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This Article is From Nov 20, 2025

प्रिंसिपल, टीचर ने टॉर्चर किया.. मेरा बच्चा... कहते-कहते रो पड़े शौर्य के पिता, सुनाई दर्दनाक दास्तां

पुलिस ने मौके से शौर्य का स्कूल बैग बरामद किया, जिसमें एक सुसाइड नोट मिला था. एफआईआर के अनुसार किशोर ने अपने परिवार से माफी मांगी और लिखा कि स्कूल के शिक्षकों की हरकतों ने उसे इस स्थिति में धकेल दिया. उसने यह भी इच्छा जताई कि कार्रवाई की जाए ताकि किसी और बच्चे को तकलीफ न हो और कहा कि अगर हो सके तो उसके अंग दान कर दिए जाएं.

प्रिंसिपल, टीचर ने टॉर्चर किया.. मेरा बच्चा... कहते-कहते रो पड़े शौर्य के पिता, सुनाई दर्दनाक दास्तां
  • दिल्ली पुलिस ने मेट्रो स्टेशन पर छात्र शौर्य पाटिल की आत्महत्या के मामले में केस दर्ज कर लिया है.
  • शौर्य पाटिल के पिता ने स्कूल में उनके बेटे के लगातार मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया है.
  • पिता ने बताया कि स्कूल के शिक्षक शौर्य को छोटी-छोटी बातों पर डांटते और मानसिक दबाव बनाते थे.
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दिल्ली पुलिस ने 18 नवंबर को राजेंद्र प्लेस मेट्रो स्टेशन पर दसवीं कक्षा के एक 16 वर्षीय छात्र की आत्महत्या के बाद प्राथमिकी दर्ज की है. शौर्य पाटिल मध्य दिल्ली के एक स्कूल का छात्र था. एफआईआर के अनुसार करोल बाग निवासी शौर्य के पिता प्रदीप पाटिल ने कहा कि कई शिक्षकों द्वारा कथित उत्पीड़न के कारण उनका बेटा लगातार मानसिक दबाव में था. छात्र शौर्य पाटिल के पिता प्रदीप पाटिल का एक वीडियो भी सामने आया है. जिसमें एक पिता ने अपने बेटे के लिए इंसाफ की मांग की है. 

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मेट्रो स्टेशन से कूदा बच्चा

प्रदीप पाटिल ने वीडियो में विस्तार से बताया कि कैसे स्कूल में उनके बेटे को परेशान किया जा रहा था. वीडियो में प्रदीप पाटिल ने कहा, मैं प्रदीप पाटिल, शौर्य पाटिल का पिता हूं. मेरा बेटा 10th क्लास में सेंट कोलंबस स्कूल, गोल मार्केट में पढ़ता था. सेकंड क्लास से ही इसी स्कूल में है, लगभग पिछले 8 साल से. लेकिन कल, मतलब परसों 18 तारीख को, एक इंसिडेंट हुआ. राजेंद्र प्लेस मेट्रो स्टेशन से उसने जाके कूद के छलांग लगाई.”

“हम तो नॉर्मल थे. पिछले 6-7 महीनों से उसकी शिकायत थी कि मुझे टीचर छोटी-छोटी चीज़ों के लिए डांटती है. मुझे भी कंप्लेंट करी थी कि बेटा शरारती है, पीछे चुटकुले सुनाता है, जोक्स कहता है. तो मैंने टीचर को बोला था, "मैडम छोटा बच्चा है, अगर यह शरारत नहीं करेगा तो कौन करेगा?" तो टीचर ने उसके बाद भी उसको टॉर्चर करना जारी रखा था.”

“उसके बाद हमने बेटे को बोला था कि अभी 10th के 10 दिन बचे हैं, हम स्कूल चेंज कर लेंगे. कोई दिक्कत नहीं आएगी. उसने मान भी लिया था. लेकिन तीन दिन पहले उसे जो युक्ति माझन मैडम ने बोला था.. पेरेंट्स को बुलाकर हम टीसी देंगे तेरे को स्कूल से निकाल देंगे. जिस बच्चे के 10th के एग्जाम के अगर 10 दिन पहले, प्री-बोर्ड से पहले अगर उसको टीसी मिलेगा, तो क्या हो सकता है, आप सोच सकते हो? यह तो परेशान हो गया. उसने हमें न बताया, न कुछ किया.”

"रोने का ड्रामा मत कर"

“और ताज़ा मामला ऐसा था, जिस दिन सुसाइड किया उसी दिन पैर फिसल करके बेटा गिरा था स्कूल में. तो वहां पे जो मैडम थी, उन्होंने उसको डांटा कि तू जानबूझ के गिरा है. उसने बोला, "नहीं मैम मैं गिरा नहीं हूं, मेरा पैर फिसला है." ये रोने लगा तो बोलती है, "रोने का ड्रामा मत कर, ये ओवर ड्रामा मत कर, और इससे मुझे कुछ फर्क नहीं पड़ने वाला." और ये सब स्कूल के सामने हुआ, क्लास टीचर के सामने. वो ये बड़ा इंसल्ट बर्दाश्त नहीं कर पाया. मेरा बेटा सुबह ड्राइवर के साथ 7:15 बजे स्कूल गया था. लेने के लिए उसका ड्राइवर बाहर खड़ा था, लेकिन वो उसके साथ वापस नहीं आया.”

“तो 2:15-3:45 बजे मुझे फ़ोन आया किसी अनजान से कि आपका बेटा मेट्रो स्टेशन से गिरा है. उसके बाद रात को उसके दोस्त अश्मीर और अयान से हमें पता चला कि ये सारा स्कूल में ऐसा-ऐसा पूरा दिन इंसिडेंट हुआ है.”

“मेरे बेटे ने जो सुसाइड नोट लिखा है, उसमें युक्ति माझन, प्रिंसिपल अपराजिता पाल, मनु कालरा और जूली वर्गीस के नाम लिखे हैं. इन्होंने इसको पूरा टॉर्चर किया है. और उसने अपने शरीर के बॉडी पार्ट्स, ऑर्गन जिसको ज़रूरत है, उसको डोनेट करने की बात उस पर्ची में लिखी है. उसने माँ-बाप और भाई से माफ़ी भी मांगी है कि मैं तुम्हारे लिए कुछ जैसे चाहे वैसा बन नहीं सका.”

“लेकिन मेरी आख़िरी इच्छा है कि मेरी तरह और किसी बच्चे के साथ ऐसा अन्याय न हो और मेरी तरह और कोई बच्चा ऐसा न करे. इसलिए इन टीचरों के साथ न्याय हो और इनको कड़ी से कड़ी शिक्षा हो जाए. कल FIR रजिस्टर हो चुकी है. और इसमें जो धाराएँ लगाई हैं उसके हिसाब से सही तरह से जांच हो और इन टीचरों के खिलाफ़ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए, उनको अरेस्ट किया जाए.”

“यह हमारी सब पेरेंट्स की तरफ से हम मांग करते हैं, आपके चैनल के माध्यम से मांग करते हैं. और इस बच्चे को साथ ही जिन-जिन बच्चों के साथ ऐसा अन्याय हो रहा है, अत्याचार हो रहा है, उनको आपके माध्यम से न्याय मिलेगा, ये हम आपसे चाहते हैं."

हेल्पलाइन
वंद्रेवाला फाउंडेशन फॉर मेंटल हेल्‍थ 9999666555 या help@vandrevalafoundation.com
TISS iCall 022-25521111 (सोमवार से शनिवार तक उपलब्‍ध - सुबह 8:00 बजे से रात 10:00 बजे तक)
(अगर आपको सहारे की ज़रूरत है या आप किसी ऐसे शख्‍स को जानते हैं, जिसे मदद की दरकार है, तो कृपया अपने नज़दीकी मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञ के पास जाएं)

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