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नदी किनारे मिले खतरनाक बम को उठा ले गए ग्रामीण, डिफ्यूज करने उतरी सेना; 1.5 किमी का एरिया सील

बम को धमाके के साथ निष्क्रिय करने के दौरान होने वाले नुकसान को शून्य करने के लिए सेना द्वारा वैज्ञानिक पद्धति अपनाई जा रही है. वहीं बम के चारों ओर बालू से भरी बोरियों की ऊंची दीवार खड़ी की जा रही है. 

नदी किनारे मिले खतरनाक बम को उठा ले गए ग्रामीण, डिफ्यूज करने उतरी सेना; 1.5 किमी का एरिया सील
नदी किनारे मिले खतरनाक बम को उठा ले गए ग्रामीण

झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिला के घाटशिला में बहरागोड़ा के नागुरसाई पानी पूरा गांव स्थित स्वर्णरेखा नदी में बालू खुदाई के दौरान मिले शक्तिशाली बम को निष्क्रिय करने की प्रक्रिया अब भारतीय सेना ने संभाल ली है. इसको लेकर मंगलवार को भी बहरागोड़ा थाना प्रभारी शंकर प्रसाद कुशवाहा की अगुवाई में भारतीय सेना के जवान और झारखंड जगुआर की एक टुकड़ी मौके पर पहुंची. भारतीय सेना के अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल धर्मेंद्र सिंह और कैप्टन आयुष कुमार सिंह अपनी टीम के साथ मिलकर बम की गहन जांच कर इसकी लंबाई चौड़ाई आदि का आंकलन किया. बम अत्यधिक शक्तिशाली होने के अंदाजा के अनुसार फैसला लिया गया है कि नदी में तकरीबन 10 फ़ीट गड्ढा जेसीबी के माध्यम से किया जाएगा और मजदूरों को लगाकर सैकड़ों बोरा में बालू का पैकेटिंग का काम शुरू कराया गया है. 

ऊपर लगातार उड़ रहे फाइटर प्लेन

इस दौरान झारखंड से सटे पश्चिम बंगाल के कलाईकुण्डा एयरबेस से वायु सेना के जवान भी हॉक लड़ाकू विमान के साथ क्षेत्र में हवा में लगातार उड़ान भर रहे हैं. सेना के जवान और पुलिस ने नदी के अलावा पास के गांव से एक और बम को ग्रामीणों के पास से बरामद किया है, जिसे ग्रामीण नदी से मिलने के बाद उठाकर गांव ले आए थे. लगभग 227 किलोग्राम वजनी इस विशालकाय बम को सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय (Defusal) करने के लिए भारतीय सेना की विशेषज्ञ टीम ने मोर्चा संभाल लिया है. 

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भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल धर्मेंद्र सिंह और कैप्टन आयुष कुमार सिंह के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय टीम घटना स्थल पर पहुंची. टीम ने बम की स्थिति और आसपास के भूगोल का बारीकी से जायजा लिया. बम की विशालता और उसकी मारक क्षमता को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं. बम को धमाके के साथ निष्क्रिय करने के दौरान होने वाले नुकसान को शून्य करने के लिए सेना द्वारा वैज्ञानिक पद्धति अपनाई जा रही है. वहीं बम के चारों ओर बालू से भरी बोरियों की ऊंची दीवार खड़ी की जा रही है. 

1.5 किमी का एरिया पूरी तरह सील होगा

बालू के अंदर एक विशेष गड्ढा भी तैयार किया गया है, ताकि विस्फोट का दबाव जमीन के अंदर ही अवशोषित हो सके. साथ ही पूरे साइट की सटीक मापी कर सुरक्षा घेरा तैयार किया गया है. ऑपरेशन की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन और सेना ने कड़े कदम उठाए हैं. बम डिफ्यूज करने के दौरान घटनास्थल से डेढ़ किलोमीटर के दायरे को पूरी तरह से सील कर दिया जाएगा. इस दौरान कलईकुंडा एयरफोर्स स्टेशन से विमानों के परिचालन पर भी रोक रहेगी, ताकि आसमान और जमीन दोनों सुरक्षित रहें. नदी किनारे इतना बड़ा बम मिलने से स्थानीय ग्रामीणों में पिछले एक हफ्ते से अधिक समय से भय का माहौल था. सेना की सक्रियता और विशेषज्ञों की मौजूदगी के बाद अब ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है.

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