- यूपी चुनाव 2027 में बीजेपी के सामने हैट्रिक लगाने की चुनौती, सपा-कांग्रेस गठबंधन से मुख्य मुकाबला
- बीजेपी ने अपने विधायकों की लोकप्रियता का आंतरिक सर्वे कराया है, जनता का मूड भांपने के लिए
- बीजेपी अपने 255 विधायकों में आधे विधायकों के टिकट काट सकती है, चुनाव में इस बार
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अब छह महीने से भी कम वक्त बचा है. इस चुनाव में 10 साल से सत्तारूढ़ योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली भाजपा सरकार के सामने हैट्रिक लगाने की चुनौती है. भाजपा ने स्थानीय विधायकों के कामकाज और लोकप्रियता का सर्वे कराते हुए जनता का मूड भांपने की कोशिश की है. 2024 के लोकसभा चुनाव से लगे झटके से सबक लेकर भाजपा ने 403 विधानसभा सीटों पर एक गोपनीय और बहुस्तरीय आंतरिक सर्वे कराया है. इस सर्वे रिपोर्ट ने सत्ता के गलियारों में हड़कंप मचा दिया है.
भाजपा का आंतरिक सर्वे
सूत्रों की मानें तो इस सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, यूपी में करीब 125 से 128 मौजूदा विधायकों के खिलाफ उनके ही क्षेत्रों में जबर्दस्त एंटी इनकंबेंसी है. सीधे तौर पर कहें तो करीब भाजपा में 128 सीटों पर मौजूदा विधायकों के टिकट काटा या बदला जा सकता है. पश्चिम यूपी से लेकर पूरब तक मंत्रियों से लेकर दिग्गज विधायकों तक के नाम इस रेड लिस्ट में शामिल हैं. भाजपा यूपी को अपने संगठन के लिहाज से 6 क्षेत्रों में बांटती है. ऐसे में कहां किस क्षेत्र से कितने टिकट कट सकते हैं, ये आंकड़ा चौंकाने वाला है. यूपी विधानसभा चुनाव 2027 को 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले सेमीफाइनल माना जा रहा है.
- पश्चिम क्षेत्र की 71 सीटों में 23-25 टिकट कटने के आसार
- ब्रज क्षेत्र कुल 65 सीटों में 24-26 टिकट कटने की संभावना
- अवध क्षेत्र में कुल 82 सीट में 26-28 टिकट कटने का संकेत
- कानपुर क्षेत्र की कुल 52 सीट में 22-24 कटने के कयास
- काशी क्षेत्र में कुल 72 सीट में 19-21 का पत्ता कट सकता है
- गोरखपुर क्षेत्र की 62 सीटों में 18-22 टिकट कटने की संभावना
यूपी में भाजपा की हैट्रिक की चुनौती
भाजपा यूपी में हैट्रिक लगाने को पूरी ताकत झोंक रही है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले एक-डेढ़ महीने में ही राज्य के ज्यादातर जिलों का दौरा कर विकास परियोजनाओं की झड़ी लगा दी है.2022 की जीत की बात करें तो 1985 के बाद यूपी में यह पहला मौका था जब किसी मुख्यमंत्री और सत्तारूढ़ पार्टी ने लगातार दूसरी बार पूरे बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की थी. वहीं सपा-कांग्रेस गठबंधन 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों से उत्साहित है. अखिलेश यादव जहां पीडीए के सामाजिक समीकरणों पर ध्यान केंद्रित किए हैं, वहीं कांग्रेस दलित-मुस्लिम वोटों को एकजुट करके अपना जनाधार बढ़ाने में जुटी है.
2022 विधानसभा चुनाव में किसको कितनी सीटें
भारतीय जनता पार्टी (BJP)- 255
अपना दल (सोनेलाल)-1 2
निषाद पार्टी (NISHAD)- 06
एनडीए (NDA)- 273
कुल सीटें 403: बहुमत 202
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गठबंधन में सीटों का बंटवारा भी चुनौती
उत्तर प्रदेश में मोदी-योगी लहर को कायम रखते हुए भाजपा को अकेले 41.29% वोट मिले थे. भाजपा का पिछले चुनाव में अपना दल सोनेलाल, निषाद पार्टी जैसे दलों के साथ गठबंधन रहा है. अब एनडीए के खेमे में पश्चिमी उत्तर प्रदेश से राष्ट्रीय लोकदल शामिल है. एनडीए का सपा-कांग्रेस गठबंधन से मुख्य मुकाबला होना तय है. मायावती की बहुजन समाज पार्टी, आजाद समाज पार्टी, एआईएमआईएम जैसे दल भी ताल ठोकने को तैयार हैं.
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