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'हमें भारतीयता का भाव बनाकर रखना होगा, भारत विविधता का देश है', नागपुर में बोले मोहन भागवत

आरएसएस चीफ भागवत ने कहा कि विज्ञान और तकनीक की प्रगति को रोका नहीं जा सकता. इनका स्वागत तो किया जाना चाहिए, लेकिन यह समझना भी जरूरी है कि ये सिर्फ एक टारगेट तक पहुंचने का साधन हैं.

'हमें भारतीयता का भाव बनाकर रखना होगा, भारत विविधता का देश है', नागपुर में बोले मोहन भागवत
नागपुर में विजयदशमी उत्सव (Photo: Screengrab)
नागपुर:

महाराष्ट्र के नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस के विजयादशमी समारोह में मोहन भागवत ने कहा कि भारतीय संविधान में हमारी जो 'हम' भावना है, वो हमारा भावनात्मक बंधन है, जिससे इतनी सारी विविधताओं से भरा हुआ देश प्राचीन समय से एक राष्ट्र के रूप में चलता आया है. हमें भारतीयता का भाव बनाकर रखना होगा. आरएसएस चीफ भागवत ने कहा, "संघ के कार्य, जो 100 वर्षों से चल रहे हैं, वे 'स्व' को जगाने का काम करते हैं. इसी 'स्व' की भावना के आधार पर, भारत को एकजुट और मजबूत बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं."

उन्होंने आगे कहा कि अपना भारत विविधता का देश है. हर तरह की विविधता है. हमें ऐसा आधारभूत तत्व चाहिए, जो इन सबको संभाल लेगा. सौभाग्य से ऐसा विचार परंपरा से हमारे पास है, जो सनातन काल से चली आ रही है. हम इसको भूल गए तब हमारा पतन हुआ, हम विभाजित हो गए और दुर्बल हो गए. 

अनेक बलिदानों के बाद हम एकता और प्रगति की राह पर चल पड़े हैं, तो हमारे भावनात्मक बंधन को फिर से स्मरण करना पड़ेगा. उसको समझना पड़ेगा कि वो क्या है. 

मोहन भागवत

RSS चीफ
भागवत ने आगे कहा कि देश के स्वाधीनता के समय जो वातावरण था, उसमें आजादी का प्रयास करने वाले समाज को जितनी तपस्या करना पड़ा, उससे कहीं ज्यादा हमें करनी पड़ेगी. 

विकास और क्लाइमेट पर क्या बोले भागवत?

मोहन भागवत ने दुनिया भर में चल रहे जलवायु संकट पर भी अपनी बात रखी. इस दौरान उन्होंने नेपाल में हाल ही में आई अचानक बाढ़ का जिक्र किया, जिसमें इस अगस्त के महीने में सैकड़ों लोगों की जान चली गई थी. विकास और जलवायु परिवर्तन के बीच संतुलन बनाने की वकालत करते हुए उन्होंने कहा कि विकास से जुड़े काम 'सतत विकास' को ध्यान में रखकर किए जाने चाहिए.

भागवत ने कहा कि विज्ञान और तकनीक की प्रगति को रोका नहीं जा सकता. इनका स्वागत तो किया जाना चाहिए, लेकिन यह समझना भी जरूरी है कि ये सिर्फ एक टारगेट तक पहुंचने का साधन हैं. उन्होंने कहा, "केवल भौतिकवाद ही समस्याओं को जन्म दे सकता है. हमने हिमालय में 'विकास' कार्यों की वजह से नेपाल में आई तबाही को देखा है." 

मोहन भागवत ने कहा, "आगे बढ़ने का सही रास्ता 'सतत विकास' ही है. विकास इतना महंगा नहीं होना चाहिए कि हम खुद ही जीवित न बचें."

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