएंगे.
VHP और छात्र नेता ने उठाई CBI जांच की मांग
विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने निशा की मौत की CBI जांच की मांग करते हुए आरोप लगाया कि वामपंथी समूहों, धर्मांतरण गिरोहों और भूमि माफिया के गठजोड़ ने उन्हें प्रताड़ित किया. छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि निशा लगातार विभिन्न संस्थाओं और अधिकारियों से मदद मांग रही थीं, लेकिन उन्हें पर्याप्त सहयोग नहीं मिला. उन्होंने कहा कि यह जांच होनी चाहिए कि उनकी शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई और किन लोगों ने उनकी मदद नहीं की.
भाजपा ने सरकार को घेरा
झारखंड भाजपा अध्यक्ष आदित्य साहू ने कहा कि निशा जमीन दलालों, भूख और धर्मांतरण जैसे मुद्दों के खिलाफ आवाज उठाती थीं. उन्होंने सवाल किया कि जब हजारों लोग उनका फेसबुक लाइव देख रहे थे, तब प्रशासन और पुलिस समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं कर सके. उन्होंने कहा कि यदि पुलिस समय पर पहुंचती तो शायद उनकी जान बचाई जा सकती थी. भाजपा ने भी पूरे मामले की CBI जांच की मांग की है.
केंद्रीय मंत्री ने SHO की गिरफ्तारी की मांग की
केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने इस घटना को झारखंड में कानून-व्यवस्था की विफलता बताया. उन्होंने कहा कि निशा ने अपने वीडियो में जिन लोगों और अधिकारियों का नाम लिया, उनकी भूमिका की जांच होनी चाहिए. उन्होंने पिठौरिया थाना प्रभारी की तत्काल गिरफ्तारी और CBI जांच की मांग करते हुए कहा कि फेसबुक लाइव के दौरान प्रशासन को तुरंत सक्रिय होकर हस्तक्षेप करना चाहिए था. उनके अनुसार, यह घटना राज्य की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती है.
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