- ट्रंप ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य पर कब्जा करने से रोकने और दबाव में रखने के लिए सैन्य कार्रवाई कर रहे हैं
- ईरान के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण बनाए रखना युद्ध समझौते का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है
- रूस के राष्ट्रपति पुतिन यूक्रेन के साथ शांति वार्ता करने के बजाय संघर्ष को बढ़ाने के मूड में हैं
ईरान पर समझौते के बाद भी ट्रंप ने बम बरसा दिए. Axios का दावा है कि ट्रंप नहीं चाहते कि होर्मुज पर ईरान का कब्जा हो. साथ ही वो ईरान पर को दबाव में रखना चाहते हैं. अमेरिका के एक अधिकारी ने कहा कि तनाव का यह दौर एक-दो दिन, एक हफ्ता या एक महीने तक चल सकता है. यह इस बात पर निर्भर करेगा कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में कमर्शियल जहाजों पर हमले जारी रखता है या नहीं. अमेरिकी अधिकारी ने कहा, "हम उन्हें थोड़ा सबक सिखाएंगे ताकि उन्हें समझ आ जाए कि हम मजाक नहीं कर रहे हैं."

ईरान के लिए, युद्ध खत्म करने के किसी भी समझौते में इस जलडमरूमध्य पर नियंत्रण बनाए रखना एक मुख्य मकसद बन गया है. यह मुद्दा अमेरिका-ईरान MOU का एक अहम हिस्सा था, और अब इस जलडमरूमध्य से जुड़ी शर्तों की अलग-अलग व्याख्याओं के कारण समझौता टूटता हुआ दिख रहा है. अमेरिका के एक अधिकारी ने कहा कि मौजूदा तनाव ईरान के बंटे हुए नेतृत्व में मौजूद ज्यादा कट्टरपंथी गुटों की निराशा का नतीजा है; उनका मानना है कि MOU से तेहरान को कोई वास्तविक फायदा नहीं हुआ है. अधिकारी ने बताया कि ईरान को लगा कि होर्मुज में उसकी पकड़ कमजोर हो रही है, क्योंकि सैकड़ों जहाज ओमान के तट के पास दक्षिणी रास्ते से गुजर रहे थे. अमेरिका से प्रतिबंधों में छूट मिलने के बावजूद, ईरान को तेल बेचने में मुश्किल हुई क्योंकि वित्तीय संस्थान लेन-देन को मंजूरी नहीं दे रहे थे और देश अस्थायी छूट पर निर्भर रहने से हिचकिचा रहे थे. वहीं अब तक ईरान के फ्रीज किए गए फंड जारी नहीं किए गए हैं क्योंकि ईरान ने अभी तक समझौते के तहत जरूरी परमाणु कदम नहीं उठाए हैं.
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साफ है कि ट्रंप ईरान को खुली छूट देने को बिल्कुल तैयार नहीं हैं और जंग को आगे खींचने के लिए भी तैयार हैं.
वहीं रायटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी कीव के साथ शांति वार्ता करने को तैयार नहीं हैं. रूस की तेल रिफाइनरियों और बंदरगाहों पर यूक्रेन के हालिया ड्रोन हमलों ने फिलहाल लड़ाई जारी रखने के उनके संकल्प को और मजबूत किया है. क्रेमलिन के करीबी तीन सूत्रों ने रॉयटर्स को ये जानकारी दी. नाम न बताने की शर्त पर बात करने वाले दो सूत्रों ने कहा कि शांति वार्ता की बजाय पुतिन संघर्ष को और बढ़ा सकते हैं.
पुतिन युद्ध बढ़ाने को तैयार
ये रिपोर्ट अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सोमवार को दिए गए उस बयान के बाद आई हैं जिसमें उन्होंने कहा था कि पुतिन युद्ध खत्म करना चाहते हैं और इसका समाधान लोगों की सोच से कहीं ज्यादा करीब है. ट्रंप ने पिछले हफ्ते पुतिन और उनके यूक्रेनी समकक्ष वोलोदिमीर जेलेंस्की के साथ अलग-अलग फोन पर बातचीत की थी. उन्होंने बुधवार को नाटो शिखर सम्मेलन में जेलेंस्की से मुलाकात की, जहां यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने "शांति को करीब लाने के विचारों" पर चर्चा की. ट्रंप ने नाटो देशों को भी खूब खरी-खोटी सुनाई.

जेलेंस्की की मुश्किलें बढ़नी तय
पुतिन की सोच को जानने वाले एक व्यक्ति ने कहा कि उन्होंने यूक्रेन के पूर्वी डोनबास इलाके के बचे हुए हिस्से पर कब्जा करने के मुख्य मकसद को हासिल करने के लिए "अड़ियल रुख" अपना लिया है, जहां इस साल रूसी सेना की बढ़त धीमी हो गई है. उसी सूत्र ने बताया कि पुतिन ने हाल ही में सलाहकारों के एक समूह को फटकार लगाई, जिन्होंने मौजूदा फ्रंट लाइन पर युद्धविराम के आधार पर समझौता करने का सुझाव दिया था. दूसरे सूत्र ने कहा कि पुतिन का मानना है कि रूस जल्द ही डोनबास पर कब्जा कर लेगा. इस खबर के लिए टिप्पणी के अनुरोध के जवाब में क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा, "रूस शांतिपूर्ण समाधान के लिए तैयार है, लेकिन उसके पास स्वतंत्र रूप से काम करने और 'स्पेशल मिलिट्री ऑपरेशन' जारी रखने की पर्याप्त क्षमता है."
तो घाटा किसका?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि यूक्रेन की जंग नाटो तक पहुंच सकती है. पुतिन यूरोप तक जंग को बढ़ा सकते हैं. ट्रंप लगातार ईरान जंग में नाटो देशों पर धोखा देने का आरोप लगा चुके हैं. ऐसे में अगर पुतिन यूरोप पर हमला कर भी देते हैं तो सवाल ये है कि क्या ट्रंप उन्हें बचाने आएंगे. यही कारण है कि यूरोप के देश काफी चिंतित हैं. मगर एशियाई देशों की चिंता भी कम नहीं है. ईरान युद्ध फिर से शुरू होने से तेल की कीमतें एकबार फिर बढ़ गईं. ऐसे में युद्ध अगर फिर लंबा खिंचा तो इसका असर फिर देखने को मिल सकता है. उधर, चीन को लेकर दुनिया की तमाम खुफिया एजेंसियां दावा कर रही हैं कि अगले साल वो ताइवान पर हमला कर सकता है. ऐसे में दुनिया के हर कोने में युद्ध जारी रह सकता है.
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