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आराश-ए-कमानगीर: ईरान का वो नया हथियार, जिसने अमेरिका के 300 करोड़ के ड्रोन को तबाह कर दिया; खासियत क्या है?

आराश-ए-कमानगीर पारंपरिक एयर डिफेंस से सस्ता, आवाजाही में आसान और तुरंत खतरों से निपटने वाला बताया जा रहा है. इसने अमेरिकी ड्रोन को नेस्ताबूद कर दिया है, ऐसा ईरान दावा कर रहा है.

आराश-ए-कमानगीर: ईरान का वो नया हथियार, जिसने अमेरिका के 300 करोड़ के ड्रोन को तबाह कर दिया; खासियत क्या है?
फारसी पौराणिक कथाओं में 'आराश-ए-कमानगीर' का मतलब 'तीरंदाज' होता है.
AFP

मिडिल ईस्ट में जारी भारी तनाव के बीच ईरान का दावा है कि उसने अपनी सीमा के पास उड़ान भर रहे अमेरिका के बेहद आधुनिक और करीब 30 मिलियन डॉलर (लगभग 250 करोड़ रुपये) की कीमत वाले 'MQ-9 रीपर ड्रोन' को आसमान में ही ध्वस्त कर दिया है. ईरान के मुताबिक, इस बेहद महंगे अमेरिकी ड्रोन को किसी आम मिसाइल से नहीं, बल्कि उसके एक बिल्कुल नए और सीक्रेट एयर डिफेंस सिस्टम से मार गिराया गया है.

पिछले कुछ महीनों में ईरान के सैन्य ठिकानों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार हमले हुए हैं, जिससे माना जा रहा था कि उसकी ताकत कम हुई है. लेकिन सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास अमेरिकी ड्रोन को गिराकर ईरान ने यह साबित करने की कोशिश की है कि अमेरिकी और इजरायली सैन्य अभियानों को चुनौती देने की उसकी क्षमता अभी खत्म नहीं हुई है.

क्या है 'आराश-ए-कमानगीर'?

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी 'फ़ार्स' के अनुसार, इस अमेरिकी ड्रोन को केश्म द्वीप के पास इंटरसेप्ट किया गया. इस बड़े ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए ईरान ने अपने जिस घरेलू एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया, उसका नाम 'आराश-ए-कमानगीर' रखा गया है. यह इस नए हथियार का इस्तेमाल पहली बार युद्ध में किया गया था. हालांकि, ईरान के इस दावे की पुष्टि नहीं हो सकी है.

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दिलचस्प बात इस नए हथियार का नाम है. फारसी पौराणिक कथाओं में 'आराश-ए-कमानगीर' का मतलब 'आराश तीरंदाज' होता है. लोककथाओं के अनुसार, आराश एक महान नायक था जिसने विदेशी आक्रमणकारियों से ईरान की रक्षा करने के लिए अपनी जान दांव पर लगाकर एक ऐसा तीर चलाया था, जिसने ईरान और मध्य एशिया की सीमा तय की थी. अब ईरान ने अपने इसी 'तीरंदाज' के नाम पर नया डिफेंस सिस्टम देश की सीमाओं की रक्षा के लिए तैनात किया है.

क्यों खास है यह सिस्टम?

सुरक्षा जानकारों का मानना है कि 'आराश-ए-कमानगीर' ईरान के उन आधुनिक हथियारों का हिस्सा है जो 'लोइटरिंग' (हवा में तैरते रहने वाले)या कम दूरी के मिसाइल प्लेटफॉर्म पर काम करते हैं. सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ एलेक्स अल्मेडा के अनुसार, इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह दुश्मन को पकड़ने के लिए पारंपरिक रडार गाइडेंस पर निर्भर नहीं रहता. यही वजह है कि अमेरिकी ड्रोन को इसकी मौजूदगी का पता नहीं चल पाया है.

पारंपरिक एयर डिफेंस सिस्टम के मुकाबले ये नए सिस्टम ज्यादा मोबाइल (आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जाने योग्य), बनाने में सस्ते और नष्ट होने पर तुरंत बदले जाने वाले होते हैं. इनमें से कुछ तो हवा में ही तब तक तैरते रहते हैं जब तक कि दुश्मन का विमान या ड्रोन सामने न आ जाए. चूंकि अमेरिका का 'MQ-9 रीपर ड्रोन' आकार में बड़ा और धीमी गति से उड़ने वाला जासूसी ड्रोन है, इसलिए वह इस तरह के सिस्टम के लिए एक बेहद आसान निशाना बन गया.

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चंदन सिंह राजपूत
Senior Sub Editor
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