- चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने भरी अदालत में एक शख्स द्वारा अपने भाई को फोन करने पर कड़ी नाराजगी जताई
- फोन करने वाले ने CJI के आदेश पर सवाल उठाते हुए पूछा कि उन्होंने ऐसा आदेश कैसे पारित किया
- यह आदेश हरियाणा के हिसार के एक मामले से जुड़ा था, जहां CJI का परिवार भी रहता है
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत को एक शख्स ने फोन लगाया. फोन इसलिए लगाया क्योंकि एक मामले में चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने आदेश जारी किया था. इसी पर शख्स ने CJI के भाई को फोन लगाया और कहा कि वह ऐसा आदेश कैसे पास कर सकते हैं? इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने भड़कते हुए भरी अदालत में कहा कि 'उसकी हिम्मत कैसे हुई?'
एक मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने इस बात का खुलासा करते हुए कहा, 'किसी ने मेरे भाई को फोन किया और पूछा कि मैंने ऐसा आदेश कैसे पारित किया? उसके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों नहीं होनी चाहिए?'
दिलचस्प बात ये है कि चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने जिस मामले में आदेश पास किया था, वह हरियाणा के हिसार में रहने वाले एक शख्स से जुड़ा था. चीफ जस्टिस सूर्यकांत भी हिसार के ही नारनौंद तहसील के पेटवाड़ गांव के रहने वाले हैं. यह उनका पैतृक गांव है. उनके बड़े भाई मास्टर ऋषिकांत अब भी यहीं रहते हैं.
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कौन हैं CJI के भाई ऋषिकांत?
मास्टर ऋषिकांत ने NDTV को दिए एक इंटरव्यू में बताया था कि पिताजी संस्कृत के शिक्षक थे. 4 भाइयों में ऋषिकांत सबसे बड़े हैं और चीफ जस्टिस सूर्यकांत सबसे छोटे हैं. एक भाई भिवानी में डॉक्टर हैं. और दूसरे भाई हिसार में हैं जो तकनीकी शिक्षा विभाग से रिटायर हो चुके हैं. ऋषिकांत 2014 में रिटायर हो चुके हैं.
उन्होंने बताया था कि 'सूर्यकांत गांव के ही सरकारी स्कूल से पढ़ाई की थी. हाई स्कूल की शिक्षा भी सरकारी स्कूल से हुई.'
मास्टर ऋषिकांत ने ये इंटरव्यू तब दिया था, जब जस्टिस सूर्यकांत चीफ जस्टिस बनने वाले थे. इस बारे में उन्होंने कहा था कि 'मैंने सूर्यकांत को एक पेशेवर वकील के रूप में देखा है और उसने अपने पेशे के साथ न्याय किया है.'
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CJI के भाई को फोन क्यों किया था?
दरअसल, हिसार के रहने वाले कृष्ण पुनिया के बच्चे नितिन और एकता पुनिया को बौद्ध अल्पसंख्यक सर्टिफिकेट मिल गया था लेकिन तब भी उन्हें मेडिकल कॉलेज में एडमिशन नहीं मिला था.
निखिल पुनिया और एकता पुनिया ने PG मेडिकल कोर्स में दाखिले के लिए बौद्ध अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र के तहत लाभ की मांग की थी. भाई-बहन ने दावा किया था कि बौद्ध धर्म अपनाने के बाद वे अल्पसंख्यकों को मिलने वाले लाभ के लिए पात्र हैं.
अदालत ने सवाल उठाया था कि पुनिया जाट समुदाय के उम्मीद हैं, जिन्हें सामान्य कैटेगरी में रखा जाता है. ऐसे में उन्हें अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र कैसे मिल सकता है. कोर्ट ने भाई-बहन की याचिका को खारिज कर दिया था. चीफ जस्टिस ने कहा था, 'आप अल्पसंख्यकों के अधिकार छीनना चाहते हैं. आप सबसे समृद्ध समुदायों में से एक से आते हैं. अपनी योग्यता पर गर्व कीजिए.'
अब इसी मामले में CJI के भाई को फोन किया गया था. इस पर नाराजगी जताते हुए सीजेआई ने कहा, 'उसकी हिम्मत कैसे हुई मेरे भाई को फोन करने की और यह पूछने की कि CJI ने आदेश कैसे पारित किया? क्या अब वह मुझे डिक्टेट करेगा? आपको इसकी पुष्टि करनी चाहिए और एक वकील के तौर पर आपको सबसे पहले इस मामले से हट जाना चाहिए.'
उन्होंने आगे सख्त चेतावनी देते हुए कहा, 'भले ही वह भारत के बाहर कहीं भी छिपा हो. मुझे पता है कि ऐसे लोगों से कैसे निपटना है. दोबारा कभी ऐसी कोशिश मत करना. मैं पिछले 23 सालों से ऐसे लोगों से निपटता आ रहा हूं.'
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