गुरुवार को एशियाई खेलों में भारतीय रोअर्स सतनाम सिंह और सलमान खान ने पुरुषों के डबल स्कल्स इवेंट में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता. नागारागावा इंटरनेशनल रेगाटा कोर्स पर भारतीय जोड़ी 1,500 मीटर के निशान तक दूसरे स्थान पर रही, लेकिन आखिरी 500 मीटर में तीसरे स्थान पर खिसक गई और 6:13.25 का समय लिया. चीन के यी ज़ुदी और यिदे नी ने 6:09.37 के समय के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि उज़्बेकिस्तान के पावेल सोरिन और मेखरोज़बेक ममतकुलोव ने 6:10.49 का समय लेकर सिल्वर मेडल जीता. भारतीय जोड़ी गोल्ड मेडल जीतने वालों से 3.88 सेकंड पीछे रही. इतना पास आकर गोल्ड मेडल से चूकने पर सतनाम खुद की भावनाओं पर काबू नहीं पा सके और रोने लगे.

सतनाम ने हांग्जो एशियाई खेलों में पुरुषों के क्वाड्रपल स्कल्स इवेंट में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता था. इससे पहले, भारत रोइंग में एक और मेडल जीतने से मामूली अंतर से चूक गया, जब बलराज पंवार पुरुषों के सिंगल स्कल्स फ़ाइनल में 6:54.80 का समय लेकर चौथे स्थान पर रहे. पंवार 500 मीटर, 1,000 मीटर और 1,500 मीटर के निशान पर दूसरे स्थान पर थे, लेकिन आखिरी 500 मीटर में चौथे स्थान पर खिसक गए. चीन के डेंग झिवेई ने 6:38.98 का समय लेकर गोल्ड मेडल जीता, जबकि पंवार विजेता से 15.82 सेकंड पीछे रहे.
वहीं ब्रॉन्ज जीतने के बाद एक रोअर के बताया कि रेस से एक दिन पहले उन्हें रोइंग फेडरेशन के अध्यक्ष से धमकी मिली थी. रोअर ने कहा,"RFI प्रेसिडेंट हम पर चिल्लाए- अगर तुम रेस में हिस्सा नहीं लोगे, तो मेरा कुछ नहीं बिगड़ेगा. मैं अपनी ज़िंदगी का मज़ा लूंगा. तुम्हारा भविष्य बर्बाद हो जाएगा."
कोर्ट से रोइंग तक
26 वर्षीय सतनाम के लिए एशियाई खेलों के रोइंग पोडियम तक का सफ़र पानी से दूर शुरू हुआ था.नेशनल लेवल के पूर्व हैंडबॉल खिलाड़ी सतनाम ने ओलंपियन स्वर्ण सिंह विर्क से प्रेरित होकर लगभग आठ साल पहले रोइंग शुरू की थी. विर्क ने इंडोनेशिया में 2018 एशियाई खेलों में पुरुषों के लाइटवेट डबल स्कल्स में गोल्ड मेडल जीता था. पंजाब के मानसा ज़िले के रहने वाले सतनाम तेज़ी से भारत के होनहार रोअर्स में से एक बनकर उभरे.
उन्होंने 2018 यूथ ओलंपिक्स में भारत का प्रतिनिधित्व किया और आठवें स्थान पर रहे. बाद में उन्होंने 40वीं सीनियर नेशनल रोइंग चैंपियनशिप में पुरुषों का सिंगल स्कल्स का खिताब जीता और ऐसा करने वाले भारतीय नौसेना के पहले रोअर बने. सतनाम पिछले साल सीनियर एशियन रोइंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने वाली भारत की पुरुषों की क्वाड्रपल स्कल्स टीम का भी हिस्सा थे.
सलमान के जीता पहला एशियाड मेडल
28 साल के सलमान, जिन्होंने अपना पहला एशियन गेम्स मेडल जीता, उनकी रोइंग की यात्रा 2018 में शुरू हुई जब वे भारतीय सेना के बॉम्बे इंजीनियरिंग ग्रुप में शामिल हुए. कोच सत्यवान, सतीश सिरात और प्रभात मिश्रा ने उन्हें रोइंग से परिचित कराया और सेंटर की टीम के लिए चुना.
इसके बाद उन्होंने अपनी बटालियन का प्रतिनिधित्व किया और इंटर-सेंटर चैंपियनशिप में हिस्सा लिया. सलमान दो बार यह खेल छोड़ने के करीब पहुंच गए थे, लेकिन उनके कोचों ने उन्हें जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया. उन्होंने गुजरात में 2022 नेशनल गेम्स में गोल्ड जीता और उसी साल इंडोर नेशनल खिताब भी अपने नाम किया.
इसके बाद उन्हें आर्मी रोइंग नोड में शामिल किया गया, जहां उन्होंने सीनियर कोच कुदरत अली की देखरेख में ट्रेनिंग की. 2023 में, सलमान ने सीनियर नेशनल्स और ओपन स्प्रिंट नेशनल्स में गोल्ड जीता. उनके शानदार प्रदर्शन की वजह से उन्हें टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम प्रोग्राम में जगह मिली.
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