- मालेगांव महानगरपालिका में मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है
- कांग्रेस और बीजेपी के पार्षदों ने मिलकर ‘भारत विकास आघाड़ी’ नामक एक स्वतंत्र समूह का गठन किया है
- इस गठबंधन के नेतृत्व के लिए कांग्रेस के एजाज बेग को जिम्मेदारी दी गई है
राजनीति में कब क्या हो जाए, ये कहना बेहद मुश्किल है. देश के मौजूदा राजनीतिक हालात में शायद ही कोई ये सोच सकता है कि कांग्रेस और बीजेपी के नेता हाथ मिला लें. लेकिन महाराष्ट्र के मालेगांव में ऐसा कर कांग्रेस और बीजेपी नेताओं को सबको चौंका दिया है. ऐसे में मालेगांव महानगरपालिका में मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव में पेंच फंस गया है, क्योंकि वहां किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिल पाया है. कांग्रेस और बीजेपी दोनों इस 'अनोखे' गठबंधन को लेकर हैरान और परेशान हैं.
कांग्रेस-बीजेपी पार्षद एक साथ आए
मालेगांव महानगरपालिका में मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव से पहले इस दुर्लभ राजनीतिक घटनाक्रम ने कांग्रेस और बीजेपी समेत अन्य पार्टियों को नये सिरे से सोचने पर मजबूर कर दिया है. क्योंकि वैचारिक रूप से प्रतिद्वंद्वी माने जाने वाली भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के पार्षदों ने मिलकर एक नया मोर्चा गठित किया है. ऐसे गठबंधन की उम्मीद शायद ही किसी पार्टी ने चुनाव के बाद की होगी. लेकिन ऐसा हो गया है.
मालेगांव में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस के तीन और बीजेपी के दो पार्षदों ने मिलकर ‘भारत विकास आघाडी' नाम से एक स्वतंत्र समूह बनाया है, जिससे 84 सदस्यीय महानगरपालिका में सत्ता संतुलन के समीकरण बदल सकते हैं. मौजूदा स्थिति में किसी भी दल के पास स्पष्ट बहुमत नहीं है. सूत्रों के मुताबिक, नये मोर्चे का नेतृत्व कांग्रेस पार्षद एजाज बेग करेंगे. हालांकि, मालेगांव महानगरपालिका चुनाव के नतीजे घोषित हो चुके हैं, लेकिन महापौर और उपमहापौर का चुनाव अभी होना बाकी है। इस बीच, नवगठित मोर्चा आगामी चुनाव में अहम भूमिका निभा सकता है.
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मालेगांव में सीटों का गणित
मालेगांव नगर निगम में कुल 84 सदस्य हैं, लेकिन बीते जनवरी में हुए चुनाव में जनता ने किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं दिया. ऐसे में पार्टियां जोड़-तोड़ में जुटी हुई थीं, इस बीच कांग्रेस और बीजेपी के कुछ पार्षदों ने खेला कर दिया. इस नगर निगम से सबसे बड़े पार्टी के तौर पर इस्लाम पार्टी सामने आई, जिसके पास 35 सीटें है. एआईएमआईएम के पास 21 सीटें, एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना के पास 18 सीटें, समाजवादी पार्टी के पास 5 सीटें, कांग्रेस के पास 3 सीटें और बीजेपी के पास 2 सीटें है. ऐसे में सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद इस्लाम पार्टी को मेयर बनाने के लिए दूसरे दलों के समर्थन की जरूरत होगी, क्योंकि वह बहुमत के आंकड़े 43 से पीछे है. पार्टी को अपना मेयर बनाने के लिए 12 पार्षदों की जरूरत पड़ेगी.
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