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विजय बहुमत के दावे से राज्यपाल को नहीं कर पाए संतुष्ट, अब कैसे बनेगी सरकार? समझिए राज्यपाल के पास क्या ऑप्शन?

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद TVK प्रमुख विजय ने सरकार बनाने का दावा पेश किया है, हालांकि बहुमत के आंकड़ों पर राज्यपाल की असहमति ने पेंच फंसा दिया है. अब गेंद राज्यपाल के पाले में है.

विजय बहुमत के दावे से राज्यपाल को नहीं कर पाए संतुष्ट, अब कैसे बनेगी सरकार? समझिए राज्यपाल के पास क्या ऑप्शन?
  • तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में विजय की पार्टी तमिझगा वेत्री कड़गम सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन बहुमत से दूर है
  • राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने विजय से सरकार बनाने का दावा पेश करने के बाद बहुमत साबित करने को कहा है
  • विजय कांग्रेस समेत अन्य दलों के साथ गठबंधन कर 15 दिनों में विधानसभा में बहुमत साबित करने की तैयारी में हैं
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तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में अभिनेता से नेता बने विजय की तमिझगा वेत्री कड़गम (TVK) ने शानदार प्रदर्शन किया है. टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. लेकिन यह बहुमत के आंकड़े से दूर है. हालांकि विजय कांग्रेस के साथ गठबंधन करने की तैयारी में है. इस बीच विजय ने तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया है. लेकिन राज्यपाल विजय द्वारा दिखाए गए आंकड़ों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं. ऐसे में अब राज्यपाल के पास क्या संवैधानिक विकल्प हैं? क्या विजय सरकार बना पाएंगे? आइए पूरी बात समझते हैं.

सबसे बड़ी पार्टी के नेता को सरकार बनाने का न्योता देना होगा

संवैधानिक परंपरा के अनुसार, जब किसी एक दल के पास बहुमत नहीं होता है तो यह त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति होती है. ऐसे में राज्यपाल सबसे बड़ी पार्टी के नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं. हालांकि उन्हें एक निश्चित समय सीमा जो आमतौर पर 7 से 15 दिन होती है, के भीतर विधानसभा में फ्लोर टेस्ट के जरिए बहुमत साबित करना होता है. ऐसे में राज्यपाल सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते टीवीके को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं.

गठबंधन के मांग सकते हैं प्रमाण

विजय ने सरकार बनाने का दावा पेश करते हुए कहा है कि वो 15 दिनों में बहुमत साबित कर देंगे. उन्होंने कांग्रेस और अन्य दलों के साथ समर्थन के लिए बातचीत भी की है. ऐसे में राज्यपाल विजय को कांग्रेस और अन्य दलों के साथ औपचारिक गठबंधन का लिखित प्रमाण देने के लिए कह सकते हैं. TVK (108) और कांग्रेस (5) मिलकर 113 तक पहुंच रहे हैं, जो अभी भी 118 के जादुई आंकड़े से 5 कम है. ऐसे में राज्यपाल अन्य दलों या के रुख का इंतजार कर सकते हैं ताकि राज्य में एक स्थिर सरकार बन सके.

क्या विपक्षी गठबंधन को मौका दे सकते हैं?

नियमों के अनुसार, अगर राज्यपाल को लगता है कि सबसे बड़ा दल बहुमत नहीं जुटा पाएगा, तो वह दूसरे सबसे बड़े समूह को बहुमत के दावे को साबित करने के लिए बुला सकते हैं. तमिलनाडु में दूसरा सबसे बड़ा समूह DMK और AIADMK है, हालांकि ये दोनों एक दूसरे के प्रतिद्वंद्वी हैं. हालांकि बहुमत का फैसला लोक भवन में नहीं बल्कि विधानसभा के पटल पर ही होना चाहिए. तमिलनाडु में यह स्थिति लगभग नामुमकिन ही लगती है.

राष्ट्रपति शासन की सिफारिश (अंतिम विकल्प)

अगर कोई भी दल या गठबंधन सरकार बनाने की स्थिति में नहीं होता है और राज्य में संवैधानिक तंत्र विफल होता दिखता है, तो राज्यपाल अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर सकते हैं. इसके बाद विधानसभा को सस्पेंडेड एनिमेशन में रखा जा सकता है या नए चुनाव की ओर बढ़ा जा सकता है.

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तमिलनाडु में फिलहाल क्या स्थिति?

तमिलनाडु में विजय की पार्टी के पास 108 सीटें हैं. विजय ने सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है. उन्होंने राज्यपाल से बहुमत का आंकड़ा साबित करने के लिए 15 दिन का समय मांगा है. राजभवन के सूत्रों के अनुसार, राज्यपाल उन्हें सरकार बनाने का मौका दे सकते हैं और विधानसभा में बहुमत सिद्ध करने को कह सकते हैं.

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