- पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 192 सीटों पर बढ़त बनाकर 15 साल बाद सत्ता संभालने की स्थिति बनाई है
- टीएमसी को 96 सीटों पर बढ़त मिली है, जो पिछले चुनाव की तुलना में 118 सीटों की भारी गिरावट दर्शाती है
- ममता बनर्जी की हार के पीछे भ्रष्टाचार, घोटाले और आरजी कर अस्पताल कांड जैसे गंभीर मुद्दे मुख्य कारण रहे हैं
BJP Victory In WB Assembly Election: पिछले 15 सालों तक पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ रहीं सीएम ममता बनर्जी बंगाल की सत्ता से विदाई तय हो गया है. प्रचंड जीत की ओर बढ़ी बीजेपी 4 मई, 2026 दोपहर 1 बजे तक तक आए नतीजों में 192 सीटों पर बढ़त बना चुकी है, जबकि TMC की महज 96 सीटों पर ही बढ़त है. पिछले चुनाव से बीजेपी को इस बार 115 सीटों की ज्यादा बढ़त है, जबकि TMC को 118 सीटों पर झटका लगा है.
2024 लोकसभा चुनाव में खोयी जमीन पर दोबारा कब्जाने में कामयाब हुई थी टीएमसी
साल 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी को धूल चटाकर टीएमसी ने उसे 12 सीटों पर समेट दिया था. इस चुनाव में टीएमसी ने 29 लोकसभा सीटों जीत दर्ज की थी, जबकि साल 2019 लोकसभा चुनाव में टीएमसी 22 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी और बीजेपी को 18 लोकसभा सीटों पर विजय मिली थी. साल 2024 लोकसभा चुनाव में खोयी जमीन पर दोबारा कब्जा करते हुए टीएमसी 22 से 29 लोकसभा सीटों पर पहुंच गई और बीजेपी 6 सीट गंवाने वाली बीजेपी ने दो सालों के अंतराल में ऐसा क्या किया कि टीएमसी को सत्ता से दूर करने में लगभग कामयाब हो गई.

विधानसभा चुनाव में ममता की बड़ी हार की वजह रहा गंभीर भ्रष्टाचार और घोटाला
सवाल है कि पिछले दो सालों में ऐसा क्या है, जिसका खामियाजा टीएमसी सुप्रीमों को सत्ता गंवाकर चुकाना पड़ा है. लगातार 15 सालों तक पश्चिम बंगाल की राजनीति में धुरी रहीं ममता बनर्जी की हार की बड़ी वजह गंभीर भ्रष्टाचार, घोटाला और आरजीकर अस्पताल कांड माना जा रहा है. पिछले दो सालों में मंत्रिमंडल के मंत्रियों और पार्टी के नेताओं के उजागर हुए भ्रष्टाचार और सीबीआई और ईडी की छापेमारी में नोटों की बरामदगी ने उसकी ईमानदार छवि ठेस पहुंचाई, जिसका परिणाम चुनाव नतीजों में पहुंचता दिख रहा है.
शिक्षकों की भर्ती में अनियमितता और राशन घोटाले ने ममता की छवि पर डेंट किया
टीएमसी सरकार में सामने आई शिक्षकों की भर्ती में अनियमितता और राशन घोटाले ने ममता सरकार की छवि को नुकसान में बड़ी भूमिका निभाई, जिसका असर चुनाव के नतीजों पर साफ-साफ झलकता दिख रहा है, लेकिन आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज की घटना ने उनकी विदाई में निर्णायक भूमिका अदा की है, जिसको लेकर बीजेपी वहां की जनता को समझाने में सफल रही कि ममता राज में पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार ही नहीं, महिला सुरक्षा बड़ा विषय है. माना जा रहा है कि दोनों मुद्दों को लेकर बीजेपी राज्यव्यापी प्रदर्शनों ने महिला वोटरों टीएमसी से दूर कर दिया.
भावनात्मक को मुद्दे को भुनाया, पीड़िता की मां को मैदान उतारकर बीजेपी ने लिया ऐज
चुनाव में आरजी कर अस्पताल कांड जैसे भावनात्मक मुद्दे को बीजेपी ने बढ़िया इस्तेमाल किया. पीड़िता की मां और उनके करीबियों को चुनावी मैदान उतारकर ऐज ले लिया. ममता की हार में 'एंटी-इनकंबेंसी' फैक्टर को भी नजरंदाज नहीं किया जा सकता है. करीब 15 साल की सत्ता में रही ममता के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी फैक्टर ही था और वोटरों ने बदलाव के लिए वोट किया. इनमें बेरोगारी और औद्योगिक विकास प्रभावी मुद्दे हो सकते हैं.
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