दक्षिण मुंबई के गिरगांव इलाके से एक बड़ा मामला सामने आया है. यहां एक बंद घर के अंदर चावल के डिब्बे में रखी कीटनाशक दवा एल्युमिनियम फॉस्फाइड से जहरीली गैस बन गई. जिसकी चपेट में दो सगी बहनें आ गईं. दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. 7 साल की बड़ी बच्ची तो रिकवर जल्दी कर गई. लेकिन दो साल की मासूम बच्ची की हालत बेहद नाजुक है और वह अस्पताल में वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही है. यह घटना अलीभाई प्रेमजी मार्ग पर स्थित बोहोरी बिल्डिंग की है, जहां पेशे से इंजीनियर आव्हाड दंपति अपनी दो बेटियों के साथ रहते थे. दोनों की उम्र 7 साल और 2 साल है.
अचानक बीमार हुई थी बेटियां
11 जून को उनकी 2 साल की छोटी बेटी आर्विका को अचानक तेज उल्टी और दस्त डायरिया की शिकायत होने लगी. परेशान माता-पिता ने उसे तुरंत पास के एक अस्पताल में भर्ती कराया. स्थानीय अस्पताल में इलाज के बाद भी जब आर्विका की तबीयत में कोई सुधार नहीं हुआ, तो 13 जून को उसे हाजी अली स्थित प्रतिष्ठित SRCC चिल्ड्रेन हॉस्पिटल में रेफर किया गया. 15 जून तक डॉक्टरों की टीम ने बच्ची का लगातार इलाज किया, लेकिन उसकी हालत बिगड़ती ही जा रही थी. इसके बाद डॉक्टरों ने माता-पिता से गहराई से पूछताछ शुरू की कि क्या पिछले कुछ दिनों में बच्ची के पानी भोजन या घर के माहौल में कोई बदलाव हुआ था.
डिब्बे में कैसे बनी जहरीली गैस
पूछताछ के दौरान माता-पिता ने बताया कि उन्होंने घर में चावल को कीड़ों और चूहों से सुरक्षित रखने के लिए डिब्बे के अंदर कीटनाशक एल्युमिनियम फॉस्फाइड की पुड़िया रखी हुई थी. इस जानकारी के मिलते ही डॉक्टरों को बीमारी की असली वजह समझ आ गई और उन्होंने उसी दिशा में तुरंत इलाज शुरू किया. जांच में सामने आया कि चावल का डिब्बा कई दिनों से कसकर बंद था, जिसके कारण उसके भीतर एल्युमिनियम फॉस्फाइड ने अत्यधिक तीव्र और जहरीली गैस का रूप ले लिया था. जब डिब्बा खोला गया, तो वह तीखी गैस पूरे कमरे में फैल गई थी.
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घर के खिड़की दरवाजे बंद थे
जब गैस कमरे में फैली उस समय घर की खिड़कियां-दरवाजे बंद थे और एसी चल रहा था, इसलिए वेंटिलेशन न होने के कारण वह जहरीली गैस घर के अंदर ही घूमती रही और परिवार के सदस्य अनजाने में ही सांस के जरिए इसे शरीर के अंदर लेते रहे. हालांकि इस जहरीली गैस का असर घर के बड़ों पर नहीं हुआ. लेकिन दोनों बेटियां इसकी चपेट में आ गई थी. जिसमें से 7 साल की बड़ी बेटी की इम्युनिटी मजबूत होने के कारण वह इलाज के बाद जल्दी ठीक हो गई. लेकिन 2 साल की आर्विका की इम्युनिटी कमजोर होने के कारण यह जहर उसके शरीर में तेजी से फैल गया.
जानलेवा होता है सल्फास
कामा हॉस्पिटल के डीन डॉ. तुषार पालवे ने इस मामले पर बात करते हुए बताया 'सेलफॉस या फॉस्फाइड बेहद खतरनाक और घातक केमिकल है. यदि इसकी कुछ मिलीग्राम मात्रा भी शरीर के अंदर चली जाए, तो यह जानलेवा साबित हो सकती है. 150 से 300 मिलीग्राम की मात्रा किसी वयस्क इंसान की भी जान ले सकती है. शरीर में इसके एसिड फैलने से असहनीय दर्द, सांस फूलना और गंभीर डायरिया होता है.'
आर्विका की किडनी तक चला गया जहर
डॉक्टरों के मुताबिक इस जहर के कारण आर्विका की किडनी फेल हो चुकी है और उसे बाहर से लगातार ऑक्सीजन दी जा रही है. डॉक्टरों ने कहा कि अगर इस जहर की वजह से बच्ची का ब्रेन डैमेज नहीं हुआ होगा, तो वह इस गंभीर स्थिति से बाहर आ सकती है. फिलहाल उसे अगले 48 घंटों के लिए वेंटिलेटर पर सख्त निगरानी में रखा गया है. इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए मुंबई की डीबी मार्ग पुलिस ने घटना की डायरी में नोटिंग कर ली है और मामले की जांच कर रही है. बच्ची के माता-पिता इस समय गहरे सदमे में हैं और कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं हैं. डॉक्टरों ने सभी नागरिकों को सख्त चेतावनी दी है कि वे घरों में विशेषकर किचिन में इस तरह के घातक और प्रतिबंधित कीटनाशकों का उपयोग करने से बचें. जबकि किसी भी आपात स्थिति में जहरीली चीज को छोटे बच्चों की पहुंच से कोसों दूर रखें.
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