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झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन के लिए नई मुश्किल, जारी रहेगा मनी लॉन्ड्रिंग का केस

विशेष पीएमएलए कोर्ट से अर्जी खारिज होने के बाद अब हेमंत सोरेन पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस चलता रहेगा.

झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन के लिए नई मुश्किल, जारी रहेगा मनी लॉन्ड्रिंग का केस

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में विशेष पीएमएलए कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. अदालत ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में दाखिल उनकी डिस्चार्ज (मुकदमे से अपना नाम बाहर किए जाने) की अर्जी को खारिज कर दिया है. यह मामला ईडी के 2023 में भूमि घोटाले को लेकर दर्ज से जुड़ा हुआ है. हेमंत सोरेन की ओर से अदालत से मांग की गई थी कि उनके खिलाफ चल रही कार्यवाही को समाप्त किया जाए और उन्हें मामले से मुक्त किया जाए. इस अर्जी पर दोनों पक्षों की ओर से लंबी बहस हुई थी जिसके बाद आज अदालत ने सोरेन की याचिका खारिज कर दी.  अदालत के इस फैसले के बाद अब मामले में उनके खिलाफ आगे की न्यायिक कार्यवाही जारी रहेगी. इस मामले में मौखिक दलीलें 2 मई 2026 को पूरी हो गई थीं, जबकि 8 मई 2026 को दोनों पक्षों ने अपने लिखित तर्क भी अदालत में दाखिल किए थे. ईडी की ओर से विशेष अधिवक्ता जोहेब हुसैन ने पक्ष रखा, जबकि हेमंत सोरेन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने दलीलें पेश कीं. सभी पक्षों को सुनने के बाद रांची PMLA कोर्ट के जज योगेश कुमार की अदालत ने हेमंत सोरेन की डिस्चार्ज अर्जी को खारिज कर दिया.

क्या है ये मामला?

यह मामला रांची के बड़गाईं अंचल स्थित शांति नगर क्षेत्र की 8.86 एकड़ जमीन के कथित अवैध अधिग्रहण और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों से संबंधित है. इस मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कर रहा है.  ईडी ने अपनी जांच के आधार पर मुख्यमंत्री को इस मामले में आरोपी बनाया है. मुख्यमंत्री की ओर से 5 दिसंबर 2025 को दाखिल डिस्चार्ज याचिका में दावा किया गया था कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप तथ्यहीन हैं और अभियोजन चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं. याचिका में यह भी कहा गया था कि उन्हें मामले में अनावश्यक रूप से आरोपी बनाया गया है तथा ईडी के पास उनके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं है.

क्या कहा अदालत ने?

सुनवाई के दौरान ईडी ने याचिका का विरोध करते हुए अदालत से कहा था कि जांच में जुटाए गए साक्ष्य और दस्तावेज मामले की सुनवाई के लिए पर्याप्त आधार प्रस्तुत करते हैं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। डिस्चार्ज याचिका खारिज होने के बाद अब मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी और प्रकरण ट्रायल की दिशा में बढ़ सकता है. आदेश सुनाते हुए अदालत ने कहा कि उपलब्ध अभिलेखों और आरोपों के आधार पर इस स्तर पर मामले से आरोपी को मुक्त किए जाने का पर्याप्त आधार नहीं बनता. हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, मुख्यमंत्री के पास विशेष अदालत के इस आदेश को उच्च न्यायिक मंच पर चुनौती देने का विकल्प उपलब्ध है.

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