- पहला मामला चमोली के कर्णप्रयाग का है, जहां पार्किंग को लेकर स्थानीय लोगों के साथ निहंगों के बीच विवाद हुआ.
- दूसरा मामला रुद्रप्रयाग के नगरासू का है. जहां एक गुरुद्वारे पर निहंगों ने कब्जे किया.
- नगरासू मामले को खालिस्तान से जोड़कर सोशल मीडिया पर दिखाया गया. दोनों विवादों की पूरी कहानी जानिए.
Uttarakhand Nihang Disputes: उत्तराखंड में चल रही चारधाम यात्रा के बीच कर्णप्रयाग और नगरासू से निहंगों से जुड़े दो विवाद सामने आए. जमीन पर अब दोनों विवाद शांत हो चुके हैं. लेकिन सोशल मीडिया पर इन दोनों विवादों के जोड़ते हुए माहौल बिगाड़ने की कोशिशें जारी है. इस बीच उत्तराखंड पुलिस ने भी सोशल मीडिया पर चल रही चर्चा का जवाब दिया है. पुलिस ने अपने बयान में साफ कहा कि इन दोनों मामलों में कोई संबंध नहीं है. दोनों अलग-अलग घटनाएं है. लेकिन फिर भी सोशल मीडिया पर दोनों मामलों को साथ में जोड़ा जा रहा है.
श्री हेमकुंड साहिब की यात्रा के बीच निहंगों के दो विवाद
चारधाम यात्रा के बीच इन दिनों उत्तराखंड में सिखों के पवित्र धाम श्री हेमकुंड साहिब की यात्रा भी चल रही है. जिसमें देश-विदेश से सिख भक्त श्री हेमकुंड साहिब में दर्शन करने पहुंच रहे हैं. इस बीच राज्य के दो अलग-अलग जगहों से निहंगों से जुड़े दो विवाद सामने आए.
कर्णप्रयाग पार्किंग विवादः निहंगों की गिरफ्तारी से भड़का गुस्सा
पहला मामला चमोली जिले के कर्णप्रयाग का है, जहां पार्किंग को लेकर स्थानीय लोगों के साथ निहंगों के बीच विवाद हुआ. मामला मारपीट में बदला, दोनों पक्ष के लोग घायल हुए. चमोली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कुछ निहंगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया.
लेकिन यह मामला इतना ही नहीं था, इस मामले के बाद सोशल मीडिया में विरोध शुरू हो गया, कई विभिन्न सिख संगठन इसके विरोध में आ गए. सिख संगठनों ने कर्णप्रयाग मामले में मुख्यमंत्री, डीजीपी से मुलाकात कर अपनी तीन प्रमुख मांगें रखी.
- 1. इस मामले में क्रॉस एफआईआर दर्ज नहीं की गई है.
- 2. चमोली पुलिस की जगह दूसरे अन्य जिले की पुलिस से करवाई जाए.
- 3. पुलिस का रवैया निंदनीय है, क्योंकि पुलिस ने सिख निहंगों को बिना पगड़ी के कोर्ट में पेश किया.
सिख संगठनों की मांग को देखते हुए राज्य सरकार ने तीनों मांगें मान ली. राज्य सरकार ने इस पूरे मामले में जांच हरिद्वार SSP के नेतृत्व में जांच होगी. दूसरा इस मामले में क्रॉस FIR दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं. इसके अलावा पुलिस ने सिख निहंगों को बिना पगड़ी के कोर्ट में पेश किया, उसकी जांच DIG लेवल के अधिकारी को दी गई. जांच रिपोर्ट 15 दिन के अंदर मांगी गई.
सीएम से मिलकर सिख कमेटी के अध्यक्ष ने की जांच की मांग
दिल्ली गुरुद्वारा सिख मैनेजमेंट कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर्णप्रयाग मामले में मुलाकात कर इस मामले की निष्पक्ष जांच करने की मांग की. हरमीत सिंह कालका ने कहा कि इस मामले की जांच चमोली जिले दूसरे जिले की पुलिस से करवाई जाए.

रुद्रप्रयाग के नगरासू में गुरुद्वारा प्रबंधक और निंहगों में विवाद
दूसरा मामला रुद्रप्रयाग के नगरासू का है. जहां एक गुरुद्वारे पर निहंगों ने कब्जे किया. इस पूरे मामले में यह बताया जा रहा है कि निहंग नगरासू के गुरुद्वारे में पहुंचे और उन्होंने जब खाना खाने को लेकर कुछ विवाद हुआ जिसके बाद गुरुद्वारे के प्रबंधक ने उन्हें बाहर जाने को कहा लेकिन जब वह बाहर गए तब वहां पुलिस मौजूद थी.
ऐसे में निहंग गुस्से में आ गए और अंदर जाकर प्रबंधक के साथ फिर इन लोगों का विवाद हुआ. फिर उसके बाद उन्होंने वहां रखे सामान को इधर-उधर फेंका और गुरुद्वारे की छत पर जाकर कब्जा कर लिया. नगरासू गुरुद्वारे में विवाद की शुरुआत गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी और निहंगों के बीच हुए मतभेद से हुई.
नगरासू गुरुद्वारा विवाद में गुरुद्वारे की छत पर डटे पांचों निहंग सिख आखिरकार मान गए हैं। आज पंजाब से पहुंचे निहंग सिखों के प्रतिनिधिमंडल ने उनसे बातचीत की, जिसके बाद सभी निहंग छत से नीचे उतर आए और चार दिनों से जारी गतिरोध के बाद निहंग सिखों ने नगरासू गुरुद्वारा छोड़ दिया है।… pic.twitter.com/UzrWDFB5bs
— bhUpi Panwar (@askbhupi) June 23, 2026
गुरुद्वारे की तीसरी-चौथी मंजिल पर जाकर निहंगों ने जमाका डेरा
बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बनने पर मामला बढ़ा. गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी के अनुसार उनकी मांगें नहीं माने जाने पर निहंग तीसरी और चौथी मंजिल पर चले गए और अंदर से खुद को बंद कर लिया.
तीन दिन तक चलता रहा हंगामा, पंजाब से आए निहंगों ने समझाया तब माने
यह पूरी घटना कारण शनिवार 20 जून से 23 जून मंगलवार तक चला इसमें सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस को बुलाया गया और ITBP के जवान भी तैनात किए गए. काफी समझाने और काफी बातचीत करने पर यह नहीं माने. ऐसे में पंजाब से निहंग जत्था यहां पहुंचा. निहंगों से काफी देर बातचीत के बाद ऊपर चढ़े पांचों निहंग मान गए.

सोशल मीडिया पर दोनों घटनाओं को जोड़ा गया
साफ है कि ये दोनों विवाद अलग-अलग है. लेकिन सोशल मीडिया पर इसे एक साथ जोड़कर फैलाया गया. जिस पर उत्तराखंड पुलिस के IG गढ़वाल राजीव स्वरूप ने साफ इनकार किया. इस बीच 16 से 23 जून तक सोशल मीडिया पर अफवाहों का बाजार गर्म रहा. तरह-तरह के कमेंट और पोस्ट तैरते रहे.
अब सवाल यह उठता है कि प्रशासन और सरकार ने सोशल मीडिया पर क्यों नहीं सख्त कार्रवाई की? जिन लोगों ने इस तरह की अफवाहों को बल दिया, उन पर क्या कार्रवाई की गई.
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