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सच हुई भविष्यवाणी... जब पीएम मोदी ने कहा था- बिहार ने बंगाल में भाजपा की विजय का रास्ता बना दिया है, ये 6 मुद्दे टर्निंग प्वाइंट बने

West Bengal Election Result 2026: बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने महाविजय का जिस फार्मूले को पूरी कामयाबी से आजमाया था, वहीं रणनीति को बंगाल विधानसभा चुनाव में भी आजमाया गया. ये रणनीति पूरी तरह काम कर गई.

सच हुई भविष्यवाणी... जब पीएम मोदी ने कहा था- बिहार ने बंगाल में भाजपा की विजय का रास्ता बना दिया है, ये 6 मुद्दे टर्निंग प्वाइंट बने
Bengal Election Result News: बंगाल विधानसभा चुनाव परिणाम
नई दिल्ली:

Bengal Election Result Latest Update: बीजेपी ने पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजों से साबित कर दिया है कि वो अब सिर्फ उत्तर भारत की पार्टी नहीं है. पूरे पूर्वी भारत में भी अब भगवा लहरा रहा है. ओडिशा, बिहार के साथ अब बंगाल में भी भगवा लहराते दिख रहा है. यह भी कहा जा रहा है कि बिहार विधानसभा चुनाव से ही बीजेपी ने बंगाल फतह का रास्ता तैयार किया. कह सकते हैं बिहार का फार्मूला भी बंगाल में काम करते दिख रहा है. घुसपैठियों को बाहर निकालने, भय, भ्रष्टाचार के खिलाफ सुशासन मॉडल, महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों को मौजूदा सरकार के खिलाफ जमकर भुनाया गया. 

एसआईआर का मुद्दा

बिहार विधानसभा चुनाव के पहले कांग्रेस ने चुनाव आयोग द्वारा वोटर लिस्ट की समीक्षा के लिए एसआईआर का जो अभियान चलाया था, उसके खिलाफ वोट चोरी को मुद्दा बनाया था, लेकिन बीजेपी बैकफुट पर नहीं आई. उसने इसे घुसपैठियों को बाहर करने का जरिया बताया और आक्रामक तरीके से इस मुद्दे को चुनाव में भुनाया था. घुसपैठियों के खिलाफ बीजेपी असम से लेकर बंगाल तक आक्रामक रुख अपनाए रही और इस मुद्दे को ध्रुवीकरण के जरिये जनता ने हाथोंहाथ लिया. 

हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण से मुस्लिम कार्ड फेल हुआ

बीजेपी ने घुसपैठियों के खिलाफ अभियान और मुस्लिम तुष्टीकरण को बड़ा मुद्दा बिहार में बनाया था. बिहार में 20 फीसदी से ज्यादा मुस्लिम वोट होने के बावजूद एनडीए 200 सीटों के आंकड़े को पार कर गया था. बिहार से सटे बंगाल के इलाकों में भी ये सियासी संदेश पहुंचा था. मुस्लिम कार्ड के खिलाफ हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण से नतीजे पूरी तरह उलट गए, जबकि बंगाल में करीब 100 सीटों पर मुस्लिम वोट 20 से 40 फीसदी तक है.  

मोदी की छह गारंटी

बिहार चुनाव के ठीक पहले बीजेपी-जेडीयू गठबंधन ने 125 यूनिट मुफ्त बिजली देने के साथ महिलाओं को 10 हजार रुपये सहायता की रोजगार योजना को पेश किया. बीजेपी का ये महिला कार्ड काम कर गया. शराबबंदी जैसे मुद्दों पर पहले ही महिला वोटर एनडीए के साथ था और इन योजनाओं ने रुख पूरी तरह से बीजेपी-जेडीयू की ओर मोड़ दिया. सीमा पार घुसपैठ को रोकने और 45 दिनों के भीतर सीमा पर 100% बाड़बंदी का लक्ष्य रखा गया है.

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भय, भ्रष्टाचार और गुंडाराज के खिलाफ 

भाजपा ने उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के खिलाफ और फिर बिहार में राजद के 15 साल के शासन में कथित गुंडाराज के मुद्दे को पूरी तरह भुनाया था. महिलाओं के बीच जाकर बीजेपी-जेडीयू ने लालटेन युग और लालू प्रसाद यादव के शासन में कानून-व्यवस्था को जनता की यादों से धूमिल नहीं होने दिया. यही कार्ड बंगाल में भी बीजेपी ने पूरी आक्रामकता से खेला. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और सुवेंदु अधिकारी ने भय, भ्रष्टाचार का शासन खत्म करने के साथ सिंडिकेट, कट मनी और टीएमसी वर्कर के कथित गुंडाराज का मुद्दा उठाकर बीजेपी को सत्ता मिलने पर सुशासन का वादा बार-बार दोहराया. महिलाओं के बीच इसका बड़ा संदेश गया. संदेशखाली, आरजीकर मुद्दे को भी महिला सुरक्षा के मुद्दे से जोड़कर टीएमसी को बीजेपी ने घेरा.

महिला वोट भी ममता से खिसका

बंगाल चुनाव के पहले चरण में 93 फीसदी और दूसरे चरण में 90 फीसदी मतदान हुआ. लेकिन बीजेपी ने महिला कार्ड का ब्रह्मास्त्र भी छीन लिया. गरीब महिलाओं के लिए 3000 प्रति माह देने का वादा किया था. आरजी कर केस तो ध्यान में रखते हुए महिला सुरक्षा के लिए एक समर्पित पुलिस दस्ता और दुर्गा सुरक्षा बल गठन का वादा किया था. गर्भवती महिलाओं के लिए 21,000 की सहायता, बसों में मुफ्त यात्रा और सरकारी नौकरियों में 33% आरक्षण का संकल्प किया था. सरकारी कर्मचारियों के लिए तत्काल प्रभाव से 7वां वेतन आयोग लागू करने का भरोसा दिया था.

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प्रवासियों में बेरोजगारी का मुद्दा 

भाजपा ने बिहार में 1 लाख सरकारी और 1 करोड़ रोजगार देने का वादा किया था. उसने वादा किया था बिहार से बड़े पैमाने पर हो रहे पलायन को रोकने के लिए सरकार काम करेगी. बंगाल में एसआईआर के बाद नाम कटने के डर से बड़े पैमाने पर प्रवासी मजदूर इस बार राज्य में लौटे थे. प्रवासी मजदूरों के बीच भी बेरोजगारी और पलायन बड़ा टर्निंग प्वाइंट बना. सिंगूर और नंदीग्राम जैसे इलाकों से औद्योगिक तालाबंदी जैसे हालातों को भी जोरशोर से उठाया गया. हुगली में आलू किसानों का संकट भी तृणमूल पर भारी पड़ा. 

बंगाल में गुटबाजी दूर कर एकजुट चेहरा दिखाया

पश्चिम बंगाल में बिहार की तरह बीजेपी ने एकजुट चेहरा दिखाया. बंगाल प्रदेश सौमिक भट्टाचार्य, पूर्व अध्यक्ष दिलीप घोष के अलावा नेता विपक्ष शुभेंदु अधिकारी जैसे स्थानीय नेताओं ने पूरी ताकत से स्थानीय मुद्दों पर फोकस किया. बीजेपी ने इसी रणनीति के तहत सीएम फेस भी बंगाल में घोषित नहीं किया था. 


 

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