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Analysis: लोग क्या कहेंगे, एडजस्ट करो... 'अच्छी लड़की' वाले प्रेशर ने ली ट्विशा शर्मा की जान

Twisha Sharma Case: ट्विशा शर्मा की शादीशुदा जिंदगी बिल्कुल भी सामान्य नहीं थी. ये बात उसके माता-पिता भी जानते थे. लेकिन समाज के बनाए कायदे कानूनों के आगे वह अपनी बेटी को नहीं रख पाए. शायद वह यह समझ ही नहीं पाए कि बेटी अंदर ही अंदर घुट रही है.

Analysis: लोग क्या कहेंगे, एडजस्ट करो... 'अच्छी लड़की' वाले प्रेशर ने ली ट्विशा शर्मा की जान
ट्विशा शर्मा की मौत की वजह जानें.
  • ट्विशा शर्मा की शादीशुदा जिंदगी बहुत टॉक्सिक थी, जिसमें उसे मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना सहनी पड़ी थी
  • परिवार और समाज की परंपरागत सोच के कारण ट्विशा पर हिंसा के बावजूद शादी बचाने का दबाव था
  • सपोर्ट सिस्टम की कमी ने ट्विशा के आत्मसम्मान को प्रभावित किया और उसे सही निर्णय लेने से रोका
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"एक लड़की अपने पिता के घर से डोली में विदा होती है और अपने पति का घर अर्थी में छोड़ती है"... ये कहावत बड़े बुजुर्गों से आपने जरूर सुनी होगी और हिंदी फिल्मों में भी कई बार ये सुना होगा. तलाकशुदा बेटी को समाज बुरी और शक की नजर से देखता है. वहीं जो लड़की दुख सहती रहे, शिकायत न करे, टॉर्चर को घर की चार दीवारी में सह जाए, उसे सही समझा जाता है. ऐसी लड़कियों से उनके माता-पिता भी यही कहते हैं कि बेटा थोड़ा और एडजस्ट कर लो, शायद सब ठीक हो जाए. वे कोई विलन नहीं है, बल्कि उसी व्यवस्था को देख और सहकर यहां तक पहुंचे हैं. अपनी बेटी से भी वह ऐसी ही उम्मीद रखते हैं. 

ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में मीडिया के हवाले से जो कुछ भी सामने आया. उससे ये तो साफ है कि उसकी शादीशुदा जिंदगी काफी टॉक्सिक थी. उनके पिता नवनीधि शर्मा ने एनडीटीवी को यही बताया. "ट्विशा ने अपने भाई को बताया था कि हनीमून के दौरान उनके पति समर्थ सिंह ने उन्हें धक्का दिया था. लेकिन इस तरह की किसी एक बात पर कोई शादी तो नहीं तोड़ देता.  माता-पिता और बेटियां शादी बचाने के लिए हर कोशिश करते हैं, यही हिंदू परंपरा है.

अडायू और फोर्टिस हेल्थकेयर की सीनियर क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. मीमांसा सिंह तंवर ने कहा कि जब किसी इंसान पर दुर्व्यवहार की स्थिति में भी समझौता करते रहने का दबाव डाला जाता है, तो वह अपने हर काम पर सवाल उठाने लगता है. उसके फैसलों को शक से देखता है. इसे 'दोहरा बंधन वाला जबरदस्ती कंट्रोल कहा जाता है. ऐसे में पीड़ित को लगता है कि उसे इस पर काम करने की ज़रूरत है.

ट्विशा और उसकी मां स्वाति शर्मा के बीच की वॉट्सऐप चैट से सामने आया है कि 33 साल की ट्विशा पति समर्थ के घर में खुद को "फंसा हुआ" महसूस कर रही थी. वह अपने मायके लौटने की इच्छा जता रही थी. लेकिन उसके माता-पिता ने ज़ोर देकर कहा कि उसे जितना हो सके, तालमेल बिठाने की कोशिश करनी चाहिए. एक अन्य इंटरव्यू में ट्विशा के पिता ने कहा, "हमें उसे उस जगह से निकाल लेना चाहिए था, हमें उसे उस घर में नहीं छोड़ना चाहिए था."

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लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. अपनी बेटी को मानसिक कष्ट और समाज के तानों से बचाने की चाह में वहां रहने दिया, जहां उसे मेंटली टॉर्चर किया गया. लेकिन बहुत देरी हो गई. ट्विशा अब नहीं रही. उसके पिता समाज के शादी के नियमों के हिसाब से चलने के लिए उसकी बातों को अनसुना करते रहे. नतीजा तो सबने देख ही लिया. 

डॉ. सिंह ने कहा कि सपोर्ट सिस्टम की कमी पीड़ित पर गहरा मनोवैज्ञानिक प्रभाव डालती है, जिससे वे अपना आत्मसम्मान खोने लगते हैं. उन्हें बाहर निकलने का सही फैसला लेने या इस स्थिति को खत्म कप ने के लिए सही तरह का सपोर्ट का कोई ऑप्शन नहीं दिखता है. उन्हें यह विश्वास दिलाया जाता है कि वे हालात को बदल सकते हैं. जबकि यह उनके हाथ में नहीं है. इससे यह सोच विकसित होती है कि चाहे कुछ भी हो, दोष उन्हीं का होगा. इसलिए यह उन्हें बचने के रास्तो को बाधित कर देता है. 

ट्विशा की शादी दिसंबर में हुई थी. शादी के ठीक 5 महीने बाद वह 12 मई को, भोपाल में अपने ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाई गई. 

'लोग क्या कहेंगे' की टेंशन

नोएडा की समाजशास्त्री अंबिका चोपड़ा ने बताया कि आखिर क्यों पढ़े लिखे और आर्थिक रूप से समृद्ध परिवार भी अपनी बेटियों पर कॉम्प्रोमाइज करने और टॉक्सिक शादी में निभाने का दबाव डालते है.

"भारत में, परिवार सिर्फ माता-पिता और बच्चों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक परिवार इकाई के रूप में समाज भी है. उदाहरण के लिए, भारतीय संस्कृति में पूरा गांव एक परिवार है या पूरा समुदाय एक परिवार है."  इस परिवार के सामने असफल होने की शर्म ही माता-पिता को अपनी बेटियों को टॉक्सिक रिश्तों में रहने देने के लिए विवश करती है. 

ट्विशा शर्मा ने समाज की अच्छी बेटी की छवि को कायम रखते हुए सबकुछ चुपचाप सहा, लेकिन वह मरने के बाद भी अच्छी पत्नी और एक अच्छी बहू नहीं बन सकीं.

'अच्छे' भारतीय विवाह की परिभाषा

ट्विशा की सास, गिरिबाला सिंह, खुलेआम यह कह रही हैं कि एक अच्छी शादी कैसी होनी चाहिए. उनकी बहू ट्विशा उससे कितनी अलग थीं. रिटायर्ड जज अपनी बहू के खिलाफ गुस्से से भरे शब्द बोल रही हैं. उन्होंने कहा, "ट्विशा कभी पौधों को पानी नहीं देती थी, कभी पूजा नहीं करती थी, कभी रसोई में नहीं जाती थी. अपने झूठे बर्तन भी नहीं उठाती थी, बच्चे पैदा नहीं करना चाहती थी." 

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अंबिका चोपड़ा के मुताबिक, भारतीय मूल्यों में, एक अच्छी शादी के लिए  मानदंड बहुत कम हैं. उन्होंने कहा कि शादी एक कर्तव्य है जिसे निभाना होता है, बच्चे पैदा करना एक कर्तव्य है जिसे निभाना होता है और वैवाहिक बंधन की पवित्रता बनाए रखना एक कर्तव्य है जिसे निभाना होता है. इन सभी कर्तव्यों को निभाने का भार महिला के कंधों पर होता है, पुरुष के कंधों पर नहीं, इसलिए इस पवित्रता को बनाए रखने की जिम्मेदारी महिला पर होती है. 

गिरिबाला सिंह ने ट्विशा की प्रेग्नेंसी और उसके बाद कराए गए अबॉर्शन को लेकर उसकी कथित पीड़ा को उसके चरित्र पर सवाल उठाने के लिए इस्तेमाल किया. उन्होंने इसे क्रूरता करार देते हुए उनकी मर्जी को छीन लिया. 


 मीडिया को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि बच्चे की खबर आई, लेकिन वह मां नहीं बनना चाहती थी. पहला बच्चा होना बहुत खुशी की बात होती है, लेकिन उसने हमें उस खुशी का एक पल भी महसूस नहीं करने दिया. गिरिबाला सिंह ने कहा, "महिलाएं ऐसा कदम उठाती हैं, वे फांसी पर झूल जाती हैं, यह गैरजिम्मेदाराना है. लेकिन पुरुष ऐसा नहीं करते, इसलिए उनको अपराधी माना जाता है."

ट्विशा की क्वालिटी के बजाय दोष गिनाए गए

ट्विशा शर्मा की मौत 12 मई की रात को हुई थी. उसका अंतिम संस्कार मौत के 13 दिन बाद रविवार (24 मई) को हुआ. उसके शव का दो बार पोस्टमार्टम किया गया. इतने दिनों में न जाने कितनी दफा उसके गुणों की चर्चा के बजाय उसके कथित दोषों को गिनाने वाली टिप्पणियों की झड़ी लगा दी गई. उसकी सास समेत बाकी लोग इस बात पर बहस करते रहे कि वह किस तरह की महिला थी.

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