Bank Strike Averted, But Treasury Loss Lingers: फाइव-डे बैंकिंग की मांग को लेकर 28 से 30 सितंबर तक होने वाली बैंक कर्मचारी यूनियन की हड़ताल तो टल गई, लेकिन इन प्रयासों में देश के करोड़ों रुपये खर्च हो गए. लगातार 3 दिन बैंक बंद रहने के चलते लोगों को परेशानी न हो, दूसरी छमाही एंडिंग पर देश का कामकाज प्रभावित न हो, इसलिए केंद्र ने सभी सरकारी बैंकों को रविवार को खुला रखने का फैसला लिया. इस फैसले के बाद देशभर में SBI, PNB, यूनियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा समेत सभी सरकारी बैंकों के 1.81 लाख बैंक शाखाएं खुली रहीं.
करीब 7.65 लाख बैंक अधिकारियों-कर्मचारियों में से ज्यादातर ने बैंकों में ड्यूटी की और इसके लिए उन्हें सैलरी के अलावा पैसे भी दिए जाएंगे. बैंककर्मियों को किए जाने वाले भुगतान के अलावा बैंक शाखाएं और ऑफिस को खुले रखने में बिजली, सर्वर, ट्रांसपोर्टिंग और तरह-तरह के ऑपरेटिंग खर्च भी हुए. सारे खर्च जोड़ें तो ये राशि करोड़ों में पहुंच जाती है.
हालांकि इस खर्च का कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है, लेकिन बैंक यूनियनों के अनुमान के मुताबिक, रविवार को बैंक खोलने पर केवल कर्मचारियों के भुगतान पर करीब 153 करोड़ रुपये का खर्च बैठ सकता है. इसमें बैंक की शाखाओं को चालू रखने की ऑपरेशनल लागत शामिल नहीं है.
काश... पहले बन जाती सहमति!
ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कन्फेडरेशन (AIBOC) के नेशनल प्रेसिडेंट आर शेखरन ने NDTV को बताया कि बैंक अधिकारियों को Out of pocket Expenses के तहत दिए जाने वाले 2,000 रुपये का प्रावधान, नाकाफी है. उन्होंने बताया कि इंडियन बैंक एसोसिएशन से एक दिन की सैलरी के बराबर राशि देने की मांग की गई है. यूनाइटेड बैंक फोरम की ओर से IBA से बैंक अधिकारियों के लिए एक दिन की सैलरी का प्रावधान करने की मांग की गई है.
फाइव-डे बैंकिंग और अन्य मांगों पर विचार के लिए आज 29 सितंबर, मंगलवार को हाई लेवल कमिटी भी गठित कर दी गई है, जिसमें SBI, PNB समेत अन्य बैंकों के टॉप अधिकारी और बैंक यूनियन के सदस्य शामिल हैं. अगर हड़ताल से पहले समय रहते कमिटी बनाने पर सहमति बन जाती, तो देश के 153 करोड़ रुपये से कहीं ज्यादा पैसे बच सकते थे.

SBI अधिकारियों को दो-दो हजार देगा, कर्मियों को कितना?
SBI के चीफ जनरल मैनेजर (CHR) की ओर से 25 सितंबर को जारी लेटर में कहा गया है कि 27 सितंबर, रविवार को शाखाओं और ऑफिस में नियमित ड्यूटी करने वाले अधिकारियों को 2,000 रुपये आउट ऑफ पॉकेट एक्सपेंस दिया जाएगा.
इसी लेटर के मुताबिक, रविवार को काम करने वाले अवार्ड स्टाफ को बाइपार्टाइट सेटलमेंट और बैंक के मौजूदा नियमों के तहत ओवरटाइम अलाउंस मिलेगा. यानी 2,000 रुपये का भुगतान अधिकारियों के लिए है, जबकि क्लेरिकल और सब-स्टाफ का भुगतान अलग नियमों के तहत होगा.
ओवरटाइम पर दोगुने भुगतान का नियम
बैंक यूनियन लीडर्स के मुताबिक, सरकारी बैंकों में 3.5 लाख क्लेरिकल स्टाफ और सब'स्टाफ काम करते हैं. नियमों के मुताबिक, ओवरटाइम पर दोगुना वेतन दिया जाना है. यानी सभी ने चूंकि पूरा एक दिन काम किया है तो सभी को 2 दिन की सैलरी मिलेगी.
अगर उनकी सैलरी 30 से 60 हजार रुपये के बीच हुई तो अनुमानित तौर पर 2 हजार से 4 हजार रुपये तक मिलेंगे. बैंक यूनियन का अनुमान है कि ये खर्च करीब 81 करोड़ रुपये तक जा सकता है.
153 करोड़ रुपये का अनुमान का गणित
बैंक यूनियन से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, देश में करीब 7.65 लाख बैंक अधिकारी-कर्मचारी हैं. इनमें लगभग 4.21 लाख अधिकारी और करीब 3.5 लाख क्लेरिकल स्टाफ व सब-स्टाफ हैं.
अगर करीब 3.6 लाख अधिकारी रविवार को ड्यूटी पर रहे और हर अधिकारी को 2,000 रुपये का आउट ऑफ पॉकेट एक्सपेंस मिला, तो सिर्फ इस मद में करीब 72 करोड़ रुपये का खर्च बैठता है.
इसके अलावा क्लेरिकल स्टाफ और सब-स्टाफ को रविवार के काम के लिए ओवरटाइम भुगतान करना होगा. बैंक यूनियन नेताओं के आकलन के मुताबिक, इस हिस्से में करीब 60-90 करोड़ रुपये का खर्च हो सकता है.
इस तरह दोनों मदों को मिलाकर कुल अनुमानित खर्च 132-162 करोड़ रुपये के बीच बैठता है. यूनियन से जुड़े आकलन के मध्य अनुमान के आधार पर इसे करीब 153 करोड़ रुपये माना जा रहा है.
हालांकि, 153 करोड़ रुपये कोई आधिकारिक ऑडिटेड आंकड़ा नहीं है. ये उपलब्ध कर्मचारी संख्या, भुगतान और यूनियन के आकलन के आधार पर निकाला गया अनुमान है.
बैंक शाखाओं के ऑपरेशनल खर्च अलग से
रविवार को बैंक खोलने का खर्च सिर्फ कर्मचारियों के भुगतान तक सीमित नहीं है. देश में करीब 1.81 लाख बैंक शाखाएं हैं. इन्हें रविवार को चालू रखने के लिए बिजली, सर्वर, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और दूसरी तकनीकी व्यवस्थाओं पर भी खर्च होता है.
इसके अलावा एटीएम में कैश भरने के लिए कैश ट्रांसपोर्ट और एजेंसी की सेवाओं की जरूरत पड़ती है. इन खर्चों को जोड़ने पर रविवार को बैंक खोलने की वास्तविक लागत 153 करोड़ रुपये के अनुमान से ज्यादा हो सकती है.
फाइव-डे बैंकिंग पर आखिरी दिन बनी हाई लेवल कमेटी
फाइव-डे बैंकिंग की लंबे समय से चली आ रही मांग पर आखिरी दिन बड़ा डेवलपमेंट हुआ. ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कॉन्फेडरेशन के अध्यक्ष आर शेखरन के मुताबिक, इंडियन बैंक एसोसिएशन (IBA) ने हाई लेवल कमेटी गठित कर दी है.
इस कमेटी में यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के प्रतिनिधि भी शामिल हैं. कमेटी सभी स्टेकहोल्डर्स से बात कर फाइव-डे बैंकिंग की मांग की समीक्षा करेगी. बैंक यूनियन की मुख्य मांग सभी बैंकों में हफ्ते में पांच दिन काम लागू करने की है.
एक अन्य यूनियन के अधिकारी ने कहा कि करीब 8 लाख बैंक अधिकारी-कर्मचारियों के तीन दिन की देशव्यापी हड़ताल में शामिल होने का अनुमान था. हड़ताल से 1.81 लाख से ज्यादा बैंक शाखाएं प्रभावित हो सकती थीं. अगर बातचीत से एक दिन पहले ही समाधान निकल जाता, तो रविवार को बैंक खोलने पर कर्मचारियों के भुगतान का करीब 153 करोड़ रुपये का अनुमानित अतिरिक्त खर्च और इसके ऊपर होने वाली ऑपरेशनल लागत से बचा जा सकता था.
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