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चुनाव आयुक्तों को 100 पर्सेंट इम्युनिटी संविधान के साथ धोखा, SC में दायर अर्जी में क्या दलीलें

यह अर्जी वकील तान्या श्रीवास्तव की ओर से दाखिल की गई है. इसमें कहा गया है कि संशोधित कानून के सेक्शन 16 में यह छूट प्रदान की गई है, जो गलत है.

चुनाव आयुक्तों को 100 पर्सेंट इम्युनिटी संविधान के साथ धोखा, SC में दायर अर्जी में क्या दलीलें
  • आरजेडी सांसद मनोझ झा ने चुनाव आयुक्तों को मुकदमे से छूट देने वाले 2023 के एक्ट के प्रावधान पर सवाल उठाए हैं
  • अर्जी में कहा गया है कि चुनाव आयुक्तों को दी गई इम्युनिटी संसद के अधिकार क्षेत्र के बाहर है
  • सुप्रीम कोर्ट में कहा गया कि जब संविधान भी ऐसी छूट नहीं देता तो फिर साधारण विधेयक से ऐसा कैसे हो सकता है
नई दिल्ली:

आरजेडी के राज्यसभा सांसद मनोझ झा ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति वाले नियम के उस प्रावधान पर सवाल उठा दिए हैं, जिसके तहत उन्हें किसी मुकदमे या कानूनी एक्शन से छूट प्रदान की गई है. चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति वाले 2023 के एक्ट में यह छूट प्रदान की गई है. इस नियम के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य दो आयु्क्तों को कार्यकाल के दौरान उठाए गए कदमों को लेकर किसी भी तरह की कानूनी कार्रवाई से छूट दी गई है. मनोज झा ने इसी को लेकर सवाल उठाया है. उन्होंने अर्जी में सवाल उठाया कि आखिर जो अधिकार संविधान भी नहीं देता, उससे संसद से कैसे दिया जा सकता है. उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा कानून तो संविधान के साथ भी एक धोखा है. 

यह अर्जी वकील तान्या श्रीवास्तव की ओर से दाखिल की गई है. इसमें कहा गया है कि संशोधित कानून के सेक्शन 16 में यह छूट प्रदान की गई है, जो गलत है. उन्होंने कहा कि ऐसी छूट संसद से पारित एक सामान्य विधेयक के जरिए नहीं दी जा सकती. ऐसी कोई इम्युनिटी को चुनाव आयुक्त जैसे अधिकारियों को संविधान भी नहीं देता. इस अर्जी में कहा गया कि संविधान संशोधन के जरिए भी ऐसा कोई प्रावधान नहीं लाया जा सकता. फिर इसे एक सामान्य विधेयक के जरिए कैसे लागू कर दिया गया. अर्जी में इस कानून में सेक्शन 16 जोड़े जाने पर आपत्ति जताई गई. 

मनोज झा की याचिका में दावा किया गया कि संसद में विचार के लिए जो बिल पेश किया गया था, उसमें सेक्शन 16 नहीं था. इस विधेयक में आधिकारिक संशोधन राज्यसभा में पेश किए जाने से ठीक एक दिन पहले किया गया. इसके अलावा लोकसभा से इसे तब मंजूरी दिलाई गई, जब ज्यादातर विपक्षी सांसद निलंबित थे. याचिका में दावा किया गया कि संसदीय समिति में भी इस प्रावधान की स्क्रूटनी नहीं हुई. इस प्रावधान को लेकर एक सवाल यह भी उठाया गया कि आखिर 100 फीसदी इम्युनिटी कैसे दी जा सकती है. 

यह सवाल भी हुआ है कि कोई अधिकार ईमानदार रहा या फिर भ्रष्ट रहा, उसके द्वारा उठाए गए कदम की प्रकृति और उसकी मंशा क्या थी. इन सभी विषयों पर कोई विचार किए बिना ही पूरी तरह इम्युनिटी दिया जाना ठीक नहीं है. याचिका में कहा गया, 'सेक्शन 16 ईमानदार फैसलों को लेकर इम्युनिटी देने वाला नहीं है. यह चुनाव आयुक्त के कार्यकाल के दौरान किए गए हर कृत्य पर उन्हें छूट देता है.' इसके अलावा कानून के शासन के भी इसे विपरीत बताया गया. इस अर्जी में कहा गया है कि इस प्रावधान को रद्द किया जाए. याचिका में अपील की गई है कि यह नियम संविधान के आर्टिकल 14, 21, 32, 129, 215, 226 और 324 का उल्लंघन करता है. 

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