- कांग्रेस ने वीडी सतीशन को केरल का नया मुख्यमंत्री चुन लिया है..
- इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) ने सतीशन के मुख्यमंत्री बनने का खुलकर समर्थन किया और गठबंधन ने सहमति जताई.
- वीडी सतीशन का राजनीतिक सफर ग्रासरूट स्तर का रहा है और परूर विधानसभा सीट से लगातार छह बार विधायक चुने गए हैं.
केरल में नए मुख्यमंत्री को लेकर चल रहा सस्पेंस अब खत्म हो गया है. कांग्रेस पार्टी ने वीडी सतीशन को राज्य का नया मुख्यमंत्री चुन लिया है. पार्टी हाईकमान और सहयोगी दलों के साथ लंबे मंथन के बाद यह फैसला लिया गया है.
वीडी सतीशन को 2026 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नीत UDF की बड़ी जीत का चेहरा माना जा रहा है. उन्होंने पूरे चुनाव अभियान की अगुवाई की और वाम मोर्चे के खिलाफ आक्रामक रणनीति अपनाते हुए पार्टी को सत्ता में वापसी दिलाई. इसी राजनीतिक प्रदर्शन और जमीनी पकड़ के चलते उनके नाम पर सहमति बनी है.
IUML का समर्थन बना सबसे बड़ा फैक्टर
सतीशन की दावेदारी को मजबूती देने में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) की अहम भूमिका रही. IUML ने खुलकर सतीशन को मुख्यमंत्री बनाने की पैरवी की. गठबंधन के अन्य दलों ने भी उनके नाम पर सहमति जताई थी, इससे कांग्रेस हाईकमान पर संतुलन बनाने का दबाव बढ़ा.
राजनीतिक तौर पर यह भी अहम रहा कि वायनाड जैसे क्षेत्रों में, जहां कांग्रेस के लिए मुस्लिम लीग का प्रभाव मजबूत है, वहां समीकरण बिगाड़ने का जोखिम पार्टी नहीं लेना चाहती थी.
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शुरुआती जीवन और शिक्षा
वीडी सतीशन का जन्म 31 मई 1964 को केरल के एर्नाकुलम जिले के नेट्टूर में हुआ. उन्होंने अपनी पढ़ाई केरल में ही पूरी की और आगे चलकर कानून (LLB, LLM) की पढ़ाई की. छात्र जीवन के दौरान ही उन्होंने राजनीति में कदम रखा और KSU (केरल स्टूडेंट्स यूनियन) से जुड़े. महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई. इसके अलावा राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) में जिम्मेदारी भी निभाई. यहीं से उनकी राजनीतिक नींव तैयार हुई.
राजनीतिक करियर: परूर से मजबूत पकड़
सतीशन का राजनीतिक सफर पूरी तरह ग्रासरूट स्तर का रहा है. 2001 में पहली बार परूर विधानसभा सीट से विधायक बने. इसके बाद लगातार 6 बार जीत दर्ज की. परूर को कांग्रेस का मजबूत गढ़ बनाने का श्रेय इन्हीं को जाता है. उनका यह रिकॉर्ड उन्हें राज्य के सबसे भरोसेमंद और मजबूत जनाधार वाले नेताओं में शामिल करता है.
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वेणुगोपाल के मुकाबले कैसे भारी पड़ा सतीशन का पलड़ा
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस के कई विधायक केसी वेणुगोपाल के पक्ष में थे, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने अंततः जनता और संगठन के मूड को प्राथमिकता दी. सतीशन की जनप्रिय छवि, चुनावी जीत में उनका नेतृत्व और ग्राउंड स्तर पर कार्यकर्ताओं का समर्थन. इन सब कारणों से वेणुगोपाल को दरकिनार कर सतीशन को मुख्यमंत्री चुना गया.
कमजोरियां भी थीं, लेकिन भारी पड़ा दबाव
हालांकि, सतीशन के खिलाफ कुछ बड़े तर्क भी थे. वे कभी मंत्री नहीं रहे, यानी प्रशासनिक अनुभव की कमी है. नए विधायकों में उनका समर्थन सीमित बताया जा रहा था. पार्टी के भीतर कई गुट उनके खिलाफ लामबंद थे. इसके बावजूद सतीशन अपने रुख पर अड़े रहे. उन्होंने साफ संकेत दिया कि अगर उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया तो वे किसी और सरकार में शामिल नहीं होंगे. उनके समर्थकों ने राज्यभर में प्रदर्शन भी किए, जिससे राजनीतिक दबाव और बढ़ गया.
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