- रामवृक्ष साव ने घायल बेटे को कंधे पर उठाकर करीब दो किलोमीटर पैदल चलकर परीक्षा केंद्र तक पहुंचाया
- ओम प्रकाश कुमार की बाइक से टक्कर लगने से बायां पैर गंभीर रूप से घायल हो गया था और वह चल नहीं पा रहा था
- रामवृक्ष साव ने बेटे की विज्ञान विषय की परीक्षा में शामिल होने के लिए उसे हिम्मत और प्रोत्साहन दिया
हजारीबाग के केरेडारी प्रखंड में एक पिता के साहस,त्याग और ममता की ऐसी मिसाल सामने आई है,जिसने हर किसी को भावुक कर दिया. बेलतू गांव निवासी रामवृक्ष साव ने अपने घायल बेटे ओम प्रकाश कुमार को कंधे पर उठाकर करीब दो किलोमीटर पैदल चलकर परीक्षा केंद्र तक पहुंचाया,ताकि उसकी पढ़ाई और भविष्य प्रभावित न हो.
बाइक से हो गई बेटे की टक्कर
बता दें कि ओम प्रकाश मैट्रिक की परीक्षा दे रहा है.शनिवार को परीक्षा देकर घर लौटते समय एक तेज रफ्तार बाइक की टक्कर से उसका बायां पैर गंभीर रूप से घायल हो लगया,जिससे वह चलने में असमर्थ हो गया.परिवार के सामने सबसे बड़ी चिंता बेटे की आगामी परीक्षा को लेकर थी,लेकिन रामवृक्ष साव ने हिम्मत नहीं हारी और बेटे का हौसला बढ़ाते हुए परीक्षा दिलाने का निर्णय लिया.
पिता ने नहीं होने दिया नुकसान
सोमवार को विज्ञान विषय की परीक्षा थी. बेटे की हालत को देखते हुए पिता ने उसे कंधे पर उठाया और बिना रुके परीक्षा केंद्र तक पहुंचाया. रास्ते भर उनके चेहरे पर थकान जरूर थी,लेकिन आंखों में बेटे के उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद साफ झलक रही थी.परीक्षा केंद्र पहुंचने पर शिक्षक, छात्र और अभिभावक इस दृश्य को देखकर भावुक हो उठे। सभी ने पिता के जज्बे, संघर्ष और समर्पण की प्रशंसा की। लोगों का कहना था कि यह घटना केवल पारिवारिक जिम्मेदारी नहीं,बल्कि उस अटूट संकल्प का प्रतीक है,जो हर माता-पिता अपने बच्चों के सपनों के लिए रखते हैं.रामवृक्ष साव की यह प्रेरक कहानी यह संदेश देती है कि सच्चा प्यार,मेहनत और संकल्प हर कठिनाई को मात दे सकता है और सपनों को टूटने से बचा सकता है.
हजारीबाग से बिसमय की रिपोर्ट
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