झारखंड के धनबाद स्थित आईआईटी (आईएसएम) धनबाद में शनिवार सुबह एक दुखद घटना सामने आई, जिससे पूरे कैंपस में शोक और सनसनी का माहौल बन गया. संस्थान के पेट्रोलियम इंजीनियरिंग विभाग के अंतिम वर्ष के छात्र प्रतीक राजकुमार की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, छात्र ने हॉस्टल की आठवीं मंजिल से छलांग लगा दी.
घटना के तुरंत बाद संस्थान प्रशासन और अन्य छात्रों ने उसे गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया. घायल छात्र को धनबाद के अशर्फी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उपचार के दौरान उसे मृत घोषित कर दिया. मृतक छात्र महाराष्ट्र के अहमदपुर का निवासी बताया जा रहा है और वह संस्थान के 15 मंजिला छात्रावास में रह रहा था. घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी. वहीं, संस्थान प्रशासन भी पूरे मामले की पड़ताल में जुट गया है.
अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि छात्र ने यह कदम क्यों उठाया? पुलिस हॉस्टल के अंदरूनी हालात, छात्र के मोबाइल और उसके आसपास के लोगों से जानकारी जुटा रही है. अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद ही घटना का असली कारण सामने आ सकेगा. यह घटना देशभर के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में छात्रों की मानसिक स्थिति और तनाव को लेकर उठ रहे गंभीर सवालों को फिर से उजागर करती है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश के 23 आईआईटी में 2020-21 से 2024-25 के बीच कुल 45 छात्रों ने आत्महत्या की. इनमें से 28 छात्र अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग से थे, जो कुल आत्महत्याओं का 62 प्रतिशत से अधिक है.
आंकड़े देखें तो 2022-23 में छह छात्रों ने जान दी, जबकि 2023-24 में यह संख्या बढ़कर 16 हो गई. 2024-25 में 13 छात्रों की आत्महत्या दर्ज हुई. पांच वर्षों में सबसे अधिक सात आत्महत्याएं आईआईटी हैदराबाद में हुईं, जबकि आईआईटी खड़गपुर, दिल्ली और कानपुर में छह-छह मामले सामने आए. आईआईटी मद्रास में पांच और आईआईटी (बीएचयू) वाराणसी में चार मामले दर्ज हुए.
इन आंकड़ों के अलावा, इसी अवधि में आईआईटी परिसरों में आठ अप्राकृतिक मौतें भी दर्ज की गईं, जिन्हें आत्महत्या के 45 मामलों में शामिल नहीं किया गया है. इस तरह पांच साल में आईआईटी में कुल 53 छात्रों की मौत हुई. देश स्तर पर भी स्थिति चिंताजनक है. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार, 2024 में भारत में 14,488 छात्रों ने आत्महत्या की, जो 2023 के 13,892 मामलों से अधिक है. 2014 से 2024 के बीच छात्र आत्महत्याओं में लगभग 80 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है.
आईआईटी आईएसएम धनबाद में हुई इस घटना ने एक बार फिर छात्रों की मानसिक सेहत, परामर्श सेवाओं, शैक्षणिक दबाव और कैंपस सपोर्ट सिस्टम पर ध्यान देने की जरूरत को उजागर किया है. अधिकारी घटना की पूरी जांच कर रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि छात्र को पहले से कोई तनाव या परेशानी थी या नहीं.
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