दिल्ली में उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना ने आज अहम बैठक बुलाई है. इस मीटिंग में सभी 9 लोकसभा सांसदों को बुलाया गया है. 'ऑपरेशन टाइगर' की चर्चाओं के बीच यह बैठक बुलाई गई है, जिसके तहत कहा जा रहा है कि उद्धव ठाकरे गुट के 6 सांसद छोड़ सकते हैं. फिलहाल उद्धव गुट का दावा है कि इन 6 में से दो सांसद उसके ही पक्ष में आ गए हैं और उनके टूटने की संभावना नहीं है. ऐसे में दो तिहाई सांसद अलग नहीं होंगे और पार्टी टूटने से बच जाएगी. वहीं अब तक कयासों का दौर जारी है कि आखिर कौन-कौन इस मीटिंग में पहुंचेगा.
शिवसेना की 11 बजे होने वाली इस बैठक से काफी कुछ स्पष्ट हो जाएगा कि कौन किसके साथ है. यदि UBT शिवसेना की मीटिंग में 6 सांसद नहीं पहुंचे तो फिर क्लियर हो जाएगा कि उद्धव ठाकरे नए संकट में घिर गए हैं.
आइए जानते हैं, कौन हैं वे 6 सांसद, जिन्होंने उड़ा दी है उद्धव ठाकरे सेना की नींद...
उद्धव के करीबी रहे निंबालकर भी बागी
मराजे निंबालकर धाराशिव के सांसद हैं और दिवंगत कांग्रेस नेता पवनराजे निंबालकर के पुत्र हैं. वे लंबे समय से उद्धव ठाकरे के कट्टर समर्थक और वफादार माने जाते रहे थे. धाराशिव क्षेत्र में उनका अपना मजबूत जनाधार है. ओमराजे निंबालकर मराठवाड़ा के प्रमुख नेता हैं और धाराशिव से दो बार के सांसद हैं. वे 2009 से 2014 तक विधायक भी रह चुके हैं. ग्रामीण महाराष्ट्र के युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता है. बीते रविवार को मातोश्री पर बुलाई गई बैठक में उन्होंने भाग नहीं लिया बल्कि पारिवारिक कारणों का हवाला देकर खुद को दूर रखा. उनके पार्टी छोड़ने के पीछे मुख्य कारण के तौर पर विपक्षियों ने दावा किया की पिता संबंधी अदालती मामलों में सुरक्षा की उम्मीद के कारण उन्होंने ये कदम उठाया.
मराठवाड़ा का बड़ा चेहरा संजय जाधव
संजय जाधव परभणी से सांसद हैं और मराठवाड़ा क्षेत्र में शिवसेना का एक बड़ा चेहरा रहे हैं. वे वर्षों से पार्टी के सांगठनिक ढांचे में सक्रिय रहे हैं और उद्धव ठाकरे के विश्वासपात्र माने जाते थे. वे परभणी से लगातार तीन बार लोकसभा चुनाव जीतकर अपनी पकड़ साबित कर चुके अनुभवी नेता हैं. वे 2004 से 2014 तक विधायक भी रहे हैं. जाधव मराठवाड़ा क्षेत्र में शिवसेना के आक्रामक चेहरे और उप-नेता के रूप में सक्रिय रहे हैं. पिछले कुछ समय से वे पार्टी की गतिविधियों से उदासीन बताए गए। मातोश्री की बैठकों में नदारद रहे हैं.
संजय देशमुख का भी बागी रुख
संजय देशमुख ने यवतमाल-वाशिम क्षेत्र से अपनी पहचान बनाई है. वे पार्टी की जमीनी रणनीति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं. विदर्भ क्षेत्र के एक बड़े राजनीतिक खिलाड़ी हैं. वे 1999 से 2009 तक दो बार निर्दलीय विधायक रहे और 2002-2004 के बीच महाराष्ट्र के खेल मंत्री भी रहे.
पहली बार के सांसद नागेश पाटिल
हिंगोली के सांसद नागेश पाटिल पार्टी के वफादार रहे हैं और उन्होंने क्षेत्र के विकास के लिए हमेशा उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में काम किया. वह पहली बार के लोकसभा सांसद हैं. इससे पहले वह 13वीं महाराष्ट्र विधानसभा में विधायक रह चुके हैं. एमकॉम की शिक्षा प्राप्त नागेश पाटिल का नांदेड़ और हिंगोली क्षेत्रों में गहरा सांगठनिक प्रभाव है. उन्होंने भी मातोश्री की हालिया बैठकों से किनारा कर लिया था.
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शिरडी के सांसद पहले भी बदल चुके हैं पाला
भाऊसाहेब वाकचौरे शिरडी के सांसद हैं. वह पहले भी दलबदल के लिए चर्चा में रहे हैं. शिरडी का प्रतिनिधित्व करने वाले वाकचौरे दो बार के सांसद हैं। वे सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी हैं और सार्वजनिक प्रशासन व नियोजन समितियों में सक्रिय रहे हैं. सरकारी तंत्र के साथ बेहतर तालमेल बिठाने के लिए वे लगातार पार्टी से दूरी बनाए हुए हैं और बैठकों में भी अनुपस्थित रहे हैं.
क्या पलट गए हैं संजय दीना पाटिल
संजय दीना पाटिल मुंबई के एक प्रभावशाली नेता हैं। एनसीपी छोड़कर शिवसेना में शामिल हुए पाटिल हमेशा अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के लिए जाने जाते हैं। मुंबई के एक मजबूत राजनीतिक परिवार से आने वाले संजय दीना पाटिल दो बार के सांसद हैं। एनसीपी में रहने के बाद वह 2019 में अविभाजित शिवसेना में शामिल हुए थे। उनके पिता दीना बामा पाटिल एक सम्मानित ट्रेड यूनियन नेता और पूर्व विधायक थे।
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