- लतीफ भट लश्कर-ए-तैयबा का कमांडर है, जो शोपियां एनकाउंटर में साथी जाकिर गनई के मारे जाने के बाद फरार हो गया था.
- सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि उसने 10 दिन में अनंतनाग और कुलगाम में 3 टारगेटेड किलिंग को अंजाम दिया है.
- लतीफ, वारिस शाह के साथ मिलकर पिस्तौल से हमले कर TRF स्टाइल में वारदात के बाद भीड़ में गायब हो जाता है.
दक्षिण कश्मीर में हाल ही में कुछ टारगेटेड हत्याएं हुई हैं. सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि इन घटनाओं में लश्कर-ए-तैयबा का कमांडर लतीफ भट और उसका साथी शामिल थे. खुफिया जानकारी से पता चलता है कि लतीफ भट और उसका साथी वारिस शाह 22 जुलाई को अनंतनाग में अमरनाथ यात्रा रूट पर एक पुलिसकर्मी की गोली मारकर हत्या करने और अब कुलगाम के केलम इलाके में दो बाहरी मजदूरों पर हुए हमले में शामिल था, जिसमें छत्तीसगढ़ के दो मजदूरों की मौत हो गई.
स्थानीय स्तर पर भर्ती किए गए 'ओवर ग्राउंड वर्कर' जो हमले करते हैं और फिर आम लोगों के बीच घुल-मिल जाते हैं. सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि हमले का तरीका लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े संगठन 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (TRF) जैसा ही है.
एक अधिकारी ने कहा, "TRF पिस्तौल से तेजी से हमला करने और फिर भीड़ में गायब हो जाने के लिए जानी जाती है. न तो बड़े हथियार और न ही कोई बड़ा निशान. इसी तरह वे पकड़े जाने से बचते हैं."
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लतीफ भट कौन है?
लतीफ भट लश्कर का एक कमांडर है, जो शोपियां एनकाउंटर के बाद चर्चा में आया. इस दौरान वह लश्कर के टॉप कमांडर जाकिर गनई के साथ फंस गया था. सुरक्षा बलों ने पांच दिन तक चले एनकाउंटर में प्रतिबंधित लश्कर-ए-तैयबा के A++ कैटेगरी के कमांडर जाकिर अहमद गनई को मार गिराया. हालांकि, उसका साथी लतीफ भट एनकाउंटर वाली जगह से भागने में कामयाब रहा.
एजेंसियों को शक है कि तब से लतीफ भट ने सीमा पार बैठे हैंडलर्स के कहने पर बाहरी लोगों और सुरक्षा कर्मियों की टारगेटेड किलिंग को अंजाम देने के लिए स्लीपर सेल्स को फिर से एक्टिवेट कर दिया है. माना जाता है कि भट का साथी, वारिस शाह, 22 जुलाई को अनंतनाग में पुलिस अधिकारी की हत्या के पीछे भी था. सड़क किनारे लगे सर्विलांस कैमरे में वारिस शाह को बहुत करीब से पुलिसकर्मी पर गोली चलाते हुए कैद किया गया. माना जाता है कि शाह इन हमलों के लिए लॉजिस्टिकल सपोर्ट और जासूसी से जुड़ी सुविधाएं मुहैया करा रहा है.
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PoJK में अशांति के बीच हमले...
कश्मीर में टारगेटेड किलिंग से जुड़े मामलों का वक्त भी अहम है. ये हमले ऐसे वक्त में हो रहे हैं, जब पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में पाकिस्तान सेना और प्रशासन के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. अधिकारियों का मानना है कि पाकिस्तान हमलों का इस्तेमाल PoJK में चल रही अशांति से ध्यान हटाने और कश्मीर में माहौल खराब करने के लिए कर रहा है, खासकर अमरनाथ यात्रा के दौरान ऐसी स्थिति पैदा करना.
सुरक्षा बलों ने भट, शाह और आतंकियों के मॉड्यूल्स का पता लगाने के लिए कुलगाम और अनंतनाग में घेराबंदी और तलाशी अभियान तेज कर दिए हैं.
इस साल कश्मीर में पर्यटकों और अमरनाथ यात्रियों की रिकॉर्ड संख्या देखी गई है. होटल भरे हुए हैं और बाजारों में चहल-पहल है. एजेंसियों का कहना है कि इन हमलों के पीछे का मकसद साफ है- डर फैलाना, सामान्य हालात को निशाना बनाना और यह मैसेज देना कि कश्मीर में शांति अभी भी नाज़ुक है. लतीफ भट और वारिस शाह की तलाश जारी है.
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