- विदेश मंत्रालय पहली बार अपने तोशाखाना संग्रह के 300 तोहफों की नीलामी आम जनता के लिए कर रहा है
- नीलामी 8 जून से शुरू हुई जो कि 30 जून तक चलेगी, जिसमें रोलेक्स घड़ियां, चांदी खंजर और सोने के गहने शामिल हैं
- नीलामी में सबसे लोकप्रिय तोहफा आठवीं दशक का पुराना चांदी का डिब्बा है, जिसके लिए अधिक बोली लग रही है
विदेश मंत्रालय (MEA) ने पहली बार अपने तोशाखाना कलेक्शन को आम जनता के लिए खोल दिया है. सरकारी अधिकारियों को उनके आधिकारिक दौरों पर मिले करीब 300 बेशकीमती तोहफों और यादगार चीजों की ई नीलामी की जा रही है. ये नीलामी बिडिंग के जरिए हो रही है. जो भी ज्यादा बोली लगाएगा वह इन चीजों को खरीद लेगा. अगर आप भी इन कीमती तोहफों को अपने कलेक्शन में शामिल करना चाहते हैं तो 30 जून तक खरीद सकते हैं.
तोशाखाना के तोहफों की नीलामी 8 जून से शुरू हुई थी जो कि 30 जून 2026 तक चलेगी. इसमें कई तरह के खास मौकों पर मिले तोहफे, हेरिटेज और कलेक्शन में रखने लायक चीजें शामिल हैं. इनकी शुरुआती कीमत 2,385 रुपये या उससे ज्यादा है. ये बात NDTV से बातचीत में अधिकारियों ने कही. इन तोहफों को आप नीलामी के जरिए तोशाखाना की आधिकारिक वेबसाइट से खरीद सकते हैं.

रोलेक्स घड़ियां, चांदी का खंजर
ई ऑक्शन के तोहफों में रोलेक्स के 'यॉट मास्टर' कलेक्शन की दो घड़ियां, ओमान से मिला चांदी का खंजर, लंदन में बना स्टर्लिंग सिल्वर टी-सेट, एप्पल मैकबुक प्रो, चांदी की सजावटी चीजें और सोने के गहने शामिल हैं. MEA अधिकारियों ने कहा कि ये पहली बार है जब आम लोगों को मंत्रालय के तोशाखाना से सामान खरीदने का मौका मिल रहा है, क्यों कि हाल ही में संशोधित तोशाखाना नियम, 2024 लागू हुए हैं.
पुराना चांदी का डिब्बा सबसे ज्यादा पॉपुलर
नीलामी में वे तोहफे भी शामिल हैं जो विदेश सचिव और उससे नीचे के रैंक वाले सरकारी अधिकारियों को पिछले कई सालों में उनके विदेश दौरों और सरकारी यात्राओं के दौरान मिले थे. इसमें सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र 1980 के दशक का एक पुराना चांदी का डिब्बा है. इसे लग्जरी सिगार या सिगरेट केस के तौर पर डिजाइन किया गया था. इस खास लग्जरी तोहफे के लिए इसके रिजर्व प्राइस से कहीं ज्यादा की बोलियां लगाई जा रही हैं.
वहीं करीब 16.5 लाख रुपये के रिजर्व प्राइस वाली दोनों रोलेक्स यॉट मास्टर घड़ियों के लिए भी अच्छी बोली लगाई जा रही है. अधिकारियों ने कहा कि कुवैत से आई सोने की ज्वेलरी, जिसका रिजर्व प्राइस करीब 9.5 लाख रुपये है, उसके लिए अब तक बोली नहीं लगी है.

इन तोहफे की लगी सबसे ज्यादा बोली
इसके अलावा इन तोहफों के कलेक्शन में एक चांदी का सजावटी डिब्बा भी है, जिस पर सोने की परत चढ़ी है. इसके भीतर 20 ग्राम का स्विस गोल्ड बिस्किट रखा है. इसके लिए रिजर्व प्राइस से ज्यादा की बोली अब तक लग चुकी है. तोशाखाना की चीजों की नीलामी MEA के एस्टेब्लिशमेंट डिवीजन का तोशाखाना सेक्शन कर रहा है. अधिकारियों के मुताबिक, इन सभी तोहफों का रिजर्व प्राइस एक वैल्यूएशन कमेटी तय करती है. इसमें पैकिंग और शिपिंग का खर्च भी जोड़ा जाता है.
30 जून तक चलेगी ई नीलामी
जो भी ज्यादा बोली लगाकर जीतेगा उसे 30 जून को नीलामी के बाद ये चीजें मुफ्त में डिलीवर की जाएंगी. अधिकारियों के मुताबिक, पहली बार तोशाखाना की चीजों की सार्वजनिक नीलामी की जा रही है. इससे पहले 1983 में हुई एकमात्र नीलामी सिर्फ विदेश मंत्रालय के कर्मचारियों के लिए थी. बता दें कि इन तोहफों को बेचकर मिलने वाली रकम को देश के कंसोलिडेटेड फंड में जमा किया जाएगा.
बता दें कि इस ई नीलामी में सिर्फ वे तोहफे शामिल हैं जो मौजूदा सरकारी अधिकारियों को मिले हैं. विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, भविष्य की नीलामियों में वे तोहफे भी शामिल किए जाएंगे जो अलग-अलग समय पर विदेश मंत्रियों को मिले थे.

तोशाखाना क्या होता है?
तोशाखाना वह आधिकारिक संग्रह है, जहां आधिकारिक कार्यक्रमों के दौरान भारतीय सरकारी अधिकारियों को विदेशी सरकारों, गणमान्य लोगों और अन्य विदेशी स्रोतों से मिले तोहफों और यादगार चीजों को संजोकर रखा जाता है. अधिकारियों ने कहा कि इसमें मौजूद ज्यादातर चीजें सेरिमोनियल, डेकोरेटेड, हेरिटेड या कलेक्टिबिस करने लायक हैं. इसका कोई व्यावहारिक उपयोग नहीं है.
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