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जानिए कौन हैं राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर, जिनके फैसले पर टिकी है 'विजय सरकार' की किस्मत

राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर का जन्म 23 अप्रैल 1954 को गोवा के पणजी शहर में हुआ था. वैचारिक रूप से वे कम उम्र से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे, जिसके बाद 1989 में उन्होंने BJP के साथ अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत की.

जानिए कौन हैं राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर, जिनके फैसले पर टिकी है 'विजय सरकार' की किस्मत
  • तमिलनाडु चुनाव में टीवीके पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर विजय ने राज्यपाल से सरकार गठन का दावा पेश किया.
  • राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर का जन्म गोवा में 1954 में हुआ और वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे हैं.
  • आर्लेकर ने गोवा में कैबिनेट मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष और पर्यावरण मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया.
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तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी टीवीके के प्रमुख विजय ने बुधवार को राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया. हालांकि, पार्टी को स्पष्ट बहुमत न मिलने के चलते राज्य में सत्ता की तस्वीर अभी भी साफ नहीं है. ऐसे में एक बार फिर राज्यपाल की भूमिका अहम हो गई है. आइए जानते हैं कि तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर कौन हैं और उनका राजनीतिक सफर कैसा रहा है.

मार्च 2026 में राजेंद्र आर्लेकर को केरल का राज्यपाल रहते हुए तमिलनाडु का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था. यह जिम्मेदारी ऐसे वक्त आई है, जब तमिलनाडु में द्रविड़ राजनीति के पारंपरिक दिग्गजों की पकड़ कमजोर होती दिख रही है और सत्ता संतुलन नए सिरे से बन रहा है.

राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर का जन्म 23 अप्रैल 1954 को गोवा के पणजी शहर में हुआ था. वैचारिक रूप से वे कम उम्र से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे, जिसके बाद 1989 में उन्होंने BJP के साथ अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत की. गोवा की राजनीति में सक्रिय रहते हुए उन्होंने न सिर्फ कैबिनेट मंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभाई, बल्कि विधानसभा के अध्यक्ष पद तक भी पहुंचे. वर्ष 2012 में वे गोवा विधानसभा के स्पीकर बनाए गए और करीब तीन साल तक इस पद पर रहे. बाद में 2015 में उन्हें गोवा सरकार में पर्यावरण और वन मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई. विधानसभा को पूरी तरह पेपरलेस बनाने की पहल उनके कार्यकाल की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धियों में गिनी जाती है.

1975‑77 के आपातकाल के दौरान आर्लेकर और उनके पिता को RSS से जुड़े आंदोलनों में भाग लेने के चलते जेल भी जाना पड़ा. यही दौर उनके राजनीतिक जीवन की निर्णायक कसौटी बना. वर्षों बाद उन्होंने कहा था कि जेल का अनुभव उन्हें यह एहसास कराता रहा कि लोकतांत्रिक स्वतंत्रताओं की रक्षा कितनी जरूरी है.

राजेंद्र आर्लेकर जुलाई 2021 से फरवरी 2023 तक हिमाचल प्रदेश के 21वें राज्यपाल रहे. इसके बाद फरवरी 2023 से जनवरी 2025 तक उन्होंने बिहार के 29वें राज्यपाल के रूप में कार्य किया. 2 जनवरी 2025 को उन्होंने केरल के 23वें राज्यपाल के रूप में शपथ ली. 12 मार्च 2026 को उन्हें तमिलनाडु के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया.

आपातकाल के दौरान (1975–77) राजेंद्र आर्लेकर को अपने पिता के साथ जेल जाना पड़ा था. वे यूथ हॉस्टल्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुके हैं. उन्हें भारतीय शास्त्रीय संगीत, नाटक, मराठी सुगम संगीत और पढ़ने में रुचि है.

बिहार के राज्यपाल रहते हुए उन्होंने यह बयान देकर विवाद खड़ा कर दिया था कि अंग्रेज केवल सत्याग्रह नहीं, बल्कि भारतीयों के हाथों में हथियार देखकर भारत छोड़कर गए. इस बयान पर विपक्ष, खासकर कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताई थी. इसके अलावा बिहार में विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को लेकर उनका शिक्षा विभाग से गंभीर टकराव रहा. 

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