कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की कीमत 2500 करोड़ रुपये, कांग्रेस ने लगाया आरोप

बोम्मई को अब तक के कार्यकाल में भ्रष्टाचार के आरोपों के अलावा सांप्रदायिक हिंसा को नियंत्रित करने में उनकी कथित विफलता के साथ ही एक भाजपा युवा विंग के नेता की हत्या का भी सामना करना पड़ा है.

कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की कीमत 2500 करोड़ रुपये, कांग्रेस ने लगाया आरोप

खास बातें

  • जा सकती है कर्नाटक के सीएम बसवराज बोम्मई की कुर्सी
  • कर्नाटक में चुनाव से पहले सीएम बदले जाने की अटकलें
  • सामुदायिक संतुलन बनाए रखने के लिए बीजेपी ले सकती है फैसला
बेंगलुरु:

कर्नाटक में विपक्ष के नेता कांग्रेस के बीके हरिप्रसाद ने आरोप लगाया है कि भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने मुख्यमंत्री पद के लिए ₹ 2,500 करोड़ की कीमत का हवाला दिया है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पद के लिए इच्छुक व्यक्ति के लिए ये बहुत बड़ी रकम है. बसवराज बोम्मई को मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने की अटकलें एक महीने से अधिक समय से लगाई जा रही हैं, लेकिन यह पहली बार है जब किसी नेता ने यह आरोप लगाया है कि सीएम पद बिकाऊ है.
 

इधर बीजेपी के आलाकमान की ओर से कर्नाटक के लिए संभावित सरप्राइज की अटकलें बढ़ती जा रही हैं. हालांकि पार्टी के कई नेताओं ने ये कहा है कि आठ महीने में होने वाले चुनावों से पहले बसवराज बोम्मई को मुख्यमंत्री के रूप में नहीं बदला जाएगा. वहीं राज्य इकाई के नेताओं का कहना है कि पार्टी सामुदायिक संतुलन के लिए ये फैसला ले सकती है, क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा जो बोम्मई की तरह लिंगायत समुदाय से आते हैं, पार्टी ने उन्हें संसदीय समिति में शामिल किया है. इसीलिए उन्हें  वोक्कालिगा समुदाय से बदला जा सकता है.

79 वर्षीय वयोवृद्ध येदियुरप्पा लिंगायत संप्रदाय को खुश रखने के अभियान में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं. लिंगायत राज्य की आबादी का लगभग 18 प्रतिशत है और उन्हें भाजपा के वोट बैंक के रूप में देखा जाता है. जबकि वोक्कालिगा की आबादी लगभग 15 प्रतिशत होने का अनुमान है.

भाजपा के सूत्रों का कहना है कि वोक्कालिगा को कुर्सी देकर, पार्टी पूर्व पीएम एचडी देवेगौड़ा के जनता दल (सेक्युलर) से कुछ वोट लेने की कोशिश कर सकती है. हालांकि, यह एक अनिश्चित संतुलन होने वाला है. कांग्रेस ने हाल ही में लिंगायत वोटों को विभाजित करने के अपने प्रयासों को दोगुना कर दिया है. राहुल गांधी ने हाल ही में संप्रदाय की एक अस्थायी सीट का दौरा किया था.

समुदाय भाजपा से नाखुश था, जब उसने पिछले साल बीएस येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री पद से हटा दिया था. पार्टी ने तब येदियुरप्पा के वफादार और साथी लिंगायत, बसवराज बोम्मई को सीएम बनाया. येदियुरप्पा के पास भी अब एक बार फिर शीर्ष पद है. बोम्मई पर भाजपा और विपक्ष दोनों के भीतर से 'कठपुतली' बनने का ताना मारा जाता है.

बोम्मई को अब तक के कार्यकाल में भ्रष्टाचार के आरोपों के अलावा सांप्रदायिक हिंसा को नियंत्रित करने में उनकी कथित विफलता के साथ ही एक भाजपा युवा विंग के नेता की हत्या का भी सामना करना पड़ा है. पार्टी कार्यकर्ताओं ने इसको लेकर विरोध प्रदर्शन भी किया था और आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हमारे अपने लोगों की रक्षा करने में असमर्थ हैं.

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यहां तक ​​कि जब उन्हें सीएम बनाया गया था, तब भी पार्टी में कई लोगों ने कहा था कि उनके पास आरएसएस की शाखा की पृष्ठभूमि नहीं है और इसलिए वह "भाजपा के मूल व्यक्ति नहीं हैं". हाल के हफ्तों में, उन्होंने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अनुकरण करने की बात करके कुछ हिंदुत्व हासिल करने की कोशिश की है. लेकिन उस स्पिन के लिए बहुत देर हो सकती है.