देश के पांच राज्यों में हुए चुनाव के रूझान आ रहे हैं. इसमें सबसे बड़ा उलटफेर तमिलनाडु में होता हुआ दिख रहा है. वहां अभिनय की दुनिया से राजनीति में आए विजय की पार्टी सरकार बनाती हुई नजर आ रही है. रूझानों में विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कड़गम (टीवीके) करीब 110 सीटें जीतती हुई नजर आ रही है. इसे पहली बार चुनाव लड़ रही टीवीके का शानदार प्रदर्शन कहा जा सकता है. क्योंकि राजनीतिक विश्लेषक टीवीके को तीसरे नंबर की पार्टी बता रहे थे.
एमजीआर बनाम विजय
तमिलनाडु में जब विजय की पार्टी टीवीके सरकार बनाने की ओर बढ़ रही है तो उनकी तुलना एमजीआर के नाम से मशहूर एमजी रामचंद्रन से की जाने लगी है.एमजीआर जब अपने चरम पर थे तो उनकी लोकप्रियता राजनीति के पारंपरिक तर्कों से आगे चली जाती थी. लोगों के बीच उनकी लोकप्रियता उनकी पहचान,लोगों से भावनात्मक जुड़ाव और फिल्मों के जरिए बनी उनकी 'लार्जर दैन लाइफ' इमेज से आगे की चीज हुआ करती थी. विजय का उभार भी उसी पैटर्न को दिखाता है. अंतर केवल यह भर है कि एमजीआर के दौर की मीडिया अगल थी और विजय के दौर की मीडिया एकदम अलग है. इस दौर में राजनीति और संस्कृति पहले से ज्यादा विभाजित है.
चुनाव प्रचार के दौरान विजय महिला और युवाओं के खासा लोकप्रिय नजर आए. इन वर्गों में विजय की दीवानगी सिर चढ़कर बोल रही थी. उनके समर्थक पारंपरिक राजनीति से थोड़ा अलग हैं, वो उनके चुनाव घोषणा पत्र से अधिक उनकी फिल्मों से बनी इमेज से अधिक प्रभावित नजर आए.टीवीके का टार्गेट वोट बैंक भी युवा ही रहे. उसने पहली बार मतदाता बने युवाओं के साथ-साथ 30-35 साल के युवाओं को टारगेट किया. यह वह वर्ग है, जो डीएमके की राजनीति से बहुत अधिक खुश नहीं है. इन युवाओं को लगा कि अपनी फिल्मों से करोड़ों की कमाई करने वाले विजय युवाओं की जिंदगी संवारने के लिए ही राजनीति में आए हैं.

विजय ने इस चुनाव में अनुसूचित जाति के वोटरों को भी साधा है, जो कि द्रविड़ राजनीति का हिस्सा नहीं रहे हैं.
चुनाव प्रचार में भी विजय ने काफी चालाकी से अपनी लड़ाई सत्तारूढ़ डीएमके से बताई. इसका फायदा उन्हें यह मिला कि डीएमके की सरकार से नाराज चल रहे लोगों ने भी एआईएडीएमके की जगह टीवीके को वोट देना बेहतर समझा.तमिलनाडु में द्रविड़ राजनीति की जड़ों को देखते हुए विजय ने कभी भी राजनीति के द्रविड़ मॉडल की आलोचना नहीं की. उन्होंने अपनी राजनीति को धर्मनिरपेक्ष भी बताया. इसका उन्हें फायदा यह हुआ कि डीएमके से नाराज वोट उनकी झोली में आ गए.
विजय का सफर
तमिलानाडु की राजधानी चेन्नई में 22 जून 1974 को पैदा हुए विजय का पूरा नाम जोसेफ विजय चंद्रशेखर है. विजय का पूरा परिवार फिल्मों में है. उनके पिता एसए चंद्रशेखर तमिल सिनेमा उद्योग के मशहूर निर्देशक रहे हैं और मां शोभा गायिका थीं.विजय ने बहुत कम उम्र में एक्टिंग की दुनिया में कदम रख दिया था.उन्होंने अपने पिता की फिल्म 'वेट्री' में बाल कलाकार के रूप में डेब्यू किया था. विजय ने हीरो के तौर पर पहली फिल्म 'नालैया थीरपू' की थी. साल 1992 में आई इस फिल्म की पटकथा उनकी मां शोभा ने लिखी थी.
तमिलनाडु में 23 अप्रैल को एक चरण में वोटिंग हुई थी.इसमें 85.1 फीसदी लोगों ने वोट किया था. यह आजादी के बाद हुआ सबसे अधिक मतदान था.
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