- शुभेंदु अधिकारी ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा बढ़ाने के लिए 600 एकड़ से ज्यादा जमीन देने का फैसला किया है
- सीमा सुरक्षा बल को जमीन देने की अनुमति मिलने से भारत-बांग्लादेश सीमा की फेंसिंग को मजबूती मिलेगी
- सरकार ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर के आसपास 120 एकड़ जमीन राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए इस्तेमाल करने की मंजूरी दी है
पश्चिम बंगाल में सरकार बदलते ही, अब वह सब होने लगा है जिसकी मांग बीजेपी करती आ रही थी. पश्चिम बंगाल की शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर सुरक्षा बढ़ाने के लिए अहम फैसला लिया है. शुभेंदु सरकार ने सीमा से सटे जिलों में केंद्र सरकार की जमीन से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने का फैसला लिया है.
सूत्रों के मुताबिक, कैबिनेट की बैठक में इसे लेकर चर्चा हुई. नई चुनी गई शुभेंदु अधिकारी सरकार ने पश्चिम बंगाल के 9 जिलों में फैली 2,200 किलोमीटर लंबी सीमा पर फेंसिंग को मजबूत करने के लिए, एक महीने के अंदर 600 एकड़ से ज्यादा जमीन देने पर विचार किया है.
2200 किलोमीटर में से लगभग 1600 किलोमीटर पर पहले से ही फेंसिंग लगी है लेकिन अभी भी बहुत काम किया जाना बाकी है.
कब तक मिल जाएगी जमीन?
दिलचस्प बात यह है कि इस कदम का तुरंत असर दिखेगा. पहले की ममता बनर्जी सरकार के समय से कई अनुमतियां अटकी हुई थीं. उस सरकार ने केंद्रीय बलों खासकर सीमा सुरक्षा बल (BSF) को जमीन देने से बार-बार इनकार किया था. BSF ही भारत-बांग्लादेश की सीमा पर सुरक्षा संभालती है.
बीजेपी ने अपने घोषणापत्र में वादा किया था कि किसी भी तरह की अवैध घुसपैठ को रोकने के लिए तुरंत कदम उठाए जाएंगे. टीएमसी सरकार के दौरान राज्य प्रशासन की ढिलाई के कारण ऐसी घुसपैठ काफ़ी बढ़ गई थी. उम्मीद है कि अगले कुछ हफ्तों में BSF के DG और राज्य सरकार के बीच समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद यह फैसला आधिकारिक तौर पर लागू हो जाएगा.
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कहां मिलेगी जमीन?
सूत्रों ने बताया कि फिलहाल पश्चिम बंगाल सरकार ने उत्तरी बंगाल में 'चिकन नेक' इलाके या सिलीगुड़ी कॉरिडोर के आस-पास 120 एकड़ जमीन के इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है. इस जमीन का इस्तेमाल राष्ट्रीय हित में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए किया जाएगा.
NHAI को भी मिलेगी जमीन
पश्चिम बंगाल सरकार ने सैद्धांतिक रूप से इस बात को मंजूरी दे दी है कि राज्य के लोक निर्माण विभाग (PWD) के NH विंग के तहत आने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों के सात हिस्सों को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और राष्ट्रीय राजमार्ग और बुनियादी ढांचा विकास निगम लिमिटेड (NHIDCL) को सौंप दिया जाए.
सरकार की ओर से जारी नोटिफिकेशन में साफ तौर पर कहा गया है कि ये प्रस्ताव लगभग एक साल से राज्य सरकार के पास लंबित थे. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के बार-बार अनुरोध करने के बावजूद, औपचारिक रूप से जमीन न सौंपे जाने के कारण इन हिस्सों पर विकास कार्य रुके हुए थे.
इस मंजूरी के साथ, राज्य सरकार ने संबंधित केंद्रीय एजेंसियों के लिए इन सभी सात हिस्सों पर विकास कार्य शुरू करने का रास्ता साफ कर दिया है. इससे इस क्षेत्र में कनेक्टिविटी भी मजबूत होगी. इसका सीधा असर सिक्किम, भूटान और बांग्लादेश को उत्तरी बंगाल से जोड़ने वाले लिंक पर पड़ेगा, और राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क भारत-बांग्लादेश सीमा के साथ-साथ मालदा, मुर्शिदाबाद, नदिया और उत्तरी 24 परगना के रास्ते राज्यों के बीच की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगा.
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