Viral Video: मानसून की बेरुखी से परेशान किसान अब भगवान को मनाने के लिए पुराने टोटकों का सहारा ले रहे हैं. आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में सूखे जैसे हालात हैं. ऐसे में अच्छी बारिश की उम्मीद में कुर्लापल्ली गांव के लोगों ने पूरे रीति-रिवाज के साथ दो गधों की शादी कराई है. ग्रामीणों का मानना है कि इस पुरानी लोक परंपरा को निभाने से भगवान प्रसन्न होते हैं और इलाके में झमाझम बारिश होती है. खेतों में सूख रही फसलों को बचाने के लिए यह किसानों की एक अनोखी कोशिश है.
गाजे-बाजे के साथ निकाली गई बारात
वीडियो में देखा जा सकता है कि किस तरह गधों को रंग-बिरंगे गहनों और फूलों की मालाओं से सजाकर दूल्हा-दुल्हन बनाया गया है. इसके बाद पारंपरिक ढोल-नगाड़ों की थाप पर पूरे गांव में इनकी भव्य बारात निकाली गई है. बारात जिस भी घर के सामने से गुजरी, वहां महिलाओं ने मटकों से पानी डालकर इनका स्वागत किया और अच्छी फसल की प्रार्थना की. गांव के मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना भी की गई ताकि इलाके के तालाब और जलाशय जल्द से जल्द भर जाएं.
As monsoon rains remain elusive, farmers in #AndhraPradesh's drought-hit Rayalaseema region are turning to age-old traditions to seek divine blessings for rainfall. In Anantapur district, villagers performed symbolic frog and donkey weddings, taking the decorated animals in… pic.twitter.com/OmDl726YOf
— Ashish (@KP_Aashish) July 22, 2026
सूखे से निपटने की पुरानी प्रथा
आंध्र प्रदेश के रायलसीमा जैसे सूखाग्रस्त इलाके में पीढ़ियों से गधों की शादी कराने की यह प्रथा निभाई जाती रही है. स्थानीय किसानों का कहना है कि वे सिर्फ अपने बुजुर्गों की दी हुई परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं. उनका विश्वास है कि इस अनुष्ठान से दैवीय आशीर्वाद मिलता है. विज्ञान से भले ही इसका कोई लेना-देना न हो, लेकिन यह टोटका मानसून पर किसानों की निर्भरता और उनकी बेबसी को साफ दिखाता है.
खरीफ की बुआई धीमी, फसलों पर खतरा
इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून ने आंध्र प्रदेश के किसानों को काफी निराश किया है. मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के मुताबिक, अनंतपुर समेत कई जिलों में सामान्य से काफी कम बारिश हुई है. बारिश में देरी की वजह से खरीफ की बुवाई धीमी पड़ गई है और खेतों में खड़ी फसलें भी पानी के बिना सूखने लगी हैं. किसानों को डर है कि अगर जल्द ही अच्छी बारिश नहीं हुई, तो उनकी पैदावार पर बहुत बुरा असर पड़ेगा और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा.
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