- तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलापति विजय के ज्योतिषी थिरु रिक्की राधान की नियुक्ति का आदेश रद्द कर दिया गया है
- थिरु रिक्की राधान को मुख्यमंत्री के विशेष दायित्व कार्यालय में नियुक्त करने का आदेश पहले दिया गया था
- राधान पंडित ने तमिलनाडु चुनाव से पहले विजय की जीत और सरकार बनाने की भविष्यवाणी की थी
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलापति विजय के ज्योतिषी थिरु रिक्की राधान की नियुक्ति का आदेश रद्द कर दिया गया है. थिरु रिक्की राधान पंडित को मुख्यमंत्री की स्पेशल ड्यूटी (ओएसडी) ऑफिस में नियुक्त करने के आदेश दिया गया था. राधान पंडित ने तमिलनाडु चुनाव से पहले ही भविष्यवाणी कर दी थी कि विजय को जीतेंगे और सरकार बनाएंगे. राधान पंडित की भविष्यवाणी सही भी साबित हुई और विजय की पार्टी टीवीके को तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में 108 सीटों पर जीत मिली है.
विजय की जीत की भविष्यवाणी की थी
राधान पंडित तमिलनाडु के एक बड़े स्पिरिचुअल मेंटर हैं. पूर्व मुख्यंत्री जयललिता के स्पिरिचुअल मेंटर भी राधान पंडित ही थे. तमिलनाडु की राजनीति में राधान पंडित का काफी सम्मान है. जयललिता से लेकर विजय तक उनसे सलाह लेते हैं, ऐसा कहा जाता है. राधान पंडित ने चुनाव से पहले भविष्यवाणी की थी कि थलापति विजय की पार्टी टीवीके को जीत मिलेगी और वही हुआ. टीवीके को जब जीत मिली, तो राधान पंडित सीधे विजय के घर पहुंचे और उन्हें जीत की बधाई दी थी.

40 सालों से ज्योतिष के क्षेत्र में राधान पंडित
तमिलनाडु की राजनीति में दखल रखने वाले और पूर्व सीएम जयललिता के करीबी लोग बताते हैं कि जयललिता, राधान पंडित से राय लेने के बाद ही बड़े फैसले लेती थीं. बीते 40 सालों से राधान पंडित ज्योतिष के क्षेत्र में हैं. वह सोशल मीडिया पर भी लोगों को ज्योतिष से संबंधित सलाह देते रहते हैं.
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विजय ने हासिल किया विश्वास मत, 144 विधायकों का मिला साथ
तमिलनाडु विधानसभा में बुधवार को फ्लोर टेस्ट में विजय सरकार पास हो गई है. मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने विश्वास प्रस्ताव पेश किया. सीएम को 144 विधायकों का साथ मिला है जबकि विरोध में सिर्फ 22 वोट पड़े. दूसरी ओर, तमिलनाडु विधानसभा में बुधवार को विश्वास मत की कार्यवाही के दौरान भारी राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला. विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन के नेतृत्व में डीएमके ने सदन से वॉकआउट कर दिया. उदयनिधि ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय पर तीखा हमला बोला और टीवीके के नेतृत्व वाली सरकार के बहुमत की वैधता पर सवाल उठाए. विश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान बोलते हुए, उदयनिधि स्टालिन ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी गठबंधन के पास 234 सदस्यों वाली विधानसभा में अपना बहुमत साबित करने के लिए जरूरी 118 सदस्यों की संख्या नहीं है.
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