राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सहित देश के कई इलाकों में बढ़ता प्रदूषण एक बड़ी समस्या बनती जा रही है. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के सदस्य सचिव अरविंद नौटियाल ने प्रदूषण को लेकर एनडीटीवी से खास बातचीत की. उन्होंने कहा कि अक्टूबर से जनवरी तक के क्लाइमेटिक कंडीशन और मेटेरियोलॉजिकल कंडीशन थोड़ी खराब हो जाती हैं. लेकिन हमारे किए गए प्रयासों से प्रदूषण कंट्रोल में आया है.
अरविंद नौटियाल ने कहा कि हमने इसको लेकर कई एक्शन लिए हैं. जिसमें इंडस्ट्रीज में क्लीन फ्यूल का यूज होना शामिल है. इसको लेकर 1 जनवरी 2023 की डेडलाइन रखी थी. दिल्ली एनसीआर के 8 हजार में 3 हजार इंडस्ट्रीज जो डीजल यूज करते थे, उनको क्लीनर फ्यूल पर शिफ्ट किया है. इससे सुधार देखने को मिला है.
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अरविंद नौटियाल ने बताया कि 2018 से लेकर अब तक के अक्टूबर में इस साल AQI बेहतर हुआ है. तीन मौकों पर ही हम इस साल अक्टूबर में 'AQI बहुत खराब' में पहुंची है. पहले 'बहुत खराब' 6 से 7 दिनों तक औसतन रहता था. तो अब तक का बेस्ट एवरेज इस अक्टूबर में रहा है.
उन्होंने बताया कि पराली जलाने की स्थिति भी पहले से बेहतर हुई है. पराली के ट्रेंड में कमी आई है. अक्टूबर के पुराने वक्त से 55% कम पराली जलाने की घटना रिपोर्ट हुई है. साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि 80 हजार पंजाब के फायर इंसीडेंट 2021 में घटकर 70 हजार, 2022 में 50 हजार हुए. इस साल हमारा टारगेट 25 हजार के अंदर रखने का है.
नौटियाल ने बताया कि स्टबल और इंडस्ट्रीज को लेकर राज्यों से अब तक हमने पंजाब, हरियाणा और यूपी से 7 बार रिव्यू मीटिंग की है. GRAP को लेकर भी समय-समय पर रिवाइज किया जाता है. पिछले साल GRAP 4 लगाने की नौबत नहीं आई थी. प्रयास से ही ये संभव हो पाया है. वहीं इस बार भी कोशिश रहेगी कि GRAP 3 देरी से लगे और नौबत GRAP 4 की ना आए.
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