- सूर्यकांत ने विपक्षी नेताओं की मुलाकात की मांग को भारतीय न्यायिक परंपरा के कारण ठुकरा दिया है
- न्यायिक प्रोटोकॉल के अनुसार विचाराधीन मामलों पर मुख्य न्यायाधीश किसी बाहरी व्यक्ति से चर्चा नहीं कर सकते
- राहुल गांधी और विपक्षी नेता विशेष गहन पुनरीक्षण और फॉर्म-6 विवाद को लेकर चीफ जस्टिस से मिलना चाहते थे
विपक्षी INDIA अलायंस के नेता आज चुनाव आयु्क्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चीफ जस्टिस से मिलने वाले थे. इससे पहले ही मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बता दिया है कि उन्होंने ऐसी मुलाकात से इनकार किया है. इसका जवाब भी गठबंधन की ओर से मिले पत्र पर दिया गया है. इस संबंध में चीफ जस्टिस ने सीधे राहुल गांधी को लिखे पत्र में मुलाकात से इनकार किया है और इसकी वजह भी बताई है. दरअसल भारतीय न्यायिक परंपरा में ही ऐसा है कि किसी भी विचाराधीन मामले को लेकर कोई भी पक्ष सीधे चीफ जस्टिस से मुलाकात नहीं कर सकता. इस संबंध में बाकायदा एक प्रोटोकॉल हैं.
भारतीय न्यायिक परंपरा और प्रोटोकॉल के अनुसार कोई भी न्यायाधीश या मुख्य न्यायाधीश उन मामलों या मुद्दों पर किसी भी राजनीतिक दल या बाहरी व्यक्ति से व्यक्तिगत चर्चा नहीं कर सकता, जो वर्तमान में अदालत में विचाराधीन विचाराधीन हों. फॉर्म 6 और SIR को लेकर भी अदालत में फिलहाल कई मामले दायर हैं, जिनकी सुनवाई चल रही है. राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेता चुनाव आयोग (ECI) के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और 'फॉर्म-6' से जुड़े विवाद को लेकर सीजेआई से मिलना चाहते थे. इससे जुड़ी याचिकाएं पहले से ही सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सुनवाई के दायरे में थीं, इसलिए व्यक्तिगत मुलाकात करना न्यायिक आचार संहिता के खिलाफ माना जाता.
ऐसे में चीफ जस्टिस ने मिलने से ही इनकार किया है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा है कि अदालत के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं. यदि किसी को कोई चिंता है तो अदालत में अर्जी डाल सकता है और हम उसकी सुनवाई जरूर करेंगे. बता दें कि 7 मई 1997 को सुप्रीम कोर्ट के फुल बेंच द्वारा अपनाई गई जजों के लिए नैतिक आचार संहिता के पॉइंट 6 और 8 के अनुसार एक जज को अपने पद की गरिमा के अनुरूप कुछ हद तक दूरी बनाए रखनी चाहिए. इसके तहत कोई भी न्यायाधीश सार्वजनिक बहस में शामिल नहीं होगा.
इसके अलावा एक नियम यह भी है कि राजनीतिक मामलों पर अथवा ऐसे मामलों पर सार्वजनिक रूप से अपने विचार व्यक्त नहीं करेगा जो न्यायिक निर्णय के लिए लंबित हैं. ऐसे मामलों में भी जज कुछ नहीं बोल सकते, जिनके अदालत के समक्ष आने की संभावना हो. यही कारण है कि ज्वलंत मुद्दों पर भी कार्यरत जज कभी खुलकर टिप्पणी नहीं करते. चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने भी उसी परंपरा का पालन किया है. उन्होंने अपने न मिलने की वजह भी खुलकर राहुल गांधी को बता दी है.
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