- भाजपा ने राज्यसभा सीटों के लिए आठ नए उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया है, जिनमें ज्यादातर नेता कम चर्चित हैं
- श्रुति गंगवार कुर्मी समाज से संबंध रखती हैं और संतोष गंगवार पूर्व सांसद और झारखंड के राज्यपाल हैं
- भाजपा ने श्रुति गंगवार को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है ताकि कुर्मी समाज को साधकर ओबीसी समीकरण मजबूत किया जा सके
भाजपा ने उत्तर प्रदेश में राज्यसभा सीटों के चुनाव के लिए जिन 8 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया है, वे सभी नए चेहरे हैं. योगी सरकार में मंत्री धर्मपाल सिंह का एक लंबा करियर है तो वहीं विद्यासागर सोनकर भी पुराने नेता हैं और विभिन्न पदों पर रहे हैं. लेकिन अन्य 6 नेता चर्चाओं से परे रहे हैं और कभी बड़ी जिम्मेदारी नहीं संभाली. ऐसे में इन लोगों को सीधे उच्च सदन भेजने के लिए उम्मीदवार बनाया जाना अन्य लोगों के अलावा खुद उन्हें भी चौंका रहा होगा. इन्हीं में से एक नाम श्रुति गंगवार का है, जिनका जिक्र उम्मीदवारों की लिस्ट में सबसे आखिरी में है. वह कुर्मी समाज से आती हैं और एक लंबी विरासत का हिस्सा हैं.
उनके पति संतोष गंगवार श्रम मंत्री रहे थे और बरेली जैसी अहम लोकसभा सीट से 8 बार सांसद रहे. अब वह झारखंड जैसे अहम सूबे के राज्यपाल हैं. वहीं उनकी बेटी श्रुति गंगवार को भाजपा ने राज्यसभा कैंडिडेट बनाया है. 2024 के आम चुनाव में भाजपा को कुर्मियों के वोट कम मिलने की बात कही गई थी. ऐसे में श्रुति गंगवार को चांस देकर भाजपा ने ओबीसी समीकरण साधने की कोशिश की है. खासतौर पर नाराज कहे जा रहे कुर्मी समाज को मनाने का एक प्रयास भी है. बता दें कि भाजपा के यूपी अध्यक्ष पंकज चौधरी भी कुर्मी समाज से ही हैं.
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अभी बरेली कोऑपरेटिव बैंक की अध्यक्ष हैं श्रुति गंगवार
अब श्रुति गंगवार की बात करें तो वह बरेली में अर्बन कोऑपरेटिव बैंक की अध्यक्ष हैं. इसके अलावा राजनीतिक रूप से भी थोड़ा सक्रिय रही हैं. भाजपा के मंच पर वह सीधे तौर पर ज्यादा नहीं दिखती थीं, लेकिन अकसर सामाजिक कार्यों में सक्रिय रही हैं. इसके अलावा सतीश महाना समेत कई नेताओं से मुलाकात करती दिखती थीं. श्रुति गंगवार से पहले उनकी मां सौभाग्य गंगवार भी कॉपरेटिव बैंक में सक्रिय रही थीं. उनके निधन के बाद ही श्रुति ने यह जिम्मेदारी संभाली थी. माना जा रहा है कि भाजपा ने उन्हें 8वां कैंडिडेट भी शायद इसलिए बनाया है ताकि चुनाव में पिछड़ा कार्ड चला जा सके. इसके अलावा यदि अखिलेश यादव तीसरा कैंडिडेट उतारते हैं तो फिर पिछड़ा और महिला कैंडिडेट के नाम पर क्रॉस वोटिंग को भी रोका जा सके.
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