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पिता का साया छिना, मां ने खेती-बारी कर पाला, अब संघर्षों की भट्ठी में तपकर 'सोना' बने झारखंड के अंजित मुंडा

Khelo India Tribal Games: खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में झारखंड के युवा पहलवान अंजित मुंडा ने कुश्ती में गोल्ड मेडल जीता. अंजित भारतीय सेना में अग्निवीर हैं. आइए जानते हैं इनके संघर्ष की कहानी.

पिता का साया छिना, मां ने खेती-बारी कर पाला, अब संघर्षों की भट्ठी में तपकर 'सोना' बने झारखंड के अंजित मुंडा
पिता का साया छिना, मां ने खेती-बारी कर पाला, अब संघर्षों की भट्ठी में तपकर 'सोना' बने झारखंड के अंजित मुंडा

Khelo India Tribal Games 2026: कहते हैं कि हालात चाहे जितने मुश्किल क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों तो रास्ते खुद‑ब‑खुद बन जाते हैं. झारखंड के रामगढ़ जिले के छोटे से गांव सुगिया से निकलकर युवा पहलवान अंजित कुमार मुंडा ने इसी जज़्बे के साथ सफलता की नई कहानी लिखी है. अम्बिकापुर के गांधी स्टेडियम में आयोजित ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स' में अंजित ने 67 किलोग्राम भार वर्ग की कुश्ती स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर न सिर्फ झारखंड बल्कि देशभर के जनजातीय युवाओं को प्रेरित किया है. यह उपलब्धि उनके लंबे संघर्ष और अथक मेहनत का परिणाम है.

Khelo India Tribal Games 2026: खेलो इंडिया में झारखंड के अंजित मुंडा का गोल्ड

Khelo India Tribal Games 2026: खेलो इंडिया में झारखंड के अंजित मुंडा का गोल्ड

छोटे गांव से राष्ट्रीय पहचान तक का सफर

महज 20 वर्ष की उम्र में देशस्तर पर अपनी पहचान बना चुके अंजित का जीवन संघर्षों से भरा रहा है. वर्ष 2009 में पिता का साया सिर से उठने के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनकी मां के कंधों पर आ गई. सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बीच अंजित की मां ने खेती‑बारी और मेहनत के दम पर परिवार को संभाला. इन्हीं हालातों ने अंजित के भीतर संघर्ष करने की ताकत पैदा की.

छह साल की कठिन ट्रेनिंग बनी सफलता की नींव

अंजित ने वर्ष 2017‑18 में कुश्ती की शुरुआत की और जेएसएसपीएस स्पोर्ट्स अकादमी में दाखिला लिया. यहां उन्होंने लगभग छह वर्षों तक नियमित और कड़ा अभ्यास किया. प्रशिक्षकों ने उनकी शारीरिक क्षमता, फिटनेस और तकनीकी समझ को देखते हुए उन्हें कुश्ती के लिए विशेष रूप से तैयार किया. लगातार अभ्यास और अनुशासन ने धीरे‑धीरे उन्हें प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन के काबिल बना दिया.

भारतीय सेना में ‘अग्निवीर', देश सेवा का भी सपना पूरा

खेल प्रतिभा के साथ‑साथ अंजित में देश सेवा का जज़्बा भी शुरू से रहा है. इसी का नतीजा है कि पिछले वर्ष उनका चयन भारतीय सेना में ‘अग्निवीर जीडी' के पद पर हुआ. अंजित मानते हैं कि सेना की ट्रेनिंग ने उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से और मजबूत बनाया. अपनी सफलता का श्रेय वे अपने कोच, परिवार और अकादमी को देते हैं, जिन्होंने हर कठिन दौर में उनका साथ दिया.

जनजातीय प्रतिभाओं के लिए प्रेरक मंच बना खेलो इंडिया

स्वर्ण पदक जीतने के बाद अंजित मुंडा ने कहा कि ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स' जैसे आयोजन जनजातीय बच्चों के लिए बड़ा अवसर हैं, जो अक्सर संसाधनों की कमी के कारण मुख्यधारा से पीछे रह जाते हैं. पहली बार आयोजित इस प्रतियोगिता में गोल्ड जीतना उनके लिए गर्व की बात है. उनका अगला लक्ष्य छत्तीसगढ़ में होने वाली आगामी प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन करना है.

उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ता कदम

पहले कांस्य पदक के चलते छात्रवृत्ति से वंचित रहे अंजित को अब स्वर्ण पदक के बाद केंद्र सरकार से सहयोग और स्कॉलरशिप मिलने की उम्मीद है. वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करना चाहते हैं. अम्बिकापुर में चल रहे खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में उनकी यह उपलब्धि झारखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के जनजातीय युवाओं के लिए प्रेरणा बनकर सामने आई है.

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