- वीडी सतीशन होंगे केरलम के नए सीएम, कांग्रेस ने किया नाम का ऐलान
- रेस में कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल का भी नाम था, लेकिन अंतिम वक्त में सतीशन ने मारी बाजी
- केरलम में यूडीएफ 10 सालों बाद सत्ता में वापस लौटी है
केरलम में बीडी सतीशन होंगे कांग्रेस के नए सीएम. पार्टी ने आज नई दिल्ली में उनके नाम का ऐलान किया. गौरतलब है कि बीते पांच सालों में नेता विपक्ष के रूप में वीडी सतीशन बेहद लोकप्रिय हो कर उभरे. केरलम में यूडीएफ की जबरदस्त जीत का श्रेय उनके नेतृत्व को दिया जाता है. सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस की सहयोगी IUML सीएम पद के लिए सतीशन का समर्थन कर रही है.
6 बार के विधायक हैं सतीशन
छह बार के विधायक सतीशन की लोकप्रियता और समीकरण के मद्देनज़र कांग्रेस नेतृत्व ने विधायकों की पसंद केसी वेणुगोपाल को दरकिनार कर दिया. सतीशन राज्य सरकार में एक बार भी मंत्री नहीं रहे. इस लिहाज से माना जाता है उनके पास प्रशासनिक अनुभव की कमी है. नए विधायकों में उनके पास गिने चुने समर्थक ही हैं. ये बातें उनके खिलाफ जा रही थी.
सरकार में शामिल नहीं होने की धमकी
लेकिन 62 साल के सतीशन सीएम की कुर्सी के लिए अड़े रहे और साफ कर दिया कि उन्हें सीएम नहीं बनाया गया तो फिर वो किसी और की सरकार में शामिल नहीं होंगे. उनके समर्थक राज्य भर में प्रदर्शन भी कर रहे थे. दूसरी तरफ मुस्लिम लीग भी सतीशन के लिए दबाव बना रही थी. प्रियंका गांधी जिस वायनाड सीट से सांसद हैं वहां मुस्लिम लीग का बड़ा प्रभाव है. ऐसे में सतीशन को सीएम नहीं बनाने से केरलम में कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ सकती थीं.
कांग्रेस ने आज नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वीडी सतीशन के नाम का ऐलान किया. गौरतलब है कि 4 मई के नतीजे आने के 10 दिन बाद कांग्रेस ने सीएम के नाम का ऐलान किया है. शुरुआत में केसी वेणुगोपाल भी रेस में काफी आगे बताए जा रहे थे. राहुल गांधी से उनकी नजदीकियां उन्हें इस रेस में मजबूत कैंडिडेट बना रही थी. लेकिन कांग्रेस ने ग्राउंड रिपोर्ट के बाद सतीशन के नाम का ऐलान किया.
वीडी सतीशन का राजनीतिक करियर
-केरल के नए मुख्यमंत्री ‘नामित'
-राजनीतिक करियर की शुरुआत NSUI से की थी
-केरल हाई कोर्ट में एक प्रैक्टिसिंग वकील
-2001 में पहली बार केरल विधानसभा के लिए चुने गए (परवूर)
-विधानसभा के लिए 6 बार चुने गए (2001, 2006, 2011, 2016, 2021 और 2026)
-2026 के चुनाव में उन्होंने ई.टी. टैसन मास्टर (CPI) को 20,600 वोटों के अंतर से हराया
ताकत
-परवूर से छह बार जीत हासिल की
-तेज, आक्रामक और प्रभावी नेतृत्व के लिए जाने जाते हैं
-UDF का मनोबल फिर से बढ़ाने, सामाजिक गठबंधन बनाने और पार्टी को ज़बरदस्त जीत (2026) दिलाने का श्रेय इन्हें जाता है
-पेशे से वकील, अनुशासित और अपेक्षाकृत साफ-सुथरे संगठनात्मक रिकॉर्ड वाले माने जाते हैं
-IUML ने खुलकर सतीसन को मुख्यमंत्री बनाने की पैरवी की
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