- धराली गांव सैलाब की भेंट चढ़ चुका है. हर तरह तबाही के निशान हैं, जो त्रासदी की भयावहता बता रहे हैं.
- सैकड़ों लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है. बहुत से लोग अब भी फंसे हैं और राहत के इंतजार में हैं.
- NDTV की टीम तबाही और दर्द की कहानियां सामने लाने के लिए, जान जोखिम में डालकर धराली पहुंच गई है.
उत्तरकाशी की धराली गांव सैलाब की भेंट चढ़ चुका है. हर तरह तबाही के निशान हैं, जो चीख-चीखकर इस त्रासदी की कहानी कह रहे हैं. सैकड़ों लोगों को बचाकर सुरक्षित निकाला जा चुका है. सैकड़ों लोग अब भी फंसे हुए हैं. बहुत से लोग लापता हैं, जिनकी दिन-रात तलाश चल रही है. लापता लोगों के परिजन खुद भी अपने प्रियजनों को ढूंढने के लिए निकल पड़े हैं. तबाही के आलम और लोगों के दर्द की कहानियों को सामने लाने के लिए एनडीटीवी की टीम जान जोखिम में डालकर धराली पहुंच गई है. ग्राउंड जीरो पर एनडीटीवी के रिपोर्टर किशोर रावत ने इस सैलाब को अपने आंखों से देखने और उसका दर्द सहने वाले लोगों से बात की है.
जान जोखिम में डालकर पहुंचे धराली
धराली तक पहुंचने के रास्ते ठप हो चुके हैं. रास्ता बनाने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है. रस्सियों पर लटक-लटककर टूटा पुल तैयार किया जा रहा है. इस बीच एनडीटीवी की टीम अपनी जान जोखिम में डालकर धराली तक पहुंचने में कामयाब हो गई है. ऊंची-ऊंची चढ़ाई, फिसलन भरी खाई और कठिन जंगली रास्तों को पार करके एनडीटीवी रिपोर्टर किशोर रावत जब धराली पहुंचे तो वहां हर जगह तबाही के निशान नजर आए.
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ऊंची चढ़ाई, फिसलन भरी खाई, कठिन रास्ते पार कर धराली पहुंचा NDTV #UttarkashiCloudburst | #DharaliTragedy | @RawatKishor3 pic.twitter.com/C6XiGlyr41
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दो मंजिला रिजॉर्ट बना मिट्टी का ढेर
धराली में दो मंजिला शानदार रिजॉर्ट अब मिट्टी का ढेर बन चुका है. उसकी पहली मंजिल तक मलबा और मिट्टी भर गई है. एक होटल मालिक दुर्गेश पवार ने एनडीटीवी को बताया कि धराली गांव गंगोत्री धाम के पर्यटन का हब था. 5 तारीख की प्रलय में पूरा गांव खत्म हो गया है. मेन बाजार का नामोनिशान मिट चुका है. उन्होंने बताया कि यहां पर 60-70 होटल और 50-60 घर थे. सब पूरी तरह तबाह हो गया है.
जहां आया सैलाब वहां पहुंचा NDTV
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क्या वापस बस पाएगा धराली गांव, देखिए क्या बोले स्थानीय लोग ?#UttarkashiCloudburst | #DharaliTragedy | @RawatKishor3 pic.twitter.com/pPLJvhn05R
भाई की तलाश में निकल पड़ी बहन
किसी का भाई, किसी की बहन और किसी के माता-पिता, धराली आपदा में कई जिंदगियां गुम हो गई हैं. इनकी तलाश में लोग दूर-दूर से आ रहे हैं. ऐसी ही एक महिला से एनडीटीवी रिपोर्टर मीनाक्षी कंडवाल ने बात की. वह अपने भाई को ढूंढने के लिए धराली जा रही हैं. महिला ने बताया कि उनका 28 साल का भाई दीपक राणा गाड़ी लेकर धराली आया था. पापा ने उसे घर जाने के लिए कहा, लेकिन वह कुछ देर रुक गया.
भावुक कर देगा भाई-बहन का ये प्यार..
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धराली हादसे में गायब हुआ भाई, बहन तलाश के लिए हुई रवाना, बताया आखिरी बार क्या हुई थी बात #DharaliTragedy | #UttarkashiCloudburst | @MinakshiKandwal pic.twitter.com/EDKdUld379
महिला ने बताया कि बस इसी बीच सैलाब आया और उसके बाद से दीपक का कुछ अता-पता नहीं है. आंखों में आंसू रोकते हुए महिला ने बताया कि भाई का ससुर और कई अन्य रिश्तेदार भी लापता हैं. खुद उसके पापा और परिवार के कई लोग ऊपर पहाड़ पर फंसे हुए हैं. महिला अकेली नहीं है, उसके जैसे कई अन्य लोग भी अपनों की तलाश में धराली जा रहे हैं.
पैदल ही घर तक पहुंचने के लिए निकले लोग
धराली और हर्षिल घाटी में फंसे लोगों को निकालने के लिए वैसे तो प्रशासन ने हेलीकॉप्टरों का इंतजाम किया है, लेकिन कुछ लोग अपने ठिकानों तक जाने के लिए पैदल ही निकल पड़े हैं. ऐसे ही तीन लोगों से एनडीटीवी रिपोर्टर रवीश रंजन शुक्ला ने बात की. अरविंद नाम के शख्स ने बताया कि गंगोत्री से 5 तारीख को जैसे ही वह निकला, 10 मिनट बाद ही सैलाब आ गया.
धराली में जिंदगी की तलाश, स्थानीय लोगों ने बताई अपनी दिक्कतें #DharaliTragedy | #UttarkashiCloudburst | @ravishranjanshu pic.twitter.com/D3EH8TPcXo
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50 फुट ऊंचे मंदिर तक मलबा भरा
अरविंद ने बताया कि हर्षिल में सड़क पर पत्थर बहने लगे थे तो वह आगे बढ़ गए. आधा घंटे बाद वापस आए तो नजारा ही बदल चुका था. जहां चाय पी थी, वो दुकान तक बह गई थी. उन्होंने बताया कि करीब 50 फुट ऊपर एक मंदिर था. अब उस मंदिर के बराबर तक मलबा भर गया है. अरविंद का आरोप है कि कई लोगों को यह कहकर हेलीकॉप्टर सुविधा नहीं दी गई कि यह लोकल लोगों को लिए नहीं है.
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