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This Article is From Jan 05, 2026

पहले 1.16 लाख पेड़ों का हिसाब दो... दिल्ली के अरावली रिज में पेड़ों की कटाई पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

CJI सूर्यकांत ने कहा कि जब तक कोर्ट के पिछले निर्देशों का पूरी तरह से पालन नहीं हो जाता, तब तक पेड़ काटने की इजाज़त नहीं दी जाएगी. कोर्ट ने DDA से पिछली सुनवाई में बताए गए लगभग 1,16,000 पेड़ों की स्थिति के बारे में पूछा और एक विस्तृत कंप्लायंस रिपोर्ट मांगी.

पहले 1.16 लाख पेड़ों का हिसाब दो... दिल्ली के अरावली रिज में पेड़ों की कटाई पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
  • सुप्रीम कोर्ट ने अरावली क्षेत्र में 473 पेड़ काटने की अनुमति देने से फिलहाल इनकार किया है.
  • कोर्ट ने दिल्ली विकास प्राधिकरण से 1,16,000 पेड़ों की स्थिति और नए लगाए गए पौधों की रिपोर्ट मांगी है.
  • बेंच ने सड़क चौड़ी करने की जरूरत को स्वीकार किया लेकिन पेड़ काटने की संख्या शून्य रखने पर जोर दिया है.

दिल्ली में अरावली क्षेत्र में 473 पेड़ काटने की इजाजत देने से सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इनकार किया है. SC ने कहा कि  जल्दबाजी में कोई आदेश नहीं देंगे. कोर्ट ने DDA से पहले के आदेशों के पालन पर रिपोर्ट मांगी है. अदालत ने डीडीए से पूछा कि 1,16,000 पेड़ों का क्या हुआ? नए पौधे कितने लगाए गए और उनमें से कितने बचे. इस मामले की अगली सुनवाई 19 जनवरी को होगी.

CJI सूर्यकांत ने कहा कि जब तक कोर्ट के पिछले निर्देशों का पूरी तरह से पालन नहीं हो जाता, तब तक पेड़ काटने की इजाज़त नहीं दी जाएगी. कोर्ट ने DDA से पिछली सुनवाई में बताए गए लगभग 1,16,000 पेड़ों की स्थिति के बारे में पूछा और एक विस्तृत कंप्लायंस रिपोर्ट मांगी.

बेंच ने आर्मी अस्पताल के पास सड़क चौड़ी करने की ज़रूरत को माना. लेकिन इस बात पर ज़ोर दिया कि प्रोजेक्ट पूरा करते समय पेड़ काटने की संख्या शून्य की जानी चाहिए. इस मामले में अगली सुनवाई 19 जनवरी को तय है, जिसमें सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को उसके निर्देशों का पूरी तरह से पालन करने का आश्वासन दिया.

सुप्रीम कोर्ट ने राजधानी दिल्ली के अरावली के मोर्फोलॉजिकल रिज इलाके में 473 और पेड़ काटने की अनुमति मांगने वाली डीडीए की याचिका पर सख्त रवैया दिखाते हुए कहा कि वो हड़बड़ी में कोई आदेश नहीं देगा.  CJI सूर्यकांत ने कहा कि हम तब तक कुछ भी नहीं होने देंगे, जब तक हम यह सुनिश्चित नहीं कर लेते कि हमारे निर्देशों का पालन किया गया है.

डीडीए के वकील  मनिंदर सिंह ने कहा कि रिज जंगल की बाउंड्री वॉल का निर्माण लगभग पूरा हो गया है और GRAP की पाबंदियों के चलते उम्मीद है कि 28 फरवरी तक ये काम पूरा हो जाएगा. CJI ने कहा कि हमें दिखाइए कि हमारे आदेश का अनुपालन कितना हुआ है. आप एक दिन में एक लाख से अधिक पेड़ नहीं लगा सकते. आपको सबसे पहले तो जमीन खुदाई की कवायद पूरी करनी होगी. हमें इस बात पर पूरी रिपोर्ट चाहिए कि अब तक घटनास्थल पर क्या हुआ है.

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि संकरी सड़क के कारण ही ये सब करना पड़ा. चौड़ी सड़क इसलिए बनानी पड़ी क्योंकि यहां सेना के लिए अस्पताल है. इसलिए ही सड़क को चौड़ा करने की जरूरत है. अभी तक केवल ओपीडी काम कर रही है. इसलिए हलफनामे में ओपीडी लिखा है. उस सड़क पर ट्रकों आदि के परिचालन को समायोजित करने की आवश्यकता है. 

CJI सूर्यकांत ने कहा कि अस्पताल की जरूरत को हमारे पहले के फैसले से मान्यता दी गई है. लेकिन यहां लगभग 1,16,000 पेड़ हैं. हमें यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि पौधों की मृत्यु दर शून्य प्रतिशत हो. हमें यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि इसका पूरी निष्ठा और सख्ती से परिपालन किया जाए. 

मेहता ने कहा कि इस बाबत सरकार से निर्देश लेना होगा. याचिकाकर्ता के वकील गोपाल शंकर नारायण ने कहा कि वे अब पौधे रोपना चाहते हैं. यह प्रारंभिक चरण में है. सीजेआई ने कहा कि आजकल उगाए गए पेड़ों को भी सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया जा सकता है. लेकिन वृक्षारोपण ही होने की जरूरत है. पूरी कोशिश की जाए कि पीपल, नीम, जामुन,आंवला, अमलतास आदि के ऐसे पौधे लगाए जाएं जो जल्दी ही बड़े वृक्ष बन जाएं.

SG  ने कहा कि जो सड़क बनाई गई है वहां लगे पौधों को स्थानांतरित करने की जरूरत हैं. उन्हें किया जा सकता है. CJI ने कहा कि लेकिन कटाई का मतलब है काटना. इसलिए आपकी पूरी रिपोर्ट और कार्ययोजना के बिना हम जल्दबाजी में कुछ भी नहीं होने देंगे. सौभाग्य से इस कार्यवाही का परिणाम यह है कि अब इसका लंबे समय तक चलने वाला प्रभाव होगा. याद रखें कि जंगलों के ये  क्षेत्र कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जरिए नहीं बने हैं.

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