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यूपी पंचायत चुनाव मई-जून में हो पाएंगे? ये 3 बड़ी अड़चनें, इलाहाबाद हाईकोर्ट पर टिकीं निगाहें

UP Panchayat Election News: उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव मई-जून में कराए जाने हैं, लेकिन अभी कई अड़चनें सामने आ रही हैं. इलाहाबाद हाईकोर्ट भी पंचायत चुनाव तय अवधि कराने के मामले में सुनवाई कर रहा है.

यूपी पंचायत चुनाव मई-जून में हो पाएंगे? ये 3 बड़ी अड़चनें, इलाहाबाद हाईकोर्ट पर टिकीं निगाहें
UP Panchayat Election Date: यूपी पंचायत चुनाव
लखनऊ:

UP Panchayat Election Date: उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव मई-जून में हो पाएंगे या नहीं, इसको लेकर पेंच फंसा हुआ है. वोटर लिस्ट, पिछड़ा वर्ग आयोग या आरक्षण की राह आसान नहीं होती दिख रही है. यूपी में पंचायत चुनाव को लेकर दायर जनहित याचिका पर आज इलाहाबाद हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई होने जा रही है.देखना होगा कि अदालत क्या आदेश देता है. इस मामले में राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से कोर्ट में जवाब दाखिल किया जा चुका है.यूपी पंचायत चुनाव वर्ष 2021 में हुए थे. ऐसे में ग्राम पंचायतों का कार्यकाल मई-जून में खत्म हो जाएगा. 

क्या विधानसभा चुनाव के बाद हो पाएंगे पंचायत चुनाव

यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार के मंत्री ओमप्रकाश राजभर और संजय निषाद ने भी संकेत दे दिया है कि पंचायत चुनाव अब 2027 के विधानसभा चुनाव के बाद ही संभव दिख रहे हैं. ओपी राजभर यूपी के पंचायतीराज मंत्री भी हैं. पंचायत चुनाव का मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट तक भी पहुंचा है. यूपी में ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को, जिला पंचायतों का 11 जुलाई और क्षेत्र पंचायतों का 19 जुलाई 2026 को समाप्त हो रहा है. लेकिन समय पर चुनाव न होने से यहां प्रशासकों को बैठाने की जरूरत पड़ेगी. 

हाईकोर्ट में पंचायत चुनाव पर सुनवाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा है कि क्या वो मई-जून में तय वक्त पर चुनाव करा पाएगा. इस पर बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई होगी. आयोग का कहना है कि वो अपनी ओर से चुनाव प्रक्रिया को तय समय में कराने का पक्षधर है. चुनाव आयोग प्रशासनिक और कानूनी अड़चनों को भी दूर करने के लिए सरकार के संपर्क में है. याचिकाकर्ता का कहना है कि पंचायतों का कार्यकाल आगे नहीं बढ़ाया जा सकता. पंचायत चुनाव में देरी से ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायतों का कामकाज प्रभावित होता है. विकास कार्यों में बाधा आती है और समस्याओं के निपटारे में आसानी होती है.

कहां कितनी सीटें

ग्राम पंचायत-57965
क्षेत्र पंचायत - 826
जिला पंचायत- 75 

यूपी की फाइनल वोटर लिस्ट

उत्तर प्रदेश की फाइनल वोटर लिस्ट अभी तक तैयार नहीं हो पाई है. यूपी में एसआईआर की ड्राफ्ट लिस्ट में करीब 3 करोड़ वोटर के नाम अलग किए गए थे. हालांकि मतदाताओं को और ज्यादा मोहलत देते हुए कई बार अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने की अवधि बढ़ाई गई. मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने कहा है कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी वोटर लिस्ट समीक्षा पूरी कर 10 अप्रैल को फाइनल वोटर लिस्ट जारी की जाएगी. यूपी में जनवरी में SIR की कार्यवाही शुरू हुई थी.

पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन

उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव आरक्षण तय करने के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग यानी ओबीसी कमीशन गठित किया जाना जरूरी है. ओबीसी कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर ही एससी-एसटी और ओबीसी रिजर्वेशन तय किया जाएगा. हालांकि पिछले ओबीसी कमीशन का तीन सालों का कार्यकाल पहले ही पूरा हो चुका है. नए आयोग को सभी 75 जिलों में आरक्षण तय करने में कई महीनों का वक्त लगता है.

आरक्षण प्रक्रिया में देरी

पिछड़ा वर्ग आयोग का सर्वे और रिपोर्ट जब तक पूरी नहीं होती तब तक ग्राम प्रधानों, BDC और जिला पंचायत सदस्यों की सीटों का आरक्षण फाइनल नहीं हो सकता.नए परिसीमन (Delimitation) और चक्रानुक्रम आरक्षण को लेकर स्पष्टता नहीं है.बिना आरक्षण सूची के चुनाव अधिसूचना जारी करना कानूनी रूप से संभव नहीं है.

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गुटबाजी का डर

यूपी पंचायत चुनाव में अक्सर एक ही राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ता आमने-सामने होते हैं, जिससे दलों में अंदरूनी कलह बढ़ सकती है. सरकार नहीं चाहती कि 2027 के बड़े चुनाव से ठीक पहले ग्रामीण स्तर पर कार्यकर्ताओं में नाराजगी पैदा हो.सरकार और पार्टियां अपना पूरा ध्यान और मशीनरी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में लगाना चाहती हैं. कई उम्मीदवारों के लिए नए नियमों जैसे दो बच्चों वाली नीति की अफवाहें या नो-ड्यूज सर्टिफिकेट को लेकर भी भ्रम की स्थिति बनी हुई है.

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अदालती पेंच भी अटका

हाईकोर्ट में चुनाव टालने या आरक्षण प्रक्रिया को लेकर कई याचिकाएं अटकी हैं. जब तक अदालत का रुख साफ नहीं होता, तब तक राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव की तारीखों का ऐलान करने में हिचकिचा रहा है. सरकार ने अगले 1-2 महीनों में पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट और आरक्षण सूची फाइनल नहीं की तो चुनाव 6 महीने से एक साल तक के लिए टल सकते हैं और गांवों में प्रशासक नियुक्त किए जा सकते हैं.
 

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