बिहार में एक बार फिर बाढ़ आई है. 14 जिलों के 22 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हैं. इस बीच बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक चिट्ठी लिखी है. इसमें उन्होंने बिहार की बाढ़ को 'राष्ट्रीय आपदा' घोषित करने की मांग की है. इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार से तत्काल 5 हजार करोड़ रुपये की मदद देने की मांग भी की है.
तेजस्वी यादव ने अपनी चिट्ठी में आरोप लगाया कि 'आर्थिक रूप से दिवालिया' बिहार सरकार बाढ़ से निपटने के लिए राहत और बचाव जैसे उपायों को लागू नहीं कर पा रही है. उन्होंने यह भी कहा कि बिहार के मंत्री और सांसद इस आपदा के सामने 'बेबस' नजर आ रहे हैं.
लेकिन सवाल उठता है कि तेजस्वी यादव क्यों चाहते हैं कि केंद्र सरकार बिहार की बाढ़ को 'राष्ट्रीय आपदा' घोषित करे? इससे बदल क्या जाएगा?
क्या 'राष्ट्रीय आपदा' जैसी चीज होती है?
हमारे देश में ऐसा कोई प्रावधान या कानून नहीं है कि जो एक प्राकृतिक आपदा को 'राष्ट्रीय आपदा' घोषित करे. NDRF या SDRF की गाइडलाइंस भी किसी आपदा को 'राष्ट्रीय आपदा' घोषित करने का जिक्र नहीं है.
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी एक बार संसद में साफ किया था कि NDRF और SDRF की गाइडलाइंस में किसी आपदा को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की कोई व्यवस्था नहीं है.

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सरकार ने 2001 के गुजरात भूकंप और 1999 के ओडिशा में भयंकर तूफान को भी 'राष्ट्रीय आपदा' नहीं माना था. इन दोनों आपदाओं को सरकार ने 'अभूतपूर्व गंभीरता की आपदा' घोषित किया था.
2001 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की अगुवाई में 'राष्ट्रीय आपदा' को पारिभाषित करने वाले मानकों को तय करने के एक समिति बनी थी. हालांकि, इस समिति ने कोई सुझाव नहीं दिया था.
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फिर इसकी जगह क्या होता है?
10वें वित्त आयोग (1995-2000) ने कहा था कि एक आपदा को 'गंभीर प्रकृति की आपदा' तब कहा जाता है, जब वह राज्य की एक तिहाई को आबादी को प्रभावित करती है.
हालांकि, वित्त आयोग ने 'गंभीर प्रकृति की आपदा' को परिभाषित नहीं किया था लेकिन यह कहा था कि हर आपदा को अलग-अलग मामलों के आधार पर देखना जरूरी है. देखा जाए कि आपदा कितनी भयावह थी, उसका अंजाम क्या था, कितनी आबादी प्रभावित हुई.
'गंभीर प्रकृति की आपदा' पर फायदा क्या?
किसी भी राज्य में आपदा आती है, उससे निपटने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होती है. इसके लिए स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फंड (SDRF) होता है.
अगर किसी आपदा को केंद्र सरकार 'गंभीर प्रकृति की आपदा' घोषित करती है तो नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फंड (NDRF) से भी राज्य को फंड मिलता है.

वित्त आयोग की सिफारिश के आधार पर SDRF में भी 75% फंड केंद्र और 25% राज्य सरकार देती है. कुछ विशेष राज्यों में केंद्र 90% तक पैसा देती है. केंद्र सरकार साल में दो बार SDRF में पैसा डालती है.
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कितना पैसा देता है केंद्र?
अगर किसी आपदा को 'गंभीर प्रकृति की आपदा' घोषित किया जाता है, तब तो केंद्र सरकार से भी फंडिंग मिलती है. हालांकि, आपदा की स्थिति को देखते हुए केंद्र NDRF के जरिए हर साल कुछ न कुछ फंड जारी करती रहती है.
4 अगस्त को PIB ने प्रेस रिलीज में बताया था कि 2025-26 में SDRF के लिए 28,184 करोड़ रुपये का फंड रखा गया था. इसमें से केंद्र सरकार ने SDRF से अपने हिस्से का 24,193 करोड़ रुपये रिलीज भी कर दिया था. इसके अलावा, 2025-26 में NDRF से 5,909 करोड़ रुपये भी राज्यों को दिए गए थे.

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2025-26 में NDRF के जरिए केंद्र ने सबसे ज्यादा 1,890 करोड़ रुपये हिमाचल प्रदेश को दिए थे. इसके बाद 722 करोड़ रुपये असम और 534 करोड़ रुपये तमिलनाडु को दिए थे.
बिहार को SDRF से केंद्र के हिस्से के रूप में 1,377 करोड़ और NDRF से 77 करोड़ रुपये की मदद मिली थी.
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