- अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैनडाइक ने तिहाड़ जेल के मसालेदार और चिकनाई वाले खाने से अस्वस्थता की शिकायत की है
- वैनडाइक ने अपनी याचिका में खुद खाना पकाने की अनुमति और आवश्यक उपकरणों की मांग की है
- याचिका में बताया गया कि जेल के खाने की वजह से वैनडाइक का वजन लगभग चौदह किलो कम हो गया है
तिहाड़ जेल अच्छे-अच्छों की अकड़ ढीली कर देती है. ताजा मामला आतंकवाद के केस में गिरफ्तार एक अमेरिकी नागरिक का है. नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) द्वारा टेरर केस में गिरफ्तार किए गए इस अमेरिकी ने मानवीय आधार पर दिल्ली की एक अदालत में जेल के अंदर अपना खाना खुद पकाने की इजाजत मांगी है. उसने दावा किया कि वह तिहाड़ जेल का खाना नहीं खा पा रहा है.
क्यों नहीं खा रहा तिहाड़ का खाना
किराए के सैनिक मैथ्यू एरॉन वैनडाइक ने अपनी याचिका में कहा है कि जेल के खाने खिलाफ वो 50 दिनों से ज्यादा समय तक भूख हड़ताल पर है. इसलिए वो अपने खर्च पर खाना बनाने का सामान और बर्तन जैसी सुविधा चाहता है. पटियाला हाउस कोर्ट में एडिशनल सेशंस जज प्रशांत शर्मा के सामने अपनी अर्जी में, अप्रैल से तिहाड़ जेल में बंद वैनडाइक ने कहा कि वह 6 मई से भूख हड़ताल पर है, क्योंकि वह जेल में परोसे जाने वाले मसालेदार, तेल वाला, डीप-फ्राइड और चिकनाई वाला खाना नहीं खा पा रहा है.
इम्यूनिटी में कमी बता रहा
याचिका में कहा गया है, "आवेदक/आरोपी... 06.05.2026 से भूख हड़ताल पर रहने को मजबूर है." इसमें यह भी कहा गया है कि एक अमेरिकी नागरिक होने के नाते, वह भारतीय जेलों में आम तौर पर परोसे जाने वाले खाने का आदी नहीं है. वैनडाइक ने अपने वकील के जरिए दावा किया है कि जेल के खाने की वजह से उसे काफी शारीरिक तकलीफ हुई है और उसकी सेहत पर बुरा असर पड़ा है. याचिका में कहा गया है कि उसका वजन लगभग 30 पाउंड (करीब 14 किलो) कम हो गया है. सही पोषण न मिलने से उसे देखने में दिक्कत हो रही है, और उसकी ताकत, स्टैमिना और इम्यूनिटी में काफी कमी आई है.
21 जुलाई को जेल अधिकारी देंगे जवाब
इस अनुरोध को मानवीय आधार पर बताते हुए उसके वकील ने कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था का मकसद सिर्फ न्यायिक हिरासत के दौरान उसकी सेहत की सुरक्षा करना है. याचिका में यह भी कहा गया है कि वैनडाइक का परिवार भोजन, भोजन पकाने के सामान और उससे जुड़े सभी खर्च उठाने को तैयार है. इस पर कोर्ट ने तिहाड़ जेल अधिकारियों से जवाब मांगा है और मामले की सुनवाई के लिए 21 जुलाई की तारीख तय की है.
कैसे हुई इसकी गिरफ्तारी
NIA ने 13 मार्च को कोलकाता एयरपोर्ट पर वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को गिरफ्तार किया. एजेंसी के मुताबिक, वो भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने की साजिश का हिस्सा था. जांचकर्ताओं का आरोप है कि आरोपी प्रतिबंधित भारतीय विद्रोही समूहों के संपर्क में था, उन्हें हथियार और अन्य आतंकवादी साजो-सामान सप्लाई करता था और ट्रेनिंग भी देता था. एजेंसी ने यह भी दावा किया है कि पूछताछ के दौरान आरोपियों ने माना कि वो AK-47 राइफल रखने वाले हथियारबंद आतंकवादियों के सीधे संपर्क में थे.
NIA के मुताबिक, 14 यूक्रेनियन लोगों का एक ग्रुप टूरिस्ट वीजा पर भारत आया था और गुवाहाटी होते हुए मिजोरम गया था. जांच करने वालों का आरोप है कि उन्होंने बिना परमिट के गैर-कानूनी तरीके से म्यांमार में प्रवेश किया, जातीय सशस्त्र संगठनों को ट्रेनिंग दी और यूरोप से विद्रोही गुटों से जुड़े नेटवर्क तक ड्रोन की खेप पहुंचाने में मदद की. वैनडाइक और अन्य आरोपियों पर 'गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम' (UAPA) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है, जिसमें आपराधिक साजिश भी शामिल है. एजेंसी सीमा पार के कथित आतंकी नेटवर्क की जांच कर रही है.
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