पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा धीरे-धीरे चढ़ने लगा है. तृणमूल कांग्रेस और अन्य पार्टियां जहां एक तरफ उम्मीदवारों के नाम जारी करने में लगी हैं वहीं दूसरी तरफ इन पार्टियों के बड़े नेता अभी से ही जनता तक अपनी बात पहुंचाने में जुट गए हैं. इसी राजनीतिक माहौल में तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने दक्षिण 24 परगना के पाथर प्रतिमा में एक चुनावी सभा का संबोधित किया. इस सभा के दौरान उन्होंने जो कुछ कहा उसे लेकर राजनीतिक खींचतान शुरू होती दिख रही है. उन्होंने इस सभा में आम जनता से अनुरोध किया कि वो आगामी चुनाव में बीजेपी को वोट ना दें. उन्होंने कहा कि अगर वो ऐसा करते हैं तो उनके घर में सांप घुस जाएगा.
उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में पहले ही तीखी बहस छेड़ दी है. अपने इस बयान के जरिए वे यह संदेश देना चाहते हैं कि भाजपा को वोट देना आम जनता के जीवन के लिए खतरा बन सकता है. उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि बंगाल की जनता को डरा-धमकाकर या लालच देकर वोट नहीं दिलाया जा सकता. इस दिन अभिषेक ने पाथर प्रतिमा विधानसभा क्षेत्र को अपना निशाना बनाया. उन्होंने कहा कि इस बार तृणमूल को कम से कम 40 हजार वोटों के अंतर से जीतना होगा. पिछले चुनाव में, जहां उसने लगभग 22 हजार वोटों से जीत हासिल की थी, उन्होंने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को दोगुनी जीत का लक्ष्य देकर चुनौती दी.
साथ ही, उन्होंने भाजपा से 50 हजार वोटों के अंतर को कम रखने का आग्रह किया. तृणमूल नेता ने जनसभा में पांच बड़े वादे किए. उन्होंने कहा कि लक्ष्मी भंडार परियोजना को किसी भी हालत में नहीं रोका जाएगा और इसके दायरे में अधिक से अधिक लोग आएंगे. राज्य के हर गरीब व्यक्ति के सिर पर मिट्टी की छत होगी. हर ब्लॉक और कस्बे में घर-घर इलाज की व्यवस्था करके आम लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित की जाएंगी. केंद्र सरकार के सहयोग न करने पर भी हर घर में पाइप से पीने का पानी पहुंचाया जाएगा.
दूसरी ओर, उन्होंने इस बात की आलोचना की कि पार्टी के आलीशान कार्यालयों, महंगी कारों और विमानों पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. उनके शब्दों में, आम जनता को उनके हक से वंचित करके इस तरह की फिजूलखर्ची बर्दाश्त नहीं की जा सकती. उन्होंने आरोप लगाया कि कौन क्या खाएगा, क्या पहनेगा, कौन किससे बात करेगा, इस पर नियंत्रण करने का प्रयास किया जा रहा है. इसके खिलाफ कड़ा संदेश देते हुए उन्होंने कहा, यह जमीन हमारी है, फैसला हमारा है. दिल्ली से कोई फैसला नहीं करेगा.
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