मेरठ के सौरभ राजपूत हत्याकांड में इंसाफ हो गया है. मेरठ की जिला अदालत ने सौरभ की हत्या के दोषी मुस्कान रस्तोगी और साहिल को फांसी की सजा सुना दी है. उन्हें जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने फांसी की सजा सुनाई है.
अदालत में जुलाई 2025 में सौरभ राजपूत हत्याकांड का ट्रायल शुरू हुआ था. करीब 13 महीने तक 126 तारीखों पर मामले की सुनवाई हुई. इस दौरान 22 से ज्यादा गवाहों के बयान दर्ज किए गए. जिला जज अरविंद कुमार ने दोनों को फांसी की सजा सुनाते समय महाभारत का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि अपराधी को उसके अपराध के लिए सजा देना भी धर्म है.
जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा पांच महीने पहले ही मेरठ की अदालत के जिला जज बनाए गए थे. इससे पहले वह मिर्जापुर की जिला कोर्ट के जज थे.
कौन हैं जिला जज अरविंद कुमार?
मेरठ कोर्ट की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, जिला जज अरविंद कुमार का जन्म 2 जुलाई 1971 को यूपी के मऊ जिले में हुआ था.
उन्होंने 1990 में बीए की डिग्री ली थी. इसके बाद 1994 में वह उन्होंने LL.B. और 1996 में LL.M. की डिग्री हासिल की.
जज के तौर पर उनका करियर 2003 में शुरू हुआ था. पांच साल बाद 16 जुलाई 2008 को उनको प्रमोट कर सिविल जज (सीनियर डिविजन) नियुक्त किया गया. उसी दिन उनको क्लास-1 अफसर का दर्जा भी मिला. इसके बाद 2013 में वह जिला जज नियुक्त हुए.
5 महीने पहले ही मेरठ में हुआ है ट्रांसफर
मेरठ आने से पहले जिला जज अरविंद कुमार कई और जिलों में भी जज रह चुके हैं. 2013 और 2014 में वह गोरखपुर और कानपुर नगर के जिला जज रहे.
इसके बाद मई 2015 से अप्रैल 2018 तक वह कानपुर नगर की फैमिली कोर्ट में एडिशनल प्रिंसिपल जज रहे.
18 अप्रैल 2018 से 10 अगस्त 2020 तक वह यूपी सरकार के कानून विभाग में स्पेशल सेक्रेटरी रहे. अगस्त 2020 से मई 2022 तक वह बस्ती की फैमिली कोर्ट के प्रिंसिपल जज रहे.
इसके बाद वह 5 मई 2023 से 13 नवंबर 2024 तक लखनऊ में स्टेट ट्रांसपोर्ट ट्रिब्यूनल के चेयरमैन रहे. 14 नवंबर 2024 से 19 मई 2026 तक वह मिर्जापुर की जिला कोर्ट के जिला जज रहे.
उसके बाद उनका ट्रांसफर मेरठ की जिला कोर्ट में कर दिया गया. 21 मई 2026 से वह मेरठ कोर्ट के जिला जज हैं.
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